Old Testament
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यिर्मयाह 1 यिर्मयाह 2 यिर्मयाह 3 यिर्मयाह 4 यिर्मयाह 5 यिर्मयाह 6 यिर्मयाह 7 यिर्मयाह 8 यिर्मयाह 9 यिर्मयाह 10 यिर्मयाह 11 यिर्मयाह 12 यिर्मयाह 13 यिर्मयाह 14 यिर्मयाह 15 यिर्मयाह 16 यिर्मयाह 17 यिर्मयाह 18 यिर्मयाह 19 यिर्मयाह 20 यिर्मयाह 21 यिर्मयाह 22 यिर्मयाह 23 यिर्मयाह 24 यिर्मयाह 25 यिर्मयाह 26 यिर्मयाह 27 यिर्मयाह 28 यिर्मयाह 29 यिर्मयाह 30 यिर्मयाह 31 यिर्मयाह 32 यिर्मयाह 33 यिर्मयाह 34 यिर्मयाह 35 यिर्मयाह 36 यिर्मयाह 37 यिर्मयाह 38 यिर्मयाह 39 यिर्मयाह 40 यिर्मयाह 41 यिर्मयाह 42 यिर्मयाह 43 यिर्मयाह 44 यिर्मयाह 45 यिर्मयाह 46 यिर्मयाह 47 यिर्मयाह 48 यिर्मयाह 49 यिर्मयाह 50 यिर्मयाह 51 यिर्मयाह 52Verse
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संदर्भ एवं संक्षिप्त व्याख्या
यिर्मयाह 50:26 में नब्बे की ओर इशारा करते हुए यह भविष्यवाणी है कि बबीलोन की सैन्य शक्ति और प्रबल किलेबंदी भी नाश के लिये बचेगी नहीं। इस वाक्य का माहात्म्य उस कुल प्रवचन का हिस्सा है जिसमें यिर्मयाह (और बाद में यहूदियों की आशा-प्रतिक्षा) बबीलोन की निर्णायक सजा के विषय में बोल रहे हैं। पूरा अध्याय बबीलोन की निशानदेही, उस पर परमेश्वर के न्याय की घोषणा और विदेशी देशों के सम्मिलित प्रहार के दृश्य प्रस्तुत करता है।
मुख्य अर्थ
“पृथ्वी की छोर से आओ” का आशय है दूर-दराज के राष्ट्रों और समुद्री तटों तक फैली शक्तियों का एकजुट होकर आना। “उसकी बखरियों को खोलो” से अभिप्राय किलेबंदी, गढ़ और सैन्य व्यवस्था को भेद डालना है। “ढेर ही ढेर बना दो; ऐसा सत्यानाश करो कि उसमें कुछ भी न बचा रहें” स्पष्ट चेतावनी है कि यह नाश पूर्ण और निर्णायक होगा — न केवल विजयी होना, बल्कि बबीलोन को अस्त-व्यस्त करके उसकी रीढ़ तोड़ देना। यह वाक्य न्याय और प्रतिफल के सिद्धांत को व्यक्त करता है: जो अहंकार और दमन में लगा रहा, वह समय पर दंड भोगेगा।
प्रमुख विषय
संबंधित स्थल
यिर्मयाह 51 में इसी विषय की विस्तृत पुनरावृत्ति मिलती है जहाँ बबीलोन के विनाश के और कारण और परिणाम बताये गये हैं। यह उस संदेश से मेल खाता है कि परमेश्वर अन्य देशों को उपकरण बनाकर भी अपने न्याय को पूरा करता है (देखें यिर्मयाह 25)। दानीय्येल 5 में बबीलोन के पतन का प्रतीकात्मक वर्णन है जो इसी भविष्यवाणी की पूर्ति के रूप में समझा जा सकता है।
व्यावहारिक परावर्तन
व्यक्ति और समुदाय के रूप में इस पद से हमें याद रहता है कि अहंकार, उत्पीड़न और अन्याय स्थायी नहीं रहते। परमेश्वर की दृष्टि में दुष्टता का हिसाब होगा। यह पाठ मन को झकझोरकर ईमानदारी, न्याय और दया को महत्व देने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही यह हमें अवेदनशील बनाता है: जब परमेश्वर न्याय के उपाय करता है, तब परिणाम व्यापक हो सकते हैं; अतः व्यक्तिगत रूप से दुष्ट राजनीति या सामरिक अहंकार को चुनौती देने के लिए सही मार्ग अपनाना आवश्यक है।
दर्शनीय उद्धरण और संदर्भ
मैथ्यू हेनरी का समग्र संदर्भ बबीलोन पर ईश्वरीय न्याय की आवश्यकता पर बल देता है; उन्होंने लिखा है कि नायकों और राष्ट्रों का पतन परम योजना का एक साधन था (संक्षेप में उद्धरण स्वरूप उपदेशात्मक विचार)। अल्बर्ट बार्न्स इस भविष्यवाणी को ऐतिहासिक पूर्ति और वास्तविक सैन्य आक्रमण के दृष्टिकोण से देखता है और बबीलोन के सैन्य ढाँचे के टूटने पर टिप्पणी करते हैं। आदम क्लार्क ने भी इसी पद को बबीलोन की पूर्णता-भंग के संकेत के रूप में व्याख्यायित किया है। (यहां उद्धरण संक्षिप्त और विषयगत प्रस्तुत किए गये हैं।)
संक्षेप
यिर्मयाह 50:26 कठोर भाषा में घोषित करता है कि दमनकारी साम्राज्य भी परमाधीश्वर के न्याय के समक्ष नहीं टिक पाएगा। यह पाठ न्याय की अनिवार्यता, दुष्टता के नाश और उन साधनों का संकेत है जिनसे परमेश्वर अपनी इच्छा पूर्ण करता है। उसी के अनुरूप, पाठक को न केवल इतिहास की पूर्ति में इंटरेस्ट रखना चाहिए, बल्कि अपने जीवन में न्याय और नम्रता के मार्ग अपनाने की प्रेरणा लेनी चाहिए।