Old Testament
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श्रेष्ठगीत 7:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं अपनी प्रेमी की हूँ। और उसकी लालसा मेरी ओर नित बनी रहती है*।
श्रेष्ठगीत 7:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 7:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 45:11 (HINIRV) »
और राजा तेरे रूप की चाह करेगा। क्योंकि वह तो तेरा प्रभु है, तू उसे दण्डवत् कर।

श्रेष्ठगीत 6:3 (HINIRV) »
मैं अपने प्रेमी की हूँ और मेरा प्रेमी मेरा है, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच चराता है।

श्रेष्ठगीत 2:16 (HINIRV) »
मेरा प्रेमी मेरा है और मैं उसकी हूँ, वह अपनी भेड़-बकरियाँ सोसन फूलों के बीच में चराता है*।
श्रेष्ठगीत 7:10 — पाठ का तत्कालीन संदर्भ एवं सार
पात्र-परिदृश्य: श्रेष्ठगीत (Song of Songs) का यह पंक्ति प्रेम की अटूट निष्ठा और प्रेमिका-प्रेमी के बीच स्थिर आकर्षण को दर्शाती है। यह किताब दुल्हन के प्रेम, आत्म-स्वीकृति, और एक-प्यारे के प्रति पूर्ण विनय-लोक से भरे भावों की अभिव्यक्ति है; यहाँ विवाह-बंध के भीतर की गूढ़ आकर्षण को कविता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
पाठ से धार्मिक गवाही
यह पंक्ति यह संकेत देती है कि प्रेम में एक बार स्थापित होने पर, प्रेमी-प्रेमिका के बीच का संबंध स्थिर और अचल रहता है। प्रेम न केवल आकर्षण का विषय है, बल्कि एक दृढ़ और निरंतर अभिलाषा है जो एक दूसरे के निकट रहने की लालसा बनाए रखती है। इसका धार्मिक अर्थ यह भी हो सकता है कि भक्ति और विश्वास में हमारे परम पिता परमेश्वर के साथ किन्तु-पर-किन्तु प्रत्यक्ष संबंध बना रहता है; हमारा हृदय उसकी ओर निरंतर चुंबन-सा आकर्षित रहता है।
प्रमुख शब्दों और चित्रों की व्याख्या
प्रसंग-परिचय: अन्य प्रकाशन से संकेत
- पुराने प्रकाशित टिप्पणीकारों ने इसे विवाह-बंधन, विश्वास की गहराई, और परमेश्वर के साथ शाश्वत भरोसे के प्रतीक के रूप में समझाया है।
- आदम क्लार्क और अल्बर्ट बार्न्स के दृष्टिकोण में भी यह निरंतरता और स्व-नियतता के चित्र को उभारता है; प्रेम का यह स्थिर दायरा मानवीय प्रेम के साथ-साथ ईश्वर-आत्मीय सम्बन्ध की आंतरिक अनुभूति को समेटता है।
पवित्र-वचन के साथ संगति—संक्षिप्त संदर्भ
1) श्रेष्ठगीत 6:3 में भी प्रेमी-प्रेमिका के मिलन और एक-दूसरे के प्रति उत्तरदायित्व का उल्लेख मिलता है।
2) भजन 42:2-3 में आत्मा की परमेश्वर के लिए सतत लालसा का चित्रण होता है।
3) योहन्ना 14:23-24 में प्रेम और वचन-पालन का संयुक्त भाव प्रकट होता है।
वर्तमान-जीवन में अनुप्रयोग
- विश्वास करने वाले के लिए यह संदेश है कि प्रभु के साथ हमारा संबंध एक स्थिर और निरंतर मांग रखने वाला है; अपनी पहली प्रेम-गति को बनाए रखनाvakya.
- दैनिक जीवन में भक्त की निष्ठा तब मजबूत होती है जब साधारण-आदतें और साधना में निरंतरता रहती है—प्रार्थना, पवित्रीकरण, और वचन-प्रतिज्ञान को नियमित बनाए रखना।
संक्षिप्त एकीकृत विश्लेषण
यह पंक्ति एक प्रेम-चेतना का उद्घाटन करती है—स्व-स्वीकार और एक-दूसरे के लिए अचल अनुरोध। यह न केवल मानव प्रेम का गहरा चित्रण है, बल्कि परमेश्वर के प्रति विश्वास और निष्ठा की गहरी भाषा भी है: एक स्थिर दिल जो प्रभु की ओर निरंतर तल्लीन रहता है।
सूक्ष्म cross-references
- अनुमानित संदर्भ: श्रेष्ठगीत 6:3 — मिलन की गहरी अनुभूति और एक दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता। यह संकेत करता है कि प्रेम का आधार एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध बनाये रखना है।
- भजन 42:2-3 — आत्मा की परमेश्वर के लिये तड़प; गहरी लालसा, जो यहां प्रेम-प्रेमिका के बीच निरंतरता के साथ तुलना की जा सकती है।
- योहन्ना 14:23-24 — प्रेम और वचन-पालन का सन्निकर्ष; प्रेम में रहने वाला व्यक्ति वचन के अनुसार चलने का पाठ सीखाता है।
नोट: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों के अनुशासन में संक्षेप उद्धरण उपलब्ध हैं; इस संस्करण में उनके सीधे पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं, किन्तु उनके ज्ञात दृष्टिकोण को संक्षेप में समाहित किया गया है।