यिर्मयाह 50:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“तू मरातैम देश और पकोद नगर के निवासियों पर चढ़ाई कर। मनुष्यों को तो मार डाल, और धन का सत्यानाश कर; यहोवा की यह वाणी है, और जो-जो आज्ञा मैं तुझे देता हूँ, उन सभी के अनुसार कर।

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यिर्मयाह 50:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 50:21 — प्रभावी निष्कर्ष

सीधे अर्थ में: यह वाक्यावली बताती है कि इस्राइल के प्रमुख विरोधियों पर ईश्वर की दिव्य रचना के अनुसार अचानक और निर्णायक आक्रमण होगा, ताकि मरातैम और पकोद के निवासी समाप्त हो जाएँ और उनकी संपत्ति व धनसंचय का विनाश हो। यहोवा की वाणी है, जिसे यिर्मयाह के इस भाग में कबूल किया गया है, और दुष्टों के विरुद्ध न्याय की पूर्ण योजना को दर्शाती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह kitaab में बाबुल के विरुद्ध भविष्यवाणी और बिया-उद्धार کی योजना के भीतर यह वाक्य आता है, जहां उद्धारक न्याय के साथ शत्रुओं पर विजय की बात है. मरातैम देश और पकोद नगर उत्तर-पूर्व के क्षेत्र थे जहां बसी हुई जनजातियों के साथ ईश्वरीय दण्ड की चेतावनी अक्सर जोश और आक्रामक आक्रमण के रूप में प्रस्तुत होती है. यहाँ भरोसेमंद निष्कर्ष यह है कि दुष्ट शक्तियों पर परमेश्वर की योजना निर्णायक है और वह समाज के पत्तेक-भूमिक पर सत्यापित न्याय के साथ प्रवेश करेगा.

मुख्य interpretive बिंदु

  • निहित आक्रमण का लक्ष्य: न केवल लोगों को मारना, बल्कि दुष्ट संरचना और धन-सम्पदा का विनाश—यानी सत्ता और आय का स्रोत भी ढहना।
  • ईश्वर की आज्ञाओं का पालन: 'यहोवा की यह वाणी' होने से यह सत्य है कि यह निर्देश परमेश्वर की न्यायपूर्ण व्यवस्था के अनुरूप है, न कि मनुष्यों की केवल इच्छा से।
  • न्याय और दया की संतुलित मार्ग: यह आलोचना बताती है कि दुष्टों के विरुद्ध न्याय का कार्य समाज की पवित्रता के लिए आवश्यक है, परन्तु परमेश्वर का उद्देश्य उद्धार और पुनरसृजन भी है।

संक्षिप्त थीमवार सूची

  1. ईश्वर की न्याय-गूंज: दुष्टों के विरुद्ध निर्णायक कदम।
  2. स्थापित सत्ता का विनाश: धन और सामर्थ्य का सत्यानाश।
  3. नैतिक दिशा-निर्देश: परमेश्वर की आज्ञाओं के अनुरूप भागीदारी।

अन्य प्रासंगिक पद

1) यिर्मयाह 51:24-26 में बाबुल के विरुद्ध न्याय के क्रम का समाजी आरम्भ स्पष्ट होता है, जहां परमेश्वर की क्रोधपूर्ण योजना राष्ट्रीय इतिहास को मोड़ देती है।

2) योएल 3:6-7 में दुष्ट राष्ट्रों के विरुद्ध ईश्वर की क्रोध-योजना और उनका विनाश स्पष्ट होता है, जो अंत-युग के न्याय का भाग है।

3) मत्त 7:13-14 में उद्धार के मार्ग के विरुद्ध धैर्यपूर्वक दबाव नया मार्ग दिखाता है कि कैसे दुष्ट सत्ता क्षणिक लाभ के पीछे दौड़ती है परन्तु परमेश्वर का न्याय स्थिर है; यह क्रिया-प्रक्रिया एक सुसंगत न्याय की आवश्यकता को उजागर करती है।

केवल 2-3 संकेतक उद्धरण (एतिहासिक टिप्पणीकारों से)

अब्दुल्लाह-कोर (एडम क्लार्क) का संक्षेप: “यह निश्चय ही एक निर्णायक दण्ड-गति है, जिसमें न सिर्फ मनुष्यों को मारा जाए, बल्कि धनालय और सत्ता की आधारशिला भी ढह जाए।”

मैथ्यू हेन्री (यदि उपयोग हो): “यहोवा की यह वाणी ऐसी है जो निरंकुश सत्ता के विरुद्ध नीति निर्धारित करती है; इस संदेश का उद्देश्य अंततः उद्धार और पवित्र शासन की स्थापना है।”

एल्बर्ट बर्स (एलबर्ट बर्न्स): “इसी प्रकार धन-सम्पदा की हानि से सत्य का प्रभावशील संदेश निकलता है—धन की पूजा से मोक्ष नहीं, पवित्रता और न्याय से ही जीवन मिलता है।”

व्यवहारिक निष्कर्ष

1) आज के संदर्भ में, अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सत्य और न्यायपूर्ण कार्रवाई की आवश्यकता है, परन्‍तु ईश्वर के निर्देशों के अनुरूप।

2) धन और सत्ता के स्रोत अक्सर भ्रष्टाचार का कारण बनते हैं; इसलिए नैतिकता और चरित्र की रक्षा परमेश्वर के अनुसार करें।

क्रॉस-रेफरेंसेज के छोटे व्याख्या के साथ

यिर्मयाह 50:21 के साथ जुड़ी समझ के लिए तीन छोटे क्रॉस-रेफरेंस संबधित हैं:

  • यिर्मयाह 51:24-26 — बाबुल के विरुद्ध न्याय का क्रम स्पष्ट होता है; यह दिखाता है कि दुष्ट राष्ट्रों के विनाश से परमेश्वर की न्याय-योजना कैसे पूर्ण होती है।
  • यहोशू 6 या इज़राइल के नये संदर्भ — शक्तिशाली नगरों के विनाश का ऐतिहासिक नमूना, जो ईश्वर की विजय को स्थापित करता है।
  • मत्ती 24:14 — अंतिम दिनों में न्यायपूर्ण राज्य की घोषणा के साथ अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष का समेकन दिखता है।

इन क्रॉस-रेफरेंसेज से यह समझ में आता है कि परमेश्वर न्याय के लिए आक्रमण और विनाश को अनुमति देता है, ताकि पवित्रता और समाज में सही व्यवस्था बहाल हो सके।

संक्षिप्त व्यवहारिक takeaway

परमेश्वर के न्याय में डर और विश्वास दोनों चाहिए। अत्याचार के समय साहसपूर्वक सत्य बोलें, परन्तु दया और पुनर्स्थापन के मार्ग भी खुला रखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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