Old Testament
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यिर्मयाह 50:1 यिर्मयाह 50:2 यिर्मयाह 50:3 यिर्मयाह 50:4 यिर्मयाह 50:5 यिर्मयाह 50:6 यिर्मयाह 50:7 यिर्मयाह 50:8 यिर्मयाह 50:9 यिर्मयाह 50:10 यिर्मयाह 50:11 यिर्मयाह 50:12 यिर्मयाह 50:13 यिर्मयाह 50:14 यिर्मयाह 50:15 यिर्मयाह 50:16 यिर्मयाह 50:17 यिर्मयाह 50:18 यिर्मयाह 50:19 यिर्मयाह 50:20 यिर्मयाह 50:21 यिर्मयाह 50:22 यिर्मयाह 50:23 यिर्मयाह 50:24 यिर्मयाह 50:25 यिर्मयाह 50:26 यिर्मयाह 50:27 यिर्मयाह 50:28 यिर्मयाह 50:29 यिर्मयाह 50:30 यिर्मयाह 50:31 यिर्मयाह 50:32 यिर्मयाह 50:33 यिर्मयाह 50:34 यिर्मयाह 50:35 यिर्मयाह 50:36 यिर्मयाह 50:37 यिर्मयाह 50:38 यिर्मयाह 50:39 यिर्मयाह 50:40 यिर्मयाह 50:41 यिर्मयाह 50:42 यिर्मयाह 50:43 यिर्मयाह 50:44 यिर्मयाह 50:45 यिर्मयाह 50:46



यिर्मयाह 50:35 — क्यों यह वाणी मायने रखती है
यिर्मयाह 50 में नबियाह का संदेश बुरे समय के अंतर्गत ही शान्ति के अवसर खोलता है। यह वचन बाबुल-वर्णित शासन पर सीधे तलवार के दस्तावेज का संकेत देता है—यह परमेश्वर की न्याय की घोषणा है जो अत्याचारी साम्राज्यों पर प्रभाव डालती है। जब हम यह verse देखते हैं, तब यह याद दिलाता है कि परमेश्वर के निर्णय शासन और सत्ता के नियमों को नहीं तोड़ते; वे पाप के कारण आये कठोर परिणामों की पुष्टि करते हैं। इसलिए यह वचन सिखाता है कि भले ही सत्ता कभी-भी कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, परमेश्वर की वाणी से उसकी संचित अपेक्षा, दंड और पुनर्स्थापना की दिशा निर्धारित होती है।
मूल संदर्भ और संदेश
ईराक-प्राचीन शहरों के समुदाय पर उसका अधिकार स्पष्ट रूप से दिखाने के लिए यह संदेश अभिषेकित है। बाबुल के शासन के विरुद्ध यह कथन, “तलवार चलेगी!” एक चेतावनी है कि अन्याय, अत्याचार, और दमन के विरुद्ध परमेश्वर का न्याय आना ही है। साथ ही, कसदियों, बाबेल के हाकिम, पंडित आदि—सब निवासियों के ऊपर यह तलवार चलना यह दर्शाता है कि राजसी-सम्राज्य किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि हर स्तर पर भ्रष्ट व्यवस्था को तोड़ा जाएगा।
मुख्य विचार
क्रॉस-रेफरंस और उनसे जुड़ी सूझ-बूझ
यिर्मयाह 25:9— परमेश्वर एक उल्लेखित चक्र में शक्तिशाली राजा-वर्गों के विरुद्ध निर्णय लेते हैं; यह पवित्र दंड का संकेत है, ताकि उनके विरुद्ध अन्याय न रहे।
यिर्मयाह 51:11— बाबुल के विरुद्ध परमेश्वर की सेना की तैयारी; यहाँ तलवार के साथ विनाश का चित्र पुनः उभरता है, जो इसी अध्याय का विस्तार है।
यशायाह 13:9— बड़े-बड़े नगरों पर दंड और शासन-उद्धार की पुरानी प्रतिश्रुति; यह घटनाक्रम नये नियम में भी न्याय की मांग को पुष्ट करता है।
पवित्र लेखन से मिलने वाला साक्षी स्वभाव
जो कुछ भी होता है, वह परमेश्वर के न्याय के एक हिस्से के रूप में आता है। यह हमें यह स्मरण कराता है कि सत्ता चाहे कितनी भी मजबूत हो, परमेश्वर के बाहर न्याय की सुरक्षा नहीं है। इस प्रकार, विश्वासियों को लगता है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर की साक्त कामना और उसकी पर्यवेक्षण के साथ चलना चाहिए।
व्यावहारिक देवotional निश्चय
जब हमारे पास भय के क्षण हों, तब यह verses स्मरण कराती है कि परमेश्वर सत्ता के बंधनों से ऊपर है और दुष्कर्म के विरुद्ध उसकी न्याय योजना आकार लेती है। आत्मिक अडिगता बनाने के लिये आप pray—ध्यान दें कि परमेश्वर की क्रिया समय पर आती है, और भले ही परिस्थितियाँ कठिन हों, उसकी वाणी शुद्ध और सत्य है।
टिप्पणी के संकेत
यहांMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों का संक्षिप्त मिलाजुला सार है:
• Henry के अनुसार, यह संदेश परमेश्वर की न्याय की पुष्टि है और सभी उच्चाधिकारों पर एक समान प्रभाव डालता है; दुष्ट शक्तियों के विरुद्ध एक वैश्विक चेतावनी।
• Barnes बताते हैं कि यह बहुभाषी दमन के विरुद्ध एक चेतावनी है—न केवल शासनकाल पर, बल्कि हर स्तर पर भ्रष्ट आचरण का परिणाम भुगतना होगा।
• Clarke यह देखाते हैं कि तलवार का प्रयोग निष्कासनात्मक नहीं, बल्कि सुधारात्मक उद्देश्य भी है—ताकि लोग अपने पाप से फिर लौटें।
सूचित उद्धरण: “यहोवा की यह वाणी है”—यह भाषा सुनिश्चित करती है कि प्रकाशित निर्णय परमेश्वर के अभिषिक्त न्याय से प्रेरित है।
गहरे संपर्क: यह पदयात्रा एक साथ अन्याय के विरुद्ध साहस और आशा देती है। यह याद दिलाती है कि परमेश्वर की योजना पाप-समय के अंत में भी न्याय-संतुलन बनाती है, और नई शुरुआत की जगह बनाती है।