Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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यिर्मयाह 50:29 का तात्पर्य और व्याख्या
यिर्मयाह द्वितीय ग्रंथ से यह पद बाबेल के विरुद्ध इकट्ठे होने, उसकी सुरक्षा व्यवस्था बनाने और दंड के स्वरूप की स्पष्टता दिखाता है। भविष्यवक्ता यिर्मयाह बाबेल को एकादश-प्रवृत्ति और दुष्कर्म के कारण ईश्वर के सामने जवाबदेह ठहराते हैं। यह संदर्भ दिखाता है कि परमेश्वर अन्याय पर तुरंत और निर्भर प्रतिशोध के साथ कार्य करता है, और उसके लोगों के लिए न्याय की व्यवस्था बनती है।
क्या दिखाता है यह पाठ
इस पाठ में परमेश्वर बाबेल के विरुद्ध एक सख्त निर्णय सुनाते हैं—सब धनुर्धारियों को इकट्ठा करो, उसके चारों ओर छावनी डालो, ताकि कोई भी न भाग सके। यह एक सामरिक निर्देश है जो दुष्कर्म के परिणामस्वरूप होने वाले विनाश का स्पष्ट संकेत देता है। साथ ही, “यही उसने किया है” और “उसने यहोवा इस्राएल के पवित्र के विरुद्ध अभिमान किया है” जैसी पंक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि यह दंड कारण-हितैषिणता के साथ जुड़ा है: यहोवा के विरुद्ध उसकी घमण्ड का परिणाम।
धर्मशास्त्रीय शब्द-संरचना और चित्र
- धनुर्धारी: उद्धरणों में यह शब्द युद्ध-ताकत और दमन के प्रतीक के रूप में है।
- छावनी डालो: नियंत्रित घेरे बनाकर नगर-सुरक्षा की संरचना। यहाँ यह दर्शाता है कि दुष्ट व्यवस्था के विरुद्ध पूर्ण नियंत्रण और दंड की तैयारी है।
- पवित्र के विरुद्ध अभिमान: परमेश्वर के साथ विश्वासघात और पवित्रता के उल्लंघन को दर्शाता है, जो दण्ड के मुख्य कारण के रूप में प्रस्तुत है।
अन्य सुसंगत घटनाओं से संबंध
- संदर्भ: प्रका. 18:6 के साथ संकेत दिया गया है कि बाबेल के लिए वही सिद्धांत लागू होता है जो माप-तौल में पाया जाता है: जो कुछ किया गया वही लौटकर आता है।
- अन्य उद्धरण: यहोवा के न्याय और दया के संतुलन का पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर न केवल दंड देता है, बल्कि उद्धार और प्रतिवर्तन के अवसर भी प्रस्तुत करता है।
पवित्रशास्त्री के विचारों का संकलन
इस पाठ पर पूर्व-युग के विद्वान्नों का सामान्य निष्कर्ष यह है कि बाबेल की शक्तियाँ परमेश्वर के हाथों में हैं और उसकी योजना में न्याय के साथ पवित्रता की रक्षा है। प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संझे विचारों के अनुसार यह दिखता है कि बाबेल के पतन में एक सामाजिक-आर्थिक न्याय भी जुड़ा है—जहाँ अत्याचार और दमन का परिणाम भागने नहीं देता।
आज के संदर्भ में उपयोग और अनुप्रयोग
छोटा cross-reference संक्षेप
- प्रका. 18:6 के साथ विचार: जो बोया वही काटना।
- प्रेषित 14:22: विश्वासियों के लिए धैर्य और प्रतिरोध के समय का महत्व।
- यशाया 10:1-2: अन्याय के विरुद्ध ईश्वर की न्याय-योजना का चित्रण।
संक्षेप में, यिर्मयाह 50:29 इस बात को पुष्ट करता है कि परमेश्वर अधर्म के विरुद्ध कानून और न्याय से कार्य करता है, और उसकी पवित्रता के प्रतिरूप बने रहने वाले लोगों को सुरक्षा देता है। बाबेल के विनाश की यह चेतावनी, आज की दुनिया में भी सत्य, न्याय और दया की कसौटी पर खरी उतरती है।