यशायाह 47:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तूने अपनी दुष्टता पर भरोसा रखा*, तूने कहा, “मुझे कोई नहीं देखता;” तेरी बुद्धि और ज्ञान ने तुझे बहकाया और तूने अपने मन में कहा, “मैं ही हूँ और मेरे सिवाय कोई दूसरा नहीं।”

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यशायाह 47:10 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 47:10 पर टिप्पणी (HINIRV)

यशायाह 47 अध्याय देश-नाश के लिए बंधन और दुष्ट शासन के विरोध की भविष्यवाणी करता है। हव्वा-जगह के लोग और बाबुल के दासत्व के संकेत यहाँ दिखते हैं; एक भ्रष्ट साम्राज्य के भीतर ईश्वर के न्याय का संदेश स्पष्ट हो उठता है। इस पंक्ति में वह दशा वर्णित है जहाँ अत्याचारीराज्य ने अपनी बुद्धि पर गर्व किया और यह मान लिया कि उसे किसी से खतरा नहीं है, क्योंकि उसने अपने ऊपर नज़र रखने की व्यवस्था बना ली थी। यह अभिमान और आत्म-निर्णय का परिणाम है: “तूने कहा, मुझ पर आँख नहीं”—यही वह अवस्था है जिसमें उद्धारकर्ता की दृष्टि से छिपना असंभव हो जाता है।

मुख्य अभिप्राय

यह शास्त्र उन आत्म-द Ravi पर चोट करता है जो संसार की शक्तियों पर भरोसा करते हैं और परमेश्वर के न्याय से अंजान रहते हैं। हूबहू कहा गया हो कि दुष्टता पर निर्भरता और स्व-निर्भरता एक दिन-पर-पराभव का कारण बनती है। शासकों के अभिमान, अपने ज्ञान और योजना पर निर्भरता, अंततः उन्हें ईश्वर के सामने जवाबदेह ठहरा देती है।

केंद्रीय विषय

  • घमंड और आत्म-निर्भरता का परिणाम: आदमी अपने मन की चालों को श्रेष्ठ मानकर ईश्वर की चेतावनियों को अनदेखा कर देता है।
  • ईश्वर की निगहबानी: परमेश्वर सभी जगह रहते हैं; दुष्ट लोग चाहकर भी छिप नहीं सकते।
  • न्याय की तैयारी: उद्धार और दया के साथ न्याय का समय आ पहुँचा है; यह बाबुल की सेना और सत्ता को हिला कर रख देगा।

संबंधित पद/shastra संदर्भ

- यशायाह 46:5–7: मूर्तिपूजा और मानव-निर्भरता के साथ-साथ प्रभु के विरुद्ध बढ़ते अभिमान से बचने की विनती।

- यिर्मयाह 17:5–8: स्व-निर्भरता का विष; कौन भरोसा करता है वह निर्जन सूखे में होता है और जो भरोसा प्रभु पर रखे वह फलता-फूलता है।

- दानिय्येल 4:25–27: दूसरों के राज-पाट के भीतर भी परमेश्वर के अनुसार समय और नियम चलते हैं; घमंड का परिणाम सत्ता का परिवर्तन है।

व्यावहारिक विचार

हम में से कितने समय-समय पर दुष्टतापूर्ण तात्कालिकता में फंस जाते हैं—अपने योजनाओं, ज्ञान और सुरक्षा-व्यवस्थाओं पर भरोसा कर लेते हैं। परन्तु यह उद्घाटन हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के सामने आत्म-निर्भरता विजय से नहीं, दण्ड से ही देखी जाती है। हमें चाहिए कि हम अपने दिल से यह कहें: प्रभु, तू ही मेरी रक्षा है; मेरे भीतर और बाहर सब कुछ तुझ पर निर्भर रहे।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इस पदचिह्न में अभिमानी शासन का अंतर्द्वंद्व उद्घाटित होता है: दुष्टता पर भरोसा और ज्ञान-गौरव जो दिखाते हैं कि वे सर्वशक्तिमान की नजर से बचेंगे, वे यहीं भुल जाते हैं कि ईश्वर हर क्रिया-कलाप पर नज़र रखता है। यह पंक्ति हमें यह स्मरण कराती है कि आत्म-निर्भरता क्षणिक चमत्कार हो सकती है, पर परमेश्वर के न्याय से बचना असंभव है; उसकी चेतावनी और कृपा के साथ जीवन जीना ही सच्ची समझदारी है।

अनुच्छेद संदर्भ: यशायाह 46–47 और संबद्ध आयतें

उद्धृत विचारधारा (संक्षेप):

“ऊँचे अभिमान पर जोर नहीं—परमेश्वर के सामने विनम्रता ही असली ज्ञान है।”

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 47:10 समानांतर पद और संबंधित वचन

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