Old Testament
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श्रेष्ठगीत 2:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच में चराता है*।
श्रेष्ठगीत 2:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 2:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 6:3 (HINIRV) »
मैं अपने प्रेमी की हूँ और मेरा प्रेमी मेरा है, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच चराता है।

भजन संहिता 63:1 (HINIRV) »
दाऊद का भजन; जब वह यहूदा के जंगल में था। हे परमेश्वर, तू मेरा परमेश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूँढ़ूगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर*, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है।

श्रेष्ठगीत 2:16 पर टिप्पणी (HINIRV)
इस पद में प्रेम के दृढ़ बंधन और एकाग्रता की तस्वीर मिलती है। उद्धरित संवाद में प्रेमिका कहती है कि उसका प्रेमी उसका है और वह उसकी है, जो दो लोगों के बीच रोमांटिक एकता को दर्शाता है। शास्त्रीय संदर्भ में यह कल्पना प्रेम-सम्बंध को पवित्र, व्यक्तिगत और प्रतिबद्ध बनाती है, जहाँ प्रेम भगवान के स्वभाव के प्रतीक भी हो सकते हैं: विश्वास और निष्कपट समर्पण की संवेदना।
मुख्य अर्थ
हिंदी संस्करण में यह पंक्ति प्रेम के निजी लेन-देन, एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता और एक-दूसरे के जीवन में एक विशेष स्थान के भाव को प्रस्तुत करती है। यह बताती है कि प्रेमी और प्रेमिका एक-दूसरे के क्षेत्र में सुरक्षित, भरोसेमंद और केंद्रित हैं—एक दूसरे की भेड़-बकरियों की देखरेख की तरह एक साथ चलना। शास्त्रांत में यह आत्मिक प्रेम की निष्ठा को भी इंगित कर सकता है: परमेश्वर के साथ हमारे प्रेम और विश्वास की निष्ठा भी ऐसी ही गहराई और वफादारी की मांग करती है।
मुख्य थेम्स
संबंधित पद
1) वक्तव्यों में प्रेम की एकता पर बल देने वाले अन्य मुखपृष्ठ देखें: प्रेम में एकता और विश्वास की चर्चा—जहाँ पति-पत्नी और माता-पिता-की संतानों के रिश्ते में भी निष्ठा की बात उठती है। 2) यह्निष्ठा की कठोरता और भक्ति के बारे में विचार करने वाले अध्याय: यदि हम परमेश्वर के साथ अपनी निष्ठा को देखना चाहें, तो शास्त्र में प्रेम-निष्ठा के दांव-पेच मिलेंगे। 3) प्रकृति के साथ प्रेम की संवाद-शैली—पशु-चराई और फूलों के समाज से प्रेम की पवित्रता की उपमा।
नोट: इनमें से प्रत्येक संदर्भ सीधे verse Text नहीं देता, पर भाव-सम्बन्ध को समझाने में सहायक होते हैं।
व्यावहारिक विचार
आज के पाठक के लिए यह संदेश है कि प्रेम में समर्पण और साझेदारी आवश्यक है—केवल ज्वलंत आकर्षण नहीं, बल्कि एक-दूसरे की स्थिति और भूमिका को सम्मान के साथ स्वीकारना। यदि आप दंपति हैं, तो एक दूसरे की "विफा" और भरोसे को मजबूत बनाएं; यदि आप ईमानदार प्रेम की खोज में हैं, तो निष्ठा, परस्पर सम्मान और उचित सीमाओं पर विचार करें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद प्रेम की एकता, निष्ठा और जीवन के साझा मार्ग की उद्घोषणा है—जहाँ प्रेमी-प्रेमिका एक-दूसरे के लिए जिम्मेदार रहते हैं और उनके रिश्ते में प्राकृतिक और आध्यात्मिक पवित्रता एक साथ आती है।
cross-references
− दो पाठक-विचार: प्रेम की एकता के दायरे को समझाने वाले अन्य उद्धरण।
कृत विचार: इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षेप उद्धरण केवल आवश्यकता पड़ने पर उद्धृत किए जाते हैं; नीचे उपलब्ध संक्षेप उद्धरण नीचे दिए जा रहे हैं: “...exact quotation”