1 यूहन्ना 4:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्‍वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्‍वर प्रेम है।

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1 यूहन्ना 4:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 यूहन्ना 4:8 — परमेश्वर प्रेम है

इस पद का immediate setting प्रेम के निवास और उसकी पहचान पर केंद्रित है। पंक्ति 4:7-8 में प्रेम को भाइयों के बीच के संबंधों में दिखने वाला व्यवहार बताया गया है; 4:8 में कहा गया कि जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। यह वह मूलक कथन है जो विश्वास और आचरण के बीच की कड़ी बनाता है।

पाठ पर प्रकाश डालना: परमेश्वर का सार—प्रेम

यह घोषणात्मक वाक्य परमेश्वर की वास्तविक प्रकृति को बताता है। प्रेम ही परमेश्वर की प्रकृति है, न कि केवल उसकी क्रिया। इसलिए प्रेमी जीवन वही है जो परमेश्वर की पहचान को ग्रहण करता है—प्रेम से जन्म लिया गया, प्रेम में निवास करने वाला। इस संदेश से विश्वासियों पर एक आह्वान है: आत्म-संयम, परस्पर ममत्व और दयालुता से दिखाने वाला जीवन।

महत्वपूर्ण शब्द और εικόνες

  • परमेश्वर प्रेम है—यह कथन प्रकृति की घोषणा है, न कि केवल प्रेम के एक गुण की। परमेश्वर की पहचान उसका शाश्वत प्रेम है, जो क्रियाओं से परिलक्षित होता है।
  • जो प्रेम नहीं रखता—परमेश्वर को नहीं जानता—यह शास्त्र-नोट देता है कि प्रेम के बिना परमेश्वर की वास्तविकता को समझना संभव नहीं है; प्रेम एक विश्वास की पुष्टि है।

संबद्ध प्रतिपादन/पुनरावलोकन

• 1 यूहन्ना 4:7–8 में प्रेम की पुनरावृत्ति; यीशु के प्रेम-उद्धार के प्रमाण को भी जोड़ा गया है।

• मत्ती 22:37–40 में प्रेम के द्वैत पहिये: परमेश्वर से प्रेम और पड़ोसी से प्रेम—एहसास का गहरा संबंध बताता है कि ईश्वर के प्रेम का अनुभव दूसरों के साथ व्यवहार में प्रकट होता है।

• यूहन्ना 13:34–35 में प्रेम के नए नियम के अनुरूप बच्चों के समुदाय की परिभाषा: प्रेम से पहचाने जाना—हमारा व्यवहार एक-दूसरे के प्रति।

हर दिन की प्रायोगिकता

जो प्रेम देखना और देना सिखाता है वह परमेश्वर के साथ परिचय है। इसका मतलब—क्रोध, ईर्ष्या या स्वार्थ के बजाय, क्षमा, करुणा और सेवा को प्राथमिकता दें। यह प्रेम ही है जो रिश्तों में यथार्थ जीवन भरता है; विश्वास बढ़ाने के लिए नित्य आचरण बना दें: छोटे-छोटे सुपुर्दगी—भाई-बहनों के लिए समय और आवश्यकताओं में सहभागिता।

उद्धृत लाइनें (उद्धरण के लिए संक्षेप)

मार्थेHenry और Barnes आदि के स्पष्ट शब्द इस दार्शनिक से जुड़ते हैं: प्रेम परमेश्वर की पहचान है; इसलिए प्रेम के बिना परमेश्वर को जानना संभव नहीं। नीचे उद्धृत शब्दवाहिका का उल्लेख यहाँ आवश्यक है: “जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता है।”

क्रॉस-रेफरेंस

• योहन्ना के विषय-वस्तु में प्रेम पर केंद्रित अनुवर्ती प्रेक्षण: 1 यूहन्ना 4:7–8; 1 योहन् 4:12—“परमेश्वर प्रेम है” के प्रभाव से बनी सार्थकता।

• मत्त 5:44–45: करुणा और दयालुता से शत्रुओं के प्रति प्रेम—परमेश्वर के प्रेम के आचरण का विस्तार।

• जेम्स 2:14–17: विश्वास के साथ प्रेम का क्रियान्वयन—काई नहीं तो विश्वास मृत है।

निष्कर्ष: आज के दिन के लिए संदेश यह है कि परमेश्वर के प्रेम को स्वीकारना और उसे अपने व्यवहार में নিখाल बनाना ही वास्तविक जीवन का प्रमाण है। प्रेम के बिना धार्मिक अभिव्यक्ति अधूरी रहती है; प्रेम में पनपते रिश्ते और सहनशीलता से ही हमारा आत्मविश्वास, समुदाय और विश्व के साथ हमारी भूमिका मजबूत होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 4:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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1 यूहन्ना 4:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 यूहन्ना 4:16 (HINIRV) »
और जो प्रेम परमेश्‍वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस पर विश्वास है। परमेश्‍वर प्रेम है; जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्‍वर में बना रहता है; और परमेश्‍वर उसमें बना रहता है।

2 कुरिन्थियों 13:11 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 कुरिन्थियों 13:11 (HINIRV) »
अतः हे भाइयों, आनन्दित रहो; सिद्ध बनते जाओ; धैर्य रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो*, और प्रेम और शान्ति का दाता परमेश्‍वर तुम्हारे साथ होगा।

भजन संहिता 86:15 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 86:15 (HINIRV) »
परन्तु प्रभु दयालु और अनुग्रहकारी परमेश्‍वर है, तू विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है।

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