यिर्मयाह 50:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उसके जलाशयों पर सूखा पड़ेगा, और वे सूख जाएँगे! क्योंकि वह खुदी हुई मूरतों से भरा हुआ देश है, और वे अपनी भयानक प्रतिमाओं पर बावले हैं। (प्रका. 16:12)

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यिर्मयाह 50:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 50:38 का स्पष्ट अर्थ

इस पद में भविष्यवक्ता यिर्मयाह यह बतला रहा है कि बृहत्तर बाबुल के मistry-सम्बन्धी आशीर्वादों के साथ उनका जलाशय और प्रतिमाओं पर निर्भरता टूट जाएगी, और उनकी देहाती धरोहर सूख जाएगी। पृथ्वी पर उसके जलाशयों के सूख जाने से यह स्पष्ट होता है कि उनका आर्थिक-आधार और आस्था दोनों अस्थिर पड़ेंगे, क्योंकि वे मूर्तिपूजा की दीर्घकालिक सुरक्षा और सुरक्षा-लाभ पर भरोसा करते थे।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यिर्मयाह ने बाबुल के भविष्य के आक्रमण और नष्टि की चेतावनियाँ दीं। इस अध्याय में बाबुल की राजधानी का आक्रमण और उसके परिणाम स्वरूप लोगों के मरने, भाग जाने और विरले लोग दयालु होकर परमेश्वर के पास लौटने की उम्मीदें उभरीं। 指 भी यह दिखाते हैं कि मूर्तिपूजा से जुड़ी आशाओं का पतन होगा क्योंकि प्रभु का निर्णय मूर्तिपूजा के विरुद्ध है।

व्याख्यात्मक बिंदु

  • जलाशयों पर सूखा: दैनंदिन जीवन और अर्थ-व्यवस्था के लिए जल का महत्व; जलाशयों का सूखना संकेत है कि बाबुल की समृद्धि और सुरक्षा झूठी है।
  • खुदी हुई मूरतों से भरा देश: मूर्तिपूजा उनके समाज का केंद्र था; देवी-देवताओं के प्रतीक उनके साक्षात विश्वास बन चुके थे, पर वे परमेश्वर की एकता और साक्षात्कार को खो बैठते हैं।
  • भयानक प्रतिमाओं पर बावलेपन का तात्पर्य: वैचारिक भ्रम और दैवीय चेतावनियों से विमुख होकर वे असुरक्षा में पड़े; वस्त्र-आडंबर के पीछे वास्तविक सुरक्षा नहीं है।

संयोगी पाठ और विचार

यदि हम इस मार्मिक दृश्य को अपने समय से जोड़ें, तो नीचे दिए गए बिंदु प्रासंगिक होते हैं:

  • धार्मिक आस्था का अस्थिर होना: परमेश्वर के साथ शैली-भरोसे के स्थान पर भौतिक और मानक साधनों पर निर्भरता टूटने पर अधिक चोट पड़ती है।
  • आर्थिक-संरचना का क्षय: जल स्रोतों का सूखना एक प्रतीक है कि समाज की संपत्ति और सुरक्षा केवल भौतिक संरचना पर निर्भर नहीं रह सकती।
  • तीव्र चेतावनियाँ और प्रतिफल: परमेश्वर के निर्णय से बच निकलना संभव नहीं; किन्तु प्रतिरोध के साथ लौटना संभव है।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ के साथ संक्षेप

1) व्याख्या में प्रत्यक्ष संदर्भ: प्रसिद्ध प्राचीन दुष्कारी उन्मूलन के दृश्य से तुलना करते हुए, मूर्तिपूजा के विरुद्ध चेतावनी मजबूत होती है।

2) प्रेरित संदर्भ: उद्धार के लिए परमेश्वर की इच्छा और आत्मिक पुनःस्थापनात्मकता की ओर संकेत देता है।

3) साहित्यिक संदर्भ: प्राकृतिक आपदाओं के माध्यम से दैवी निर्णय की पुष्टि।

व्यावहारिक निष्कर्ष

1) हमारी आस्था की जड़ें कभी भी भौतिक साधनों पर न रहें; केवल परमेश्वर में ही स्थिरता है।

2) अपने जीवन में मूर्तिपूजा या सामग्री-भरोसे की अस्थायीता को पहचानें; परमेश्वर के साथ विश्वास को केंद्र में लाएं।

सूचनात्मक नोट्स

इस पद से संबद्ध डिप्रेशन, भय या भय-आधारित विचारों को दूर रखते हुए हमें परमेश्वर की शान्ति और विश्वास की स्मरण करानी चाहिए।

यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों के संयुक्त संयोजन से प्रेरित है; परन्तु यहाँ वे सीधे उद्धृत नहीं हैं ताकि मूल पाठ के प्रति सम्मान बना रहे। जहां आवश्यक रहा, इनके विचारों के सार को समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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