Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रकाशितवाक्य 1 प्रकाशितवाक्य 2 प्रकाशितवाक्य 3 प्रकाशितवाक्य 4 प्रकाशितवाक्य 5 प्रकाशितवाक्य 6 प्रकाशितवाक्य 7 प्रकाशितवाक्य 8 प्रकाशितवाक्य 9 प्रकाशितवाक्य 10 प्रकाशितवाक्य 11 प्रकाशितवाक्य 12 प्रकाशितवाक्य 13 प्रकाशितवाक्य 14 प्रकाशितवाक्य 15 प्रकाशितवाक्य 16 प्रकाशितवाक्य 17 प्रकाशितवाक्य 18 प्रकाशितवाक्य 19 प्रकाशितवाक्य 20 प्रकाशितवाक्य 21 प्रकाशितवाक्य 22Verse
प्रकाशितवाक्य 11:1 प्रकाशितवाक्य 11:2 प्रकाशितवाक्य 11:3 प्रकाशितवाक्य 11:4 प्रकाशितवाक्य 11:5 प्रकाशितवाक्य 11:6 प्रकाशितवाक्य 11:7 प्रकाशितवाक्य 11:8 प्रकाशितवाक्य 11:9 प्रकाशितवाक्य 11:10 प्रकाशितवाक्य 11:11 प्रकाशितवाक्य 11:12 प्रकाशितवाक्य 11:13 प्रकाशितवाक्य 11:14 प्रकाशितवाक्य 11:15 प्रकाशितवाक्य 11:16 प्रकाशितवाक्य 11:17 प्रकाशितवाक्य 11:18 प्रकाशितवाक्य 11:19



प्रकाशितवाक्य 11:3 का संदर्भ और अर्थ
इस पद में परमेश्वर दो गवाहों को अधिकार देता है कि वे प्रभु के बारे में भविष्यद्वाणी करें। वे “टाट ओढ़े हुए” अवस्था में, निर्धारित एक हजार दो सौ साठ दिन तक अपने संदेश देते हैं—यानी एक निर्धारित कालखंड जिसमें उनकी आध्यात्मिक यात्रा और प्रेरितिमय प्रकटवाद चलती है। संदर्भ में यह गवाही-कार्य पृथ्वी पर परमेश्वर के नये तरीके से सार्वजानिक किया जाना है; यह सांसारिक सत्ता के विरोध के बावजूद सच्चाई के प्रकाश को बनाए रखने का प्रतीक है।
केंद्रीय अर्थ
यहाँ दो गवाह एक संगठित, सार्वजनिक मिशन के रूप में प्रस्तुत होते हैं:—पहचान योग्य दायित्व, समय-सीमा, और उनके प्रकाशन का दायरा। “टाट ओढ़े हुए” स्थिति एक प्रकार की प्रतीकात्मकता है—दृश्यता में साधारणता, दया और आत्म-त्याग के साथ—पर भीतर यह सच का प्रचार है। एक हजार दो सौ साठ दिन का समय संकेत देता है कि परमेश्वर की योजना में पूरे, गहन, और निर्णायक संदेश के लिये एक स्पष्ट चक्र है।
मुख्य थिम्स
संबद्ध पाठ्य संदर्भ
- युक्तियाँ देती है कि परमेश्वर अपने दुष्ट विरोधों के बीच भी अपनी सत्यापित योजना को आगे बढ़ाते हैं (यूहन्ना 16:33; रोम 8:28)।
- पुराने नियम में प्रमाण के लिये ऐसे संदेशवाहक का विचार मिलता है जो दुष्ट शासन के विरुद्ध खड़े रहते हैं (यशायाह 52–53 की वेतियाँ)।
- नवीन निर्गमन के संदेश हेतु विश्वास और धैर्य का महत्व (इब्र 10:36; 2 तीमथी 4:2) दर्शाता है कि समय पर उत्तर देने वाले भीरण बनते हैं।
संभावित दृष्टिकोण—इतिहास-आधार टिप्पणी
यहां दो गवाहों का दृश्य ऐतिहासिक-भविष्यवाणी संदर्भ में प्रतीकात्मक रूप से यह सिखाता है कि ईश्वर अपने समय-चक्र में प्रचार-कार्य को कैसे चलाते हैं। “टाट ओढ़े हुए” प्रतीक शील और विनय के साथ अधिकार-पूर्ण घोषणा के लिए तैयारी का संकेत दे सकता है, जैसा कि चर्च इतिहास में भी देखा गया है: दमन के बावजूद सत्य की गवाही जारी रहती है।
व्यावहारिक विचार
हर विश्वासी के लिये यह पूछना उचित है: मैं अपने समय में किस प्रकार ईश्वर की साक्षीता को जी रहा/रही हूँ? क्या मैं कठिनाइयों के बावजूद सत्य के साथ खड़ा रहता/रहती हूँ? क्या मेरा जीवन भी दूसरे लोगों तक उद्धार की राह दिखाने में सक्षम है?
छोटा समापन
प्रकाशितवाक्य 11:3 हमें यह याद दिलाता है कि प्रभु अपने समय-धारा में एक विशेष उद्देश्य के लिए दूत-गवाह भेजते हैं; वे सत्य के प्रकाश को एक निर्धारित काल के भीतर प्रकाशित करते हैं। यह संदेश हमें धैर्य, निर्भरता और ईमानदार गवाही का पाठ पढ़ाता है—यह भी कि परमेश्वर के राज के प्रसार का कार्य कठिनाई के बावजूद चलता रहता है.
क्रॉस-रेफरेंसेस
1) यूहन्ना 16:33 — संसार के तनाव के बीच शांति का संदेश; यह गवाह-कार्य किन परिस्थितियों में भी्तर-प्रकटन के लिये प्रेरित करता है।
2) रोम 8:28 — परमेश्वर की योजना में सभी चीजें मिलकर भलाई के लिए काम करती हैं; समय-सीमा के भीतर गवाही का उद्देश्य स्पष्ट होता है।
3) इब्र 10:36 — धैर्य ताकि परमेश्वर के उद्देश्य पूरे हों; गवाही भी इसी धैर्य से पूर्ण होती है।
ध्यान दें: नीचे के उद्धरण या टुकड़े मैथ्यू हेन्�री, अॅल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क से संभव हो तो संक्षेप में उद्धृत किया गया है; पूर्ण पद उद्धरण यहाँ नहीं हैं ताकि पाठ-निरपेक्ष कवरेज रहे।