Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 18:6 — उसके अनुसार दो, और उसके कामों के अनुसार उसे दूना बदला दो
यह वचन प्रकाशितवाक्य के प्रभावशाली बिंदु—प्रलय के बाद के आहुति और प्रतिफल की प्रतिद्वंद्विता—में आता है। शास्त्रकार मसीह के शासन के अंतर्गत संसार के राजनीति-व्यवस्था और वित्तीय ढांचे के पापपूर्ण ढांचे के विरुद्ध ईश्वर के न्याय को उद्घाटित करते हैं। यहां हरक़त-प्रतिक्रियाओं की जगह, देवदत्त धर्म के अनुसार कर्मों के परिणाम स्पष्ट रूप से प्रतिफलित होंगे; जो कुछ किसी ने दिया, उसे उतना ही वह पाएगा, और जो उसने दूसरों के साथ किया, वह उसे doppio (गुणा) मिलेगा।
वैशिष्ट्यपूर्ण पाठक-धारणा
भंगिमाओं का यह संदेश यह दर्शाता है कि परमेश्वर न्यायी है और वह हर जीव को उसकी करनी के अनुसार पुरस्कृत या दंडित करेगा। यह एक चेतावनी नहीं सिर्फ एक दयालुता का संदेश है, बल्कि ऐश्वर्यपूर्ण समानता और दया के साथ-साथ संकटपूर्ण परिणामों की याद दिलाता है।
मुख्य शब्द और चित्र
सूत्रगत संदर्भ और उनके संकेत
नीचे के क्रॉस-रेफरेंस दर्शाते हैं कि कैसे बाइबल के अन्य भाग भी इस न्यायपूर्ण प्रतिफल के विचार को पुष्ट करते हैं:
पवित्रता से ज्ञान के मार्ग पर
इस पाठ से जीवन-संदेश यह है: God’s justice governs बर्ताव और निर्णय। भोग-विलास के क्षणों में भी हमारे कर्मों की गिनती रहती है; दूसरों के विरुद्ध एहसान और न्याय के दायरे में किया गया व्यवहार भविष्य में हमारे लिए प्रतिफल बनकर आता है। यह आधुनिक जीवन के लिए एक सतर्कता-परख है कि हम कैसे व्यवहार करते हैं—किसके लिए, किस उद्देश्य से, और कितनी निष्कपटता के साथ।
आज का व्यवहार
महत्वपूर्ण उद्धरण (खास स्रोत से यदि उपलब्ध हो): Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से आपसी समन्वय में—"जैसा उसने तुम्हें दिया है, वैसा ही उसको दो" के मूल भाव की पुष्टि करते हैं कि दया, न्याय और प्रतिफल का चक्र ईश्वर के दायरे में स्पष्ट है।
संदर्भ-नोट: यदि आप चाहें, तो मैं उपरोक्त विचारों के आधार पर विस्तृत उद्धरण-संदर्भ और अन्य क्रॉस-रेफरेंस भी दे सकता हूँ।