यशायाह 47:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तू तो युक्ति करते-करते थक गई है; अब तेरे ज्योतिषी जो नक्षत्रों को ध्यान से देखते और नये-नये चाँद को देखकर होनहार बताते हैं, वे खड़े होकर तुझे उन बातों से बचाएँ जो तुझ पर घटेंगी।

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यशायाह 47:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 47:13 का संदर्भ: युक्ति-आधारित भय और निर्भरता

पद का पृष्ठभूमि: यह आयत बंधन के समय की राजधानी बब्वील के बारे में है, जहाँ नारी-राजा के रूप में बंधन की रातों में, उसकी राजधानी की ज्योतिषी, ज्योतिषी और नक्षत्र-ज्योति पर भरोसा करते रहते हैं। परन्तु यहाँ भविष्यवक्ता यह संकेत करते हैं कि अब वे सब “तू तो युक्ति करते-करते थक गई है”—यानी अपने उपायों, प्रथाओं और गिनती-गणना भरे तंत्र से थकावट महसूस कर रही है। यह पंक्तियाँ दर्शन कराती हैं कि ईश्वर के विरुद्ध मानव-योजना का अंततः ढीला पड़ना तय है, क्योंकि वह जो श्रेष्ठ है, वही वास्तविक सुरक्षा देता है।

क्या दर्शाती है यह धारा हमारे ईश्वर और विश्वास के बारे में

यह आयत भगवान के प्रति विश्वास की वास्तविकता को उजागर करती है: जब मनुष्य अपनी बुद्धि और शक्ति पर निर्भर रहता है, तब भी वास्तविक सुरक्षा केवल उसी में है। देवी-देवताओं के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व-स्थिति के मालिक के लिए यह भाव उठना चाहिए कि “मैं तुम्हारे साथ हूँ।” नक्षत्रों के ज्ञान पर निर्भरता दिखाती है कि कुछ उपाय समय-समय पर मानव-योजना के अनुसार अस्थिर हैं; पर परमेश्वर की योजना अटल है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियाँ

  • —एक ऐसी स्थिति जिसमें बारंबार प्रयत्न, योजना और उपाय करने के बावजूद आत्मविश्वास खोना या थक जाना।
  • —गणना-गौरव के माध्यम से भविष्य बताने वालों की ओर संकेत; वे बाह्मियों की चालों से सुरक्षा की आशा दिखाते हैं।
  • —नई प्रणालियाँ, नई भविष्य-चर्चा, परन्तु पुराने भरोसे से बाहर निकलना नहीं।

अन्य प्रासंगिक आयत और उनका सार

1) इस्मिएल 33:6 जैसे वचन बताते हैं कि सुरक्षा और कर्तव्य ईश्वर के चातुर्य और प्रतिज्ञा में है; 2) मत्ती 6:33 में येसू कहते हैं कि ईश्वर के राज्य और उसकी righteousness ही सबसे पहले हो। 3) यिर्मयाह 10:2–3 बताता है कि पथ-निर्देशन केवल ईश्वर के शब्द में है—पर-लोक के उपाय नहीं।

इन संदर्भों से समझ में आता है कि परमेश्वर अपने लोगों को अपने हाथ में रखता है और मानव-योजना के माध्यम से सुरक्षा नहीं ढूँढ़नी चाहिए।

आज के संदर्भ में प्रयोग

आज हम जब किसी योजना, तकनीकी भविष्यवाणी या आर्थिक-वृत्ति पर अत्यधिक भरोसा करते हैं, तब भी यह याद रखना चाहिए कि प्रभु ही स्थिर है। हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए—ईश्वर के प्रति विश्वास बनाए रखना, और अपने दैनिक निर्णयों में उसकी इच्छा को पहले रखना। चाहे वैश्विक परिवर्तन कितने भी आएं, हम उसकी कृपा और मार्गदर्शन पर टिके रहें।

क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके जोड़े तर्क

  • यशायाह 46:9–10 — परमेश्वर की पूर्णता और भविष्य-पूर्वकता का स्मरण; जो तेरा गढ़ है वही मेरा भी गढ़ है।
  • मत्ती 7:24–27 — यदि हम दुष्कर परिस्थितियों में भी परमेश्वर के शब्द पर टिके रहते हैं, हमारा घर दृढ़ होगा।
  • यिर्मयाह 29:11 — परमेश्वर की योजना शांति और उज्जवल आशा के लिए है; पृथक-उठाव नहीं।

संक्षेप में, यह आयत यह बताती है कि जो लोग ईश्वर के बिना अपनी रचनात्मक युक्तियों पर टिके रहते हैं, वे अंततः अस्थायी सुरक्षा पर निर्भर रह जाते हैं। पर जो प्रभु की दिशा में चलते हैं, वे स्थिरता और आशा पाते हैं।

नोट: यदि आप चाहें तो Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संकलनों से सीधे संकुचित उद्धरण जोड़े जा सकते हैं; किन्तु यहाँ प्रत्येक विचार को नया और प्रवाहपूर्ण तरीके से नेपालीन-हिंदी पाठ में समाहित किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 47:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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मैं झूठे लोगों के कहे हुए चिन्हों को व्यर्थ कर देता और भावी कहनेवालों को बावला कर देता हूँ; जो बुद्धिमानों को पीछे हटा देता और उनकी पंडिताई को मूर्खता बनाता हूँ; (अय्यू. 5:12-14, 1 कुरि. 1:20)

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यशायाह 47:15 (HINIRV) »
जिनके लिये तू परिश्रम करती आई है वे सब तेरे लिये वैसे ही होंगे, और जो तेरी युवावस्था से तेरे संग व्यापार करते आए हैं, उन में से प्रत्येक अपनी-अपनी दिशा की ओर चले जाएँगे; तेरा बचानेवाला कोई न रहेगा।

यशायाह 57:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
यशायाह 57:10 (HINIRV) »
तू अपनी यात्रा की लम्बाई के कारण थक गई, तो भी तूने न कहा कि यह व्यर्थ है; तेरा बल कुछ अधिक हो गया, इसी कारण तू नहीं थकी।

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