प्रकाशितवाक्य 18:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि उसके पापों का ढेर स्वर्ग तक पहुँच गया हैं, और उसके अधर्म परमेश्‍वर को स्मरण आए हैं।

प्रकाशितवाक्य 18:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

प्रकाशितवाक्य 18:5 पर व्याख्या (HINIRV)

इस पद में रोना-धोना कहानियाँ के क्रम में जुड़ती है जब पृथ्वी की रुष्ट व्यवस्था गिरावट के मार्ग पर है और उसके पाप का सार आकाश तक पहुँच गया है। प्रकाशनवाक्य अध्याय 18 में बिसराने योग्य बनती है वह साम्राज्य का पतन है जो व्यावहारिक रूप से दुष्कर्म, अविश्वास और प्रभु-आशीर्वाद से दूर है। यह वाक्य बताता है कि परमेश्वर के नयाय के दिन पाप के कड़वे परिणाम उसकी सजाय के साथ आ जाते हैं; उसके पाप का ढेर स्वर्ग तक पहुँच गया है और उसका अधर्म परमेश्वर के स्मरण के अधिकारी बन गया है।

केंद्रीय संदेश

पद में दो धाराएँ स्पष्ट रूप से उभरती हैं: पाप का संग्रह और परमेश्वर की स्मृति। जब भाड़े का शासक, कारोबार, और सभ्यता पाप की गहराई में डूब जाती है, तब उसका अंत उसी समय निर्धारित हो जाता है जब यह पाप स्वर्ग तक पहुँचता है। यह न्याय का सिद्धांत है कि अधर्म न तो अटल रहता है और न मुक्त रहता है; उसे निश्चित समय पर परमेश्वर के क्रोध और न्याय द्वारा अभियुक्त किया जाएगा।

मुख्य विषय

  • कठोर पाप का परिणाम: पाप का ढेर बढ़ना एक चेतावनी है कि दुष्कर्म सामाजिक और आध्यात्मिक ढांचे को तहस-नहस कर देता है।
  • परमेश्वर की स्मृति: परमेश्वर सभी के कर्मों को याद रखते हैं और न्याय करने के लिए समय बनाते हैं।
  • न्याय का समय: पृथ्वी पर अन्याय के बावजूद, सत्य और नैतिकता की गवाही अंततः मूल्यांकित होती है।

अनुकरणीय क्रॉस-रेफरेंसे

1) यूहन्ना 8:34-36 में यह विचार मिलता है कि जो पाप में है वह दास है और सत्य उसे स्वाधीन कर सकता है; पाप के ढांचे का पतन परमेश्वर की स्वतंत्रता में परिणत होता है।

2) प्रवेशद्वार के निर्णयों में उनका न्याय: नीति-निर्णय और सामाजिक सत्ता का दुष्कृत्य अंततः योग्य दंड के लिए बुला लिया जाता है।

3) यशायाह 24:3-4 में भी संसार की कष्टदायक अवस्था का उल्लेख है कि पृथ्वी के नियम टूट जाते हैं जब कष्ट बढ़ता है; परन्तु परमेश्वर का प्रयोजन पूर्ण होता है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

हमारे संदर्भ में यह शास्त्र प्रेरणा देता है कि हम अपने ही जीवन के पाप-ढेर को न बढ़ाएं और सामाजिक-आर्थिक ढांचे में अन्याय से दूरी बनाएं। जब हमारी नीयत और व्यवहार परमेश्वर के नियमों के अनुरूप रहते हैं, तब हम इस आश्वस्ति को अनुभव करते हैं कि न्याय का दिन एक न एक दिन निश्चित है और सत्य की आकाशगंगा में वह सम्मान है जो बनता है।

संक्षिप्त समरी

18:5 में पाप के ढेर का आकाश तक पहुँचना और उसका अधर्म का स्मरण परमेश्वर की न्याय-योजना की ओर संकेत है। यह संदेश शोभायमान करता है कि पृथ्वी पर जो भी पाप बढ़ता है, उसके पीछे एक सत्य-अनुपात है— परमेस्वर का न्याय समय पर आकर सत्य को स्थापित करेगा।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

प्रकाशितवाक्य 18:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“हे मेरे परमेश्‍वर! मुझे तेरी ओर अपना मुँह उठाते लज्जा आती है, और हे मेरे परमेश्‍वर! मेरा मुँह काला है; क्योंकि हम लोगों के अधर्म के काम हमारे सिर पर बढ़ गए हैं, और हमारा दोष बढ़ते-बढ़ते आकाश तक पहुँचा है। (दानी. 9:7,8)

यिर्मयाह 51:9 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यिर्मयाह 51:9 (HINIRV) »
हम बाबेल का इलाज करते तो थे, परन्तु वह चंगी नहीं हुई। इसलिए आओ, हम उसको तजकर अपने-अपने देश को चले जाएँ; क्योंकि उस पर किए हुए न्याय का निर्णय आकाश वरन् स्वर्ग तक भी पहुँच गया है। (प्रका. 18:5)

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प्रकाशितवाक्य 16:19 (HINIRV) »
इससे उस बड़े नगर के तीन टुकडे़ हो गए, और जाति-जाति के नगर गिर पड़े, और बड़े बाबेल का स्मरण परमेश्‍वर के यहाँ हुआ, कि वह अपने क्रोध की जलजलाहट की मदिरा उसे पिलाए।

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