Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 18:17 (HINIRV) — immédiate setting
पंक्ति 17 वह एक साथ घटित घटनाओं का चित्रण प्रस्तुत करती है जहाँ एक समूचा व्यापर-समुदाय एक ही क्षण में अपनी सारी सम्पत्ति खो बैठता है। ज्यों एक रात के दौरान एक घड़ी में भारी धन का नाश हो जाना—घड़ी भर में—यह चेतावनी देता है कि सांसारिक संपत्ति अस्थायी है और उसे बचाए रखनेवाला एक ही स्थाई शक्ति है: परमेश्वर की न्याय-की वर्षा और क्रिया।
इस पाठ में परमेश्वर और विश्वास के बारे में जो स्पष्ट होता है
यह व्याख्या करता है कि धन-सम्पत्ति नश्वर है और उसे बचाने वाला कोई मनुष्य नहीं; पर दुनियाँ की विलासी समृद्धि के साथ-साथ उसके धारक भी प्रकृति की लहरों पर है। जब अपने-अपने व्यवसायी-कार्य से जुड़े लोग एक साथ थम जाते हैं, तो यह दिखाता है कि संसार का धन अकर्मण्य है—क्योंकि वह एक परमेश्वर-परायणता के अभाव में टूट सकता है। सत्य यह है कि विश्वास एक ऐसी आस्था है जो स्थिर रहती है जब सब कुछ धराशायी हो जाए; क्योंकि वह धन से नहीं, बल्कि परमेश्वर की निर्भरता से आशा रखती है।
कुछ महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
अन्य समान पाठ और संदर्भ
• दिलचस्प समानता: दाऊद की भिन्न-भिन्न अनुभवों में भी धन की अस्थायीत्व का बोध।
• प्रेरक संदर्भ: यिर्मयाह 17:5-8, मत्त 6:19-21, भज 49:6-9 — सभी बताते हैं कि पृथ्वी का धन टिकाऊ नहीं, पर परमेश्वर की कृपा और राजा-प्रभुता स्थिर है।
व्याख्या में ध्यान दें कि इन क्रियाओं से प्रेरित निर्णय-निर्माण केवल धन पर नहीं, पर परमेश्वर की इच्छा पर टिका होता है।
अपने जीवन में आज का अनुप्रयोग
संक्षेप निष्कर्ष
यह वाक्य संसारिक संपत्ति की दुर्बलता उजागर करता है और विश्वास-योग्यता की महत्ता बताता है। धन-उपार्जन के पीछे भागना नुकसान की संभावना बढ़ाता है, पर परमेश्वर की सत्ता में विश्वास और उसकी कृपा पर निर्भरता सदा स्थिर रहती है।
यहां के संदर्भ हमारे लिए एक चेतावनी भी हैं: जब सब कुछ हिल रहा हो, तब धर्म-संयम, प्रार्थना और समुदाय के साथ संतुलित निर्णय जीवन को स्थिर रख सकते हैं।
उद्धरण-सूचना: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के समान उद्धरण नीचे उनके शब्दों के संक्षिप्त, शैलीगत सार में मिलते हैं, पर पूर्ण पाठ की प्रतिलिपि नहीं दी गई है। यदि आपको उनके विशिष्ट वाक्यों के छोटे अंश चाहिए, बताइए, मैं संक्षेप में उद्धरण दे दूँगा।