Old Testament
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श्रेष्ठगीत 5:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके गाल फूलों की फुलवारी और बलसान की उभरी हुई क्यारियाँ हैं। उसके होंठ सोसन फूल हैं* जिनसे पिघला हुआ गन्धरस टपकता है।
श्रेष्ठगीत 5:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 5:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 1:10 (HINIRV) »
तेरे गाल केशों के लटों के बीच क्या ही सुन्दर हैं, और तेरा कण्ठ हीरों की लड़ियों के बीच।

श्रेष्ठगीत 6:2 (HINIRV) »
मेरा प्रेमी अपनी बारी में अर्थात् बलसान की क्यारियों की ओर गया है, कि बारी में अपनी भेड़-बकरियाँ चराए और सोसन फूल बटोरे।

श्रेष्ठगीत 5:13 — पाठ का तत्कालीन संदर्भ और अर्थ
यह पद गीत-सभा के भीतर दुल्हन और दूल्हे के प्रेम-विवरण का एक भाग है, जहाँ दुल्हन अपने स्वामी के निकटता और आकर्षण का उल्लासपूर्वक वर्णन करती है। श्रेष्ठगीत 5 में दुल्हन का सपना टूटने और खो जाने के बाद उसकी प्रतिक्रिया, उसकी स्मृति और फिर उसकी खोज-यात्रा दिखती है। इस पद में गालों को फूलों की फुलवारी और क्यारियों के रूप में चित्रित कर प्रेम-शृंगार की पवित्रता और रमणीयता को उजागर किया गया है; होंठों को सोसन फूल कहा गया है, जिससे रस और सुगंध का संकेत मिलता है। यह एक परंपरागत रूप से प्रेम के अत्यंत गम्भीर और सौंदर्यपूर्ण अनुभவ को दर्शाने वाला अंश है।
पाठ से देव-विश्वास का संकेत
यह पाठ प्रेम को परम-पावन और जीवन के गहरे आकर्षण के रूप में प्रस्तुत करता है—जो केवल मानवीय आनंद नहीं, बल्कि परम-आकर्षण के प्रतीक भी है। दुल्हन के शरीर-खास हिस्सों को प्राकृतिक सुंदरताओं से जोड़ना ध्यान दे कि न सिर्फ भौतिक सुंदरता, बल्कि एक विशिष्ट संस्कार और पूर्णता का बन्धन उसे दुल्हन के रूप में प्रस्तुत करता है। साथ ही यह संकेत देता है कि प्रेम में भक्ति और आकर्षण एक साथ रहते हैं, जो एक दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण का दृश्य बनाते हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
अन्य समकक्ष पाठ (Cross-references)
- दुल्हन की सुंदरता और प्रेम-आभा पर चर्चा देखने के लिए एक--two संदर्भ: उत्पत्ति 2:23-24 में पति-पत्नी के एकात्म्व के चित्र मिलते हैं; भजन 45:1-2 में राजा के विषम और मोहक स्वरूप का गान है; यशायाह 53:2-3 में सेवक की विनम्रता और प्रतिविम्ब का दर्शन मिलता है। इन संदर्भों से प्रेम के भीतर विनम्रता, आकर्षण और पवित्रता के मिलन का पाठ स्पष्ट होता है।
बैज्ञानिक भाष्य से दूर, पवित्र साहित्य के स्वर
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायमंड टिप्पणी-प्रकाशन के अनुसार, श्रेष्ठगीत में प्रेम का चित्रण एक आध्यात्मिक परिघटना के रूप में है—जहाँ आकर्षण और प्रतिबद्धता एक-दूसरे से गहरे सम्बन्ध बनाते हैं। उनके विचारों में यह माना गया है कि यहां शरीर-चित्रण प्रेम का मूर्त रूप है; परन्तु यह भी ध्यान दिलाता है कि प्रेम का आधार नैतिक और पवित्र दायित्व है जो दुल्हन-दान और दुल्हे के बीच का सम्बन्ध गढ़ता है। (कृपया नीचे उद्धरण देखिए: दिनांकित शाब्दिक उद्धरण केवल यदि उपलब्ध हों।)
संरचना और अनुप्रयोग
आज के पाठकों के लिए यह समझना उपयोगी है कि प्रेम केवल भावनात्मक आकर्षण नहीं, बल्कि बुद्धिमत्ता, निष्ठा और सम्मान की परंपरा है। दुल्हन के गालों की फुलवारी और होंठों की मीठी सुगंध आज भी विवाह-उत्सव में भी वैसी ही पवित्रता बनाए रखने की प्रेरणा देती है। जीवन के कठिन दिनों में भी प्रेम की गर्माहट को बनाए रखना, एक दूसरे के प्रति सम्मान और चिर-निर्भरता का संदेश देता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
श्रेष्ठगीत 5:13 एक गहरी प्रेम-कहानी का हिस्सा है जो शरीर और आत्मा के मिलन को सौंदर्य-पूर्ण ढंग से चित्रित करती है। यह दिखाता है कि प्रेम केवल बाहरी आकर्षण नहीं, बल्कि भीतर की पवित्रता और समर्पण का मिश्रण है।