Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 4:1 1 यूहन्ना 4:2 1 यूहन्ना 4:3 1 यूहन्ना 4:4 1 यूहन्ना 4:5 1 यूहन्ना 4:6 1 यूहन्ना 4:7 1 यूहन्ना 4:8 1 यूहन्ना 4:9 1 यूहन्ना 4:10 1 यूहन्ना 4:11 1 यूहन्ना 4:12 1 यूहन्ना 4:13 1 यूहन्ना 4:14 1 यूहन्ना 4:15 1 यूहन्ना 4:16 1 यूहन्ना 4:17 1 यूहन्ना 4:18 1 यूहन्ना 4:19 1 यूहन्ना 4:20 1 यूहन्ना 4:21



1 यूहन्ना 4:8 — परमेश्वर प्रेम है
इस पद का immediate setting प्रेम के निवास और उसकी पहचान पर केंद्रित है। पंक्ति 4:7-8 में प्रेम को भाइयों के बीच के संबंधों में दिखने वाला व्यवहार बताया गया है; 4:8 में कहा गया कि जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। यह वह मूलक कथन है जो विश्वास और आचरण के बीच की कड़ी बनाता है।
पाठ पर प्रकाश डालना: परमेश्वर का सार—प्रेम
यह घोषणात्मक वाक्य परमेश्वर की वास्तविक प्रकृति को बताता है। प्रेम ही परमेश्वर की प्रकृति है, न कि केवल उसकी क्रिया। इसलिए प्रेमी जीवन वही है जो परमेश्वर की पहचान को ग्रहण करता है—प्रेम से जन्म लिया गया, प्रेम में निवास करने वाला। इस संदेश से विश्वासियों पर एक आह्वान है: आत्म-संयम, परस्पर ममत्व और दयालुता से दिखाने वाला जीवन।
महत्वपूर्ण शब्द और εικόνες
संबद्ध प्रतिपादन/पुनरावलोकन
• 1 यूहन्ना 4:7–8 में प्रेम की पुनरावृत्ति; यीशु के प्रेम-उद्धार के प्रमाण को भी जोड़ा गया है।
• मत्ती 22:37–40 में प्रेम के द्वैत पहिये: परमेश्वर से प्रेम और पड़ोसी से प्रेम—एहसास का गहरा संबंध बताता है कि ईश्वर के प्रेम का अनुभव दूसरों के साथ व्यवहार में प्रकट होता है।
• यूहन्ना 13:34–35 में प्रेम के नए नियम के अनुरूप बच्चों के समुदाय की परिभाषा: प्रेम से पहचाने जाना—हमारा व्यवहार एक-दूसरे के प्रति।
हर दिन की प्रायोगिकता
जो प्रेम देखना और देना सिखाता है वह परमेश्वर के साथ परिचय है। इसका मतलब—क्रोध, ईर्ष्या या स्वार्थ के बजाय, क्षमा, करुणा और सेवा को प्राथमिकता दें। यह प्रेम ही है जो रिश्तों में यथार्थ जीवन भरता है; विश्वास बढ़ाने के लिए नित्य आचरण बना दें: छोटे-छोटे सुपुर्दगी—भाई-बहनों के लिए समय और आवश्यकताओं में सहभागिता।
उद्धृत लाइनें (उद्धरण के लिए संक्षेप)
मार्थेHenry और Barnes आदि के स्पष्ट शब्द इस दार्शनिक से जुड़ते हैं: प्रेम परमेश्वर की पहचान है; इसलिए प्रेम के बिना परमेश्वर को जानना संभव नहीं। नीचे उद्धृत शब्दवाहिका का उल्लेख यहाँ आवश्यक है: “जो प्रेम नहीं रखता वह परमेश्वर को नहीं जानता है।”
क्रॉस-रेफरेंस
• योहन्ना के विषय-वस्तु में प्रेम पर केंद्रित अनुवर्ती प्रेक्षण: 1 यूहन्ना 4:7–8; 1 योहन् 4:12—“परमेश्वर प्रेम है” के प्रभाव से बनी सार्थकता।
• मत्त 5:44–45: करुणा और दयालुता से शत्रुओं के प्रति प्रेम—परमेश्वर के प्रेम के आचरण का विस्तार।
• जेम्स 2:14–17: विश्वास के साथ प्रेम का क्रियान्वयन—काई नहीं तो विश्वास मृत है।
निष्कर्ष: आज के दिन के लिए संदेश यह है कि परमेश्वर के प्रेम को स्वीकारना और उसे अपने व्यवहार में নিখाल बनाना ही वास्तविक जीवन का प्रमाण है। प्रेम के बिना धार्मिक अभिव्यक्ति अधूरी रहती है; प्रेम में पनपते रिश्ते और सहनशीलता से ही हमारा आत्मविश्वास, समुदाय और विश्व के साथ हमारी भूमिका मजबूत होती है।