Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 4:1 1 यूहन्ना 4:2 1 यूहन्ना 4:3 1 यूहन्ना 4:4 1 यूहन्ना 4:5 1 यूहन्ना 4:6 1 यूहन्ना 4:7 1 यूहन्ना 4:8 1 यूहन्ना 4:9 1 यूहन्ना 4:10 1 यूहन्ना 4:11 1 यूहन्ना 4:12 1 यूहन्ना 4:13 1 यूहन्ना 4:14 1 यूहन्ना 4:15 1 यूहन्ना 4:16 1 यूहन्ना 4:17 1 यूहन्ना 4:18 1 यूहन्ना 4:19 1 यूहन्ना 4:20 1 यूहन्ना 4:21



1 यूहन्ना 4:19 — मुख्य संदर्भ औरार्थ
Immediate setting: यह verses 16–21 के संदर्भ में प्रेम का गहरा विवेचन है। वे कहते हैं कि प्रेम ईश्वर से है और जो प्रेम रखता है, वह ईश्वर को जानता है और ईश्वर उससे जान-पहचान रखता है। 4:19 विशेषकर हमारे संबंध को केंद्र में रखता है — हम प्रेम करते हैं क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया। यह प्रेरणा का जन्म है, न कि हमारी योग्यता का निष्कर्ष।
ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है
यह पद एक चकित करने वाला क्रम प्रस्तुत करता है: ईश्वर ने पहले प्रेम दिया, इसलिए हम प्रेम करते हैं। प्रेम के यह प्रतिफल नहीं है कि हम पहले प्रेम करें; बल्कि प्रेम का स्रोत ईश्वर है और वह उसी से आत्म-प्रकाशित होता है जो पहले दयालु रहा। निष्ठा का यही प्रवाह हमें ईमानदारी से यह सिखाता है कि प्रेम एक क्रिया है जिसमें हम भाग लेते हैं, और यह क्रिया ईश्वर की पहचान का प्रमाण बनती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
संयुक्त बाइबिल टिप्पणियाँ (संदर्भित साथ में संक्षेप)
• Matthew Henry: ईश्वर की प्रेम-प्रेरणा हमारे भीतर प्रेम पैदा करती है; प्रेम हमारा उत्तर है, न कि पूर्वाग्रह की प्रतिक्रिया।
• Albert Barnes: प्रेम का असल कारण ईश्वर स्वयं है; हमारे प्रेम में ईश्वर की प्रतिबिंब दिखती है, जो हमें सत्य में स्थिर बनाती है।
• Adam Clarke: प्रेम का स्रोत ईश्वर है और विश्वास से प्रेम का यह चक्र पूरा होता है; प्रेम का अनुभव ईश्वर के साथ गहरे संबंध का संकेत है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत और संक्षिप्त स्पष्टीकरण)
वर्तमान में इसका अनुप्रयोग
1:19-4:21 के प्रकाश में: हमारे दैनिक दृश्यों में प्रेम की क्रिया को जागृत रखना चाहिए—घर, कार्यस्थल, और समुदाय में सहयोग और करुणा के साथ। यह प्रेम, जो पहले से है, आज भी हमें नई आस्था देता है कि हम दूसरों के साथ कैसे व्यवहार करें: दया, क्षमा, और सहायता। यदि हम ईश्वर के प्रेम के उत्तर के रूप में प्रेम नहीं दिखाते, तो यह संकेत हैं कि हमारे नये जीवन में प्रेम की धारा अवरुद्ध है।
इस पाठ का उद्देश्य: यह बताता है कि प्रेम के असली पहेली का उत्तर ईश्वर के प्रेम में है, और उस प्रेम को ग्रहण कर हम दूसरों से उसी प्रेम की आहट की नकल कर सकें।