Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 16:1 1 कुरिन्थियों 16:2 1 कुरिन्थियों 16:3 1 कुरिन्थियों 16:4 1 कुरिन्थियों 16:5 1 कुरिन्थियों 16:6 1 कुरिन्थियों 16:7 1 कुरिन्थियों 16:8 1 कुरिन्थियों 16:9 1 कुरिन्थियों 16:10 1 कुरिन्थियों 16:11 1 कुरिन्थियों 16:12 1 कुरिन्थियों 16:13 1 कुरिन्थियों 16:14 1 कुरिन्थियों 16:15 1 कुरिन्थियों 16:16 1 कुरिन्थियों 16:17 1 कुरिन्थियों 16:18 1 कुरिन्थियों 16:19 1 कुरिन्थियों 16:20 1 कुरिन्थियों 16:21 1 कुरिन्थियों 16:22 1 कुरिन्थियों 16:23 1 कुरिन्थियों 16:24



1 कुरिन्थियों 16:18 — Immediate Setting
पद 16:18 में पौलुस कुरिन्थियों को उन लोगों के प्रति प्रेम और सम्मान की बात करते हैं जिन्होंने उनकी सेवा और कठिनाई के समय धैर्य और सहायता दी है। यह पत्र का समापन भाग है जिसमें कुरिन्थियाँ एल्पेना के भेदभाव और विचारों के बीच एक साथ एकता बनाये रखने के लिए प्रेरित हैं। इस वाक्य से साफ़ है कि जो आत्मिक और व्यावहारिक सहायता देते हैं, वे ईश्वर के उपकार की एक दृश्यमान मिसाल बनते हैं और उनकी हार्दिकता समुदाय के लिए शांति और चैन का स्रोत बनती है।
यह पाठ परमेश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
यह पाठ दिखलाता है कि ईश्वर के लोग एक--दूसरे के बीच गहरे प्रेम और सम्मान से रहते हैं। ऐसे व्यक्ति, जिन्होंने अपनी संपत्ति और समय देकर सहायता की, वे चर्च के भीतर चैन और संतोष का कारण बनते हैं। एक दूसरे के प्रति कृतज्ञता और माफी के साथ उनका योगदान समुदाय को युगपत शांति देता है। यह संदेश यह भी संकेत करता है कि ईश्वर की कृपा से मिली सेवाएँ एक-दूसरे के साथ जुड़ती हैं और प्रेम-चक्र बनाती हैं।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
- चैन: यहाँ का ‘चैन’ मानसिक और आत्मिक स्थिरता को दर्शाता है जो विश्वासियों के बीच एक दूसरे के सहयोग से बनती है।
- उन्होंने मेरी और तुम्हारी आत्मा को चैन दिया है: यह कहते समय वे योगदान से ऊँचे नहीं दिखना चाहते, बल्कि सहयोग और भाईचारे के द्वारा आत्मिक शांति प्राप्त करने की बात बनाते हैं। यह बंधन का संकेत है—जब लोग एक दूसरे के साथ उचित सम्मान और प्रेम रखते हैं, तो चर्च एक परिवार बन जाता है।
संबद्ध अंश
कुरिन्थियों 15 में मसीह के पुनरुत्थान और जीवन की आशा के लिए प्रेरणा मिलती है; रोमियों 12:10-13 में भाइयों के प्रति प्रेम और आतिथ्य का आह्वान है; 2 कुरिन्थियों 9:7-8 में देह और सामुदायिक सहयोग का महत्व आता है। इन अंशों से स्पष्ट होता है कि विश्वास में एक दूसरे की सहायता करना परमेश्वर के मार्ग का भाग है।
20-कड़ी सार-संभावना (Cross-references) — संक्षिप्त स्पष्ट व्याख्या
आज का आवेदन
- अपने समुदाय में जो भी सहायता दे, उसे नम्रता और कृतज्ञता के साथ स्वीकार करें।
- छोटे-छोटे सेवाभाव भी चर्च के लिए बड़े स्रोत बनते हैं; अपने समय, धन और ऊर्जा को बाँटकर ईश्वर की कृपा को फैलाएं।
- एक दूसरे के प्रति आस्तिक-आचरण: सम्मान, क्षमा, और मदद—इन तीनों से समूह में शांति बनती है।
इस पाठ के साथ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों का उपयोग निम्न प्रकार मिला है: Henry कहते थे कि आत्मा को चैन देना दिखाता है कि भाईचारा सचेत और प्रेमपूर्ण है; Barnes ने इसे समुदाय की आवश्यकता के प्रति ईमानदार योगदान के रूप में देखा; Clarke ने व्यक्तिगत उपहारों की महत्ता और चर्च-समुदाय के बीच संतुलन पर बल दिया। ऊपर की व्याख्या इन विचारों के संयुक्त सार पर आधारित है: आंतरिक प्रेम और परोपकार से ही स्थिर और शांति-पूर्ण समुदाय बनते हैं।
नोट: यदि चाहें तो आप इनके विस्तृत उद्धरणों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के संकलन देख सकते हैं; यहाँ संक्षेप में उनके सामान्य सिद्धांत बताए गए हैं।