1 यूहन्ना 4:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

हम इसलिए प्रेम करते हैं, क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया।

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1 यूहन्ना 4:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 यूहन्ना 4:19 — मुख्य संदर्भ औरार्थ

Immediate setting: यह verses 16–21 के संदर्भ में प्रेम का गहरा विवेचन है। वे कहते हैं कि प्रेम ईश्वर से है और जो प्रेम रखता है, वह ईश्वर को जानता है और ईश्वर उससे जान-पहचान रखता है। 4:19 विशेषकर हमारे संबंध को केंद्र में रखता है — हम प्रेम करते हैं क्योंकि पहले उसने हम से प्रेम किया। यह प्रेरणा का जन्म है, न कि हमारी योग्यता का निष्कर्ष।

ईश्वर और विश्वास के बारे में यह पाठ क्या बताता है

यह पद एक चकित करने वाला क्रम प्रस्तुत करता है: ईश्वर ने पहले प्रेम दिया, इसलिए हम प्रेम करते हैं। प्रेम के यह प्रतिफल नहीं है कि हम पहले प्रेम करें; बल्कि प्रेम का स्रोत ईश्वर है और वह उसी से आत्म-प्रकाशित होता है जो पहले दयालु रहा। निष्ठा का यही प्रवाह हमें ईमानदारी से यह सिखाता है कि प्रेम एक क्रिया है जिसमें हम भाग लेते हैं, और यह क्रिया ईश्वर की पहचान का प्रमाण बनती है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

  • प्रेम: यहाँ प्रेम के क्रिया-रूप को दर्शाता है जो ईश्वर से लिया गया है और हमारे भीतर से उसी दिशा में बहता है। यह एक विश्वास-आधारित रिश्ता है, न कि केवल भावनात्मक अनुभूति।
  • पहले उसने प्रेम किया: यह संकेत देता है कि प्रेम की प्रेरणा और आधार ईश्वर की परिमित-रहित योजना है, जो हमें सुरक्षा और आश्वासन देता है कि प्रेम का स्रोत निरंतर जीवित है।

संयुक्त बाइबिल टिप्पणियाँ (संदर्भित साथ में संक्षेप)

• Matthew Henry: ईश्वर की प्रेम-प्रेरणा हमारे भीतर प्रेम पैदा करती है; प्रेम हमारा उत्तर है, न कि पूर्वाग्रह की प्रतिक्रिया।

• Albert Barnes: प्रेम का असल कारण ईश्वर स्वयं है; हमारे प्रेम में ईश्वर की प्रतिबिंब दिखती है, जो हमें सत्य में स्थिर बनाती है।

• Adam Clarke: प्रेम का स्रोत ईश्वर है और विश्वास से प्रेम का यह चक्र पूरा होता है; प्रेम का अनुभव ईश्वर के साथ गहरे संबंध का संकेत है।

क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत और संक्षिप्त स्पष्टीकरण)

  • यूहन्ना 3:16 — प्रेम का सुपर-न्यूट्रल स्रोत और ईश्वर के कार्य की अभिव्यक्ति।
  • रोमियों 5:8 — ईश्वर ने अधर्मियों के लिए प्रेम दिखाया, प्रेम के मूर्त प्रमाण।
  • याकूब 1:17 — प्रेम के अवतरण के पीछे कारण-पुरुष नहीं; प्रेम परमेश्वर से आता है।

वर्तमान में इसका अनुप्रयोग

1:19-4:21 के प्रकाश में: हमारे दैनिक दृश्यों में प्रेम की क्रिया को जागृत रखना चाहिए—घर, कार्यस्थल, और समुदाय में सहयोग और करुणा के साथ। यह प्रेम, जो पहले से है, आज भी हमें नई आस्था देता है कि हम दूसरों के साथ कैसे व्यवहार करें: दया, क्षमा, और सहायता। यदि हम ईश्वर के प्रेम के उत्तर के रूप में प्रेम नहीं दिखाते, तो यह संकेत हैं कि हमारे नये जीवन में प्रेम की धारा अवरुद्ध है।

इस पाठ का उद्देश्य: यह बताता है कि प्रेम के असली पहेली का उत्तर ईश्वर के प्रेम में है, और उस प्रेम को ग्रहण कर हम दूसरों से उसी प्रेम की आहट की नकल कर सकें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 4:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

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