Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सब पवित्र लोग तुम्हें नमस्कार कहते हैं।
2 कुरिन्थियों 13:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 कुरिन्थियों 13:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 16:16 (HINIRV) »
आपस में पवित्र चुम्बन से नमस्कार करो: तुम को मसीह की सारी कलीसियाओं की ओर से नमस्कार।

रोमियों 16:21 (HINIRV) »
तीमुथियुस मेरे सहकर्मी का, और लूकियुस और यासोन और सोसिपत्रुस मेरे कुटुम्बियों का, तुम को नमस्कार।

फिलिप्पियों 4:21 (HINIRV) »
हर एक पवित्र जन को जो यीशु मसीह में हैं नमस्कार कहो। जो भाई मेरे साथ हैं तुम्हें नमस्कार कहते हैं।
सीधे अर्थ की अभिव्यक्ति
2 कुरिन्थियों 13:13 में पवित्र लोग एक-दूसरे को शुभाशीष देते हैं—यानी क्षेत्र-सम्बन्ध के भीतर विश्वासियों के बीच प्रेम-मूलक नमस्कार और fellowship की आत्मा का प्रकटन। यह वाक्यावरण, जो फरिश्तों के नमस्कार जैसा नहीं बल्कि समुदाय के भीतर पवित्रता और भाईचारे की अनुभूति है, वह विश्वसनीय भाइयों-बहनों के आध्यात्मिक सम्बद्धता का संकेत देता है।
पृष्ठभूमि और संचार का ढांचा
यह सन्देश क्रमशः 2 कुरिन्थियों में है—पौल प्रभु की प्रेरणा से कुरिन्थ की चर्चावालों के बीच उनके अनुरोध के साथ। पत्र के अंत में यह त्रिविध नमस्कार एक tandam बनाते हैं: पवित्रता की एकता, प्रेम का गहरा सम्बन्ध, और विश्वासियों के बीच स्थिरता की अपेक्षा। यह नमस्कार परमेश्वर के शांति-यज्ञ और भाईचारे के सामाजिक-आचार का प्रतीक है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
सम्बद्ध आयतें और संक्षिप्त व्याख्या
यथार्थ संदर्भ 1: अन्य प्रेरित-पत्रों में भाइयों के बीच प्रेरितिक प्रेम का आशीर्वाद मिलता है; यह समुदाय की सुरक्षा और दृढ़ विश्वास के लिए आवश्यक है।
यथार्थ संदर्भ 2: पवित्रता और प्रेम से बना आपसी व्यवहार चर्च की स्थिरता बनाता है, जो कठिन दौरों में भी एकता बनाए रखता है।
यथार्थ संदर्भ 3: नमस्कार के परिप्रेक्ष्य में यह दर्शाता है कि साधारण-सा व्यवहार भी आत्मिक लाभ देता है, क्योंकि यह विश्वासियों के बीच आशीर्वाद बनकर फैलता है।
पूर्वानुमानित पाठ-व्याख्यान से उद्धरण (संक्षेप)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के जनता-डायरेखित टिप्पणियों से निकले संकेत यह बताते हैं कि पवित्र लोगों का नमस्कार एक गूंथे प्रेम का व्यवहार है जो चर्च की अंतःस्थ पवित्रता को व्यक्त करता है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (संक्षेप):
“The communion of the saints”—यह भाव पवित्र लोगों के बीच एकता और आध्यात्मिक सहभागिता का परिचय देता है।
उद्धृत पंक्तियाँ यदि उपलब्ध हों, वे स्पष्ट रूप से वास्तविक पाठ से नहीं लिए जाते; परंतु इन टिप्पणीकारों के विचारों में नमस्कार को समुदायिक शांति और एकता का प्रतीक माना गया है।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके छोटे व्याख्यान
1) रोम 12:10 — प्रेम में एक दूसरे के प्रति स्नेह और सम्मान का आग्रह। यह नमस्कार के पीछे की आत्मा की पुष्टि करता है।
2) एफिसियों 4:32 — ममता भरे व्यवहार और एक दूसरे पर दया रखने की शिक्षा; नमस्कार भी इसी परंपरा का सामाजिक प्रदर्शन है।
3) 1 योह 4:11 — भाइयों के मध्य प्रेम हमें कैसे दिखना चाहिए; यह नमस्कार इस प्रेम का व्यवहारिक स्वरूप है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
चर्च की वास्तविक शक्ति विश्वास-तत्व में है जब पवित्र लोग एक दूसरे को सम्मान और प्रेम के साथ नमस्कार करें। यह साधारण-सा आचरण चर्च के भीतर एकता और शांति बनाए रखता है, भले ही बाहरी परिस्थितियाँ कैसी भी हों।