Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः हे भाइयों, आनन्दित रहो; सिद्ध बनते जाओ; धैर्य रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो*, और प्रेम और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हारे साथ होगा।
2 कुरिन्थियों 13:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 कुरिन्थियों 13:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 कुरिन्थियों 1:10 (HINIRV) »
हे भाइयों, मैं तुम से यीशु मसीह जो हमारा प्रभु है उसके नाम के द्वारा विनती करता हूँ, कि तुम सब एक ही बात कहो और तुम में फूट न हो, परन्तु एक ही मन और एक ही मत होकर मिले रहो।

रोमियों 12:16 (HINIRV) »
आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। (नीति. 3:7, यशा. 5:21)

इब्रानियों 12:14 (HINIRV) »
सबसे मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा*। (1 पत. 3:11, भज. 34:14)
मुख्य interpretive बिंदु
2 कुरिन्थियों 13:11 में लेखक प्रेरित पवित्र आत्मा के द्वारा विश्वासियों से आह्वान करता है कि वे आनन्दित रहें, पूर्ण उन्नति और एकता की दिशा में आगे बढ़ें, धैर्य बनाये रखें, एक ही मन से रहें, मेल बनाए रखें, और परमेश्वर जो प्रेम और शान्ति का दाता है, उनके साथ हों। यह संदेश आत्मिक पुनर्निर्माण और समुदाय की स्थिरता पर केन्द्रित है; कठिनाइयों के बीच में भी ईश्वर कीियात और भाईचारा बनाये रखने की प्रेरणा देता है।
साहित्यिक संदर्भ ( Literary Context )
पहली-तीसरी कुरिन्थियों के बीच चर्च में आंतरिक कलह, विभाजन और असंतोष के समाचार मिलते हैं। इस प्रसंग में पौलुस ने आत्मिक रीति-रिवाज, प्रेम, और एकता के मूल्य पर बल दिया है। यहाँ “आनन्दित रहो” और “एक ही मन रखो” जैसे सूत्र चर्च के भीतर समन्वय और सहयोग की महत्त्वपूर्ण कोर से जुड़े हैं।
Theological significance ( Theology )
आनन्द, ईश्वर की कृपा और उद्धार की आशा के साथ जुड़ा है; सिद्ध बनना और धैर्य एक विश्वास के विकसित होने की निरंतर प्रक्रिया है—यह केवल बाह्य अनुशासन नहीं, बल्कि दिल का परिवर्तन है। “मेल से रहो” वाक्य स्थानीय मतभेदों को नहीं, बल्कि प्रेमपूर्ण सह-अस्तित्व और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। परमेश्वर का साथ पुराने नियम-नुस्खों के अनुरूप प्रेम और शान्ति में आता है; यह विश्वासयोग्यता का परिणाम है कि भक्त एक दूसरे के साथ मिलकर चलें।
Cross-references (संदर्भ) और उनका संक्षिप्त अर्थ
आत्म-चिन्तन के प्रश्न (Reflection questions)
विश्लेषण — संक्षिप्त निष्कर्ष
इस पद में प्रेरित लेखक विश्वासियों को एकीकृत जीवन के लिए निर्देश देता है: आनन्दित रहें, प्रगति करें, धैर्य बनाये रखें, एक ही मन रखें, प्रेम-शान्ति के वातावरण को बनाए रखें। यह सब परमेश्वर के साथ निकट संबंध और उसके प्रेम-शक्ति द्वारा संभव होता है। केंद्रीय संदेश है—आत्मिक सफलता समाज की मजबूती में है; जब चर्च एकता और प्रेम से जुड़े रहते हैं, तब परमेश्वर उनका साथी बनकर उनके मार्ग को उजागर करता है।
पुलकिश उद्धरण (नोट): यदि आवश्यक हो, तो नीचे दिये गए पूर्व-प्रचलित टिप्पणियों से छोटे उद्धरण उद्धृत किये जा सकते हैं: • “The grace of God makes us steadfast, and the love of Christ binds us in one.” (Matthew Henry, सार-सार) • “Love is the bond of perfection; where there is contention, there is a departure from peace.” (Albert Barnes, सार-परिशिष्ट) • “Where there is envy, there is weakness; where there is unity, there is strength.” (Adam Clarke, सार-प्रस्तावना)