Old Testament
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श्रेष्ठगीत 5:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम को शपथ धराकर कहती हूँ, यदि मेरा प्रेमी तुमको मिल जाए, तो उससे कह देना कि मैं प्रेम में रोगी हूँ*।
श्रेष्ठगीत 5:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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श्रेष्ठगीत 5:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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श्रेष्ठगीत 2:7 (HINIRV) »
हे यरूशलेम की पुत्रियों, मैं तुम से चिकारियों और मैदान की हिरनियों की शपथ धराकर कहती हूँ, कि जब तक वह स्वयं न उठना चाहे, तब तक उसको न उकसाओं न जगाओ। (श्रेष्ठ. 3:5,8:4)

श्रेष्ठगीत 2:5 (HINIRV) »
मुझे किशमिश खिलाकर संभालो, सेब खिलाकर बल दो: क्योंकि मैं प्रेम में रोगी हूँ।

भजन संहिता 42:1 (HINIRV) »
प्रधान बजानेवाले के लिये कोरहवंशियों का मश्कील जैसे हिरनी नदी के जल के लिये हाँफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हाँफता हूँ।
सीधा सार: श्रेष्ठगीत 5:8 का सरल अर्थ
यह शपथ-दर-शपथ पंक्ति स्त्री को अपने प्रेमी के मिलन की उत्सुकता और कठिनाई को व्यक्त करते हुए कहती है: यदि प्रेमी मिल ही जाए, तो उसे यह संदेश दे देना कि वह प्रेम में रोगी है। यहाँ प्रेम का तीव्र आग्रह और संदेश की तात्कालिकता स्पष्ट है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
श्रेष्ठगीत के अंश प्रेम-यात्रा का गीत है, जिसे राजा सुरभित प्रेमी-युग के रूपक में प्रस्तुत किया गया है। 5:8 में नायिका अपने शहर की पुत्रियों से एक तीखी तड़प और प्रेमी की प्रतीक्षा की बात साझा करती है। यह संवाद रिश्तों की संवेदना, दूरी, और प्रेम-संवेदनाओं को दर्शाता है, जबकि प्रेम की जटिलता को दावत देता है कि प्रेमी मिलने पर उसकी स्थिति स्पष्ट के साथ बताई जाए।
मुख्य निरीक्षण
संबंधित बाइबिल संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
- ६:२-३: प्रेमिका के प्रतीक्षा-भाव और प्रेमी की उपस्थिति का संतुलन। यह दिखाता है कि प्रेम रसिक होकर भी धैर्य और बोध से भरा होता है।
- यूहन्ना 15:9-10: प्रेम का स्थायित्व और प्रेमी के साथ व्यवहार की डोहड़ता—प्रेम में रोगी होने का विचार gudaha नहीं, बल्कि निरंतर समर्पण को दर्शाता है।
- 1 कुरिन्थियों 13:7: प्रेम का धैर्य और भाल-रहना—यह बताता है कि प्रेम हर परिस्थिति में टिके रहता है।
इन संदर्भों से यह स्पष्ट होता है कि प्रेम का वास्तविक स्वरूप धैर्य, संवेदना और निर्भीक स्पष्टता को माँगता है।
टोपिकल बिंदु
अन्य उद्धरण (संरक्षित पाठ के भीतर उद्धरण)
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व्यावहारिक निष्कर्ष
संदेश-प्रेषण की यह पंक्ति प्रेम के तीव्र अनुभव को सजग बनाती है कि दूरी चाहे कैसी भी हो, प्रेमी के मिलने पर स्पष्ट और सत्यापित अभिव्यक्ति आवश्यक है। सच्चे प्रेम में धैर्य, स्पष्टता और सूक्ष्म संवेदना बराबर रहते हैं।