Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह निर्बलता के कारण क्रूस पर चढ़ाया तो गया, फिर भी परमेश्वर की सामर्थ्य से जीवित है, हम भी तो उसमें निर्बल हैं; परन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएँगे।
2 कुरिन्थियों 13:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 कुरिन्थियों 13:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 3:18 (HINIRV) »
इसलिए कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो मारा गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।

रोमियों 6:4 (HINIRV) »
इसलिए उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नये जीवन के अनुसार चाल चलें।

2 कुरिन्थियों 10:3 (HINIRV) »
क्योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तो भी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते।
मुख्य बिंदु: निर्बलता के बीच भी विश्वास की पूर्णता
2 कुरिन्थियों 13:4 में कहा गया है कि मसीह निर्बलता में क्रूस पर चढ़ाए गए, पर परमेश्वर की सामर्थ्य से वे जीवित हैं; उसी में हम भी निर्बल हैं, पर परमेश्वर की शक्ति के साथ जीवित हैं। यह वाक्य हमारे लिए क्रूस के समक्ष आत्म-तोड़फोड़ और ईश्वरीय सामर्थ्य के बीच संतुलन की दिशा खोलता है: हमारी कमजोरियाँ रहते हुए भी परमेश्वर हमारे साथ है और उसकी शक्ति हमारे कार्यों को समर्थ बनाती है।
साहित्यिक संदर्भ: पाठ की संधि और प्रवाह
पद का स्थान पॉल के दूसरे खत చేప कुरिन्थियों के भीतर है, जहाँ वे क्रूस के विचारों के जरिए मसीही जीवन के वास्तविक स्वरूप को समझाते हैं—क्योंकि मसीह समानता के साथ निर्बल नहीं, बल्कि दुनिया के मानकों के अनुसार चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में भी जी उठा। यह निर्भरता का संदेश है: मसीह ने जीवित रहने के लिए अपनी मृत्यु को स्वीकार किया ताकि हमारी कमजोरी में भी ईश्वर की शक्ति प्रकाशमान हो।
थियोलॉजी और जीवन-आधार
यह वाक्य बताता है कि ईश्वरीय शक्तिशाली जीवन निर्बल परिस्थितियों को भी पार कर सकता है। मसीह की मृत्यु की कमजोरी और उसकी पुनर्जीविता की शक्ति का संयोजन हमें प्रेरित करता है कि हम भी जहाँ भी हों, सत्य और नम्रता के साथ जीवन बिताएं, क्योंकि ईश्वर वही माध्यम है जो हमारी कठिनाइयों को भी उद्धार के अवसर में बदल सकता है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके अर्थगत सम्बन्ध
चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पंक्ति एक संतुलन का पाठ है: हमारी निर्बलता में भी ईश्वर की शक्ति सक्रिय रहती है। क्रूस के लिए चढ़े मसीह का जीवन मानव-निर्भरता और भरोसे के रूप में सामने आता है—कि हम भी उसकी सामर्थ्य से, निर्भर रहते हुए, जीएँ।
पुस्तक-पार संकल्पना
हिनिर्व अनुवाद में यह भाव स्पष्ट है कि कैसे निर्बलता क्रूस के साथ जुड़कर परमेश्वर की महान शक्ति को दर्शाती है।
सीधे उद्धरण (केवल संक्षिप्त, अगर उपलब्ध)
मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क के ठीक-ठाक पंक्तियों से पूर्व-उद्धरण उपलब्ध होने पर केवल उसी स्थान को उद्धृत किया जाएगा:
यदि उपलब्ध हों: “क्रूस पर चढ़ाया गया, पर परमेश्वर की सामर्थ्य से जीवित है” जैसा सारांश, बिना पाठ का पूर्ण टेक्स्ट दोहराए उद्धृत किया जा सकता है।