1 इतिहास 28:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्‍वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्‍न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जाँचता और विचार में जो कुछ उत्‍पन्‍न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझको मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझको छोड़ देगा।

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1 इतिहास 28:9 पद-दर-पद बाइबल टीका

अनुच्छेद 1 इतिहास 28:9 पर टिप्पणी (हिन्दी, HINIRV)

इस पद में दाऊद अपने पुत्र सुलैमान को परमेश्वर के साथ संबंध की वास्तविक प्रकृति और संघर्षपूर्ण आत्म-निष्ठा के बारे में सचेत कर रहा है। राजा का दायित्व स्पष्ट है: परमेश्वर की खोज, उसकी राह पर चलना, और अंततः निष्ठा का व्यवहार। जो भी कुछ अनुभव, विचार और योजना को जन्म देता है, परमेश्वर उसे देखता है; इसलिए पुत्र को खरे मन, प्रसन्न आत्मा और शुद्ध ईमानदारी के साथ सेवा जारी रखनी चाहिए।

केंद्रीय अर्थ

पद बताता है कि परमेश्वर में रहने-जीवन की रीढ़ sincerity है—अंदर की मंशा और बाहरी कर्मों का एक साथ मेल। यदि सुलैमान ईमानदारी से खोजेगा, तो परमेश्वर उसे मिलेगा; परन्तु यदि वह त्याग करेगा, तो परमेश्वर उसकी सहायता और मार्गदर्शन से दूर हो जाएगा। यह आह्वान प्रेरित करता है कि राजा अपने प्रभु से गहरे संबंध को प्राथमिकता दे और हर कदम में उसकी इच्छा को मान्यता दे।

दो-तीन प्रमुख विषय

  • ईमानदारी और कर्मठता: 'खरे मन और प्रसन्न जीव' का सार—दिल की पवित्रता और उत्साहपूर्ण सेवा।
  • खोज और सहभागिता: परमेश्वर की खोज एक सक्रिय प्रयास है; जो उसे ढूंढ़ता है, उसे मिलने की अनुभूति होती है।
  • निष्ठा का परिणाम: अगर हम परमेश्वर की राह पर रहते हैं, तो उसकी कृपा और मार्गदर्शन मिलते हैं; वरना दूरी बढ़ती है।

संदर्भित विचार (प्रासंगिक cross-references)

1) दाऊद का परामर्श और परमेश्वर के साथ संबंध की महत्ता पर बल देता है—1 इतिहास 28:9 के साथ अन्य कृत्यों में भी व्यक्ति की अंतर्निहित निष्ठা और परमेश्वर-जाने की इच्छा प्रमुख है।

2) नीति-कथनात्मक चेतावनी: परमेश्वर के साथ अनचाहे दूरी से जीवन में असंतोष आता है; यह विचार अन्य ग्रंथों में भी दोहराया गया है कि परमेश्वर के सामने दिल से आना चाहिए (उदा. कुल 3:5; मुख 16:9)।

3) प्रतिश्रुति के दायित्व: यदि हम उसकी खोज में लगें, तो ईश्वर सुलभता से दिशानिर्देश देते हैं—यह नीति-भक्ति की एक सामान्य धारा है (यशायाह 55:6-7)।

व्यावहारिक विचार

- अपनी दिनचर्या में परमेश्वर के साथ समय बिताने की योजना बनाएं—प्रार्थना, पठन, और इच्छा-जीवन की चेक-इन।

- निर्णय लेते समय दिल की सच्चाई पर विचार करें: क्या आपका उद्देश्य स्वयं की महिमा है या परमेश्वर की इच्छा?

- कठिनाइयों में भी ईश्वर के साथ विश्वास बनाए रखें; वह आपके दिल की स्थितियों को देखने में सक्षम है और मार्गदर्शित कर सकता है।

संयुक्त सारांश

1 इतिहास 28:9 सुलैमान के लिए एक पुख्ता परीक्षा-आह्वान है—दिल की निष्ठा और परमेश्वर की खोज के बीच संतुलन बनाए रखना जीवन के लिए अनिवार्य है। अगर बेटा सचमुच अपने पिता के परमेश्वर की खोज करेगा, तो वह उसे पाएगा; अन्यथा, दूरी बढ़ेगी और सहायता कमी होगी। यह संदेश आज भी हमारे लिए उतना ही सच्चा है—हार्ड-हिटिंग प्रेरणा कि हर कदम पर परमेश्वर की दृष्टि और कृपा बनाए रखना है।


मिश्रित मार्गदर्शक संकलन (संक्षेप): - Matthew Henry का दृष्टिकोण: ईमानदारी और दिल की स्थिरता परमेश्वर के साथ सौहार्द का आधार है; - Albert Barnes का संदर्भ: परमेश्वर के पास लौटना और उसका पक्ष लेना व्यक्तियों के लिए रीढ़-सा है; - Adam Clarke का स्पष्ट विवेचन: खोज का त्रयात्म अंश—दिल, विचार और कर्म—सत्यता की पुष्टिका है।

नोट: यदि उपयुक्त हो तो नीचे के उद्धरण संकलन में “हे मेरे पुत्र सुलैमान!” और “यहोवा मन को जाँचता” जैसे भावार्थों को ईमानदारी से देखते हुए, उनके मूल प्रभाव का संकेत दिया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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