Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब हम निर्बल हैं, और तुम बलवन्त हो, तो हम आनन्दित होते हैं, और यह प्रार्थना भी करते हैं, कि तुम सिद्ध हो जाओ।
2 कुरिन्थियों 13:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 कुरिन्थियों 13:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 13:11 (HINIRV) »
अतः हे भाइयों, आनन्दित रहो; सिद्ध बनते जाओ; धैर्य रखो; एक ही मन रखो; मेल से रहो*, और प्रेम और शान्ति का दाता परमेश्वर तुम्हारे साथ होगा।

1 कुरिन्थियों 4:10 (HINIRV) »
हम मसीह के लिये मूर्ख है*; परन्तु तुम मसीह में बुद्धिमान हो; हम निर्बल हैं परन्तु तुम बलवान हो। तुम आदर पाते हो, परन्तु हम निरादर होते हैं।

1 थिस्सलुनीकियों 3:10 (HINIRV) »
हम रात दिन बहुत ही प्रार्थना करते रहते हैं, कि तुम्हारा मुँह देखें, और तुम्हारे विश्वास की घटी पूरी करें।
2 कुरिन्थियों 13:9 का परिचय
इस पद में प्रेरित पॉल मसीही विश्वासियों के बीच की आध्यात्मिक वास्तविकताओं को उजागर करते हैं। जब हमारा अनुभव कमजोर हो, तब परमेश्वर ही हमें बल देता है। इस क्रम में प्रभु के गुण और पवित्रता की मांग ऊपर उठती है—ताकि लोग नहीं, बल्कि परमेश्वर की सत्ता से सिद्ध हों।
वचन का पाठ और दृश्य
“जब हम निर्बल हैं, और तुम बलवन्त हो, तो हम आनन्दित होते हैं, और यह प्रार्थना भी करते हैं, कि तुम सिद्ध हो जाओ।”
पठनीय पाठ के पीछे का तात्पर्य
कचहरी-सी संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से जूझते समूह के भीतर पॉल यह बताते हैं कि उनका वास्तविक उद्देश्य यह है कि मसीही समुदाय में आत्म-नियमन, नैतिक परिपक्वता और परमेश्वर की महिमा उजागर हो। निर्बल स्थितियों में भी उनका आनंद न तो आत्म-छलना है और न ही सांसारिक लाभों की इच्छा; यह आनंद मात्र इसलिए है क्योंकि परमेश्वर की योजनाओं का फल सामने आ रहा है—यानी समुदाय का “सिद्ध” बनना।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस verses का मुख्य पाठ यह है: परमेश्वर उसी स्थिति में भी औचित्य दिखाते हैं, जब हम कमज़ोर हों; ताकि हमारी निर्बलता उनके सामर्थ्य का प्रदर्शन करे। पॉल के अनुसार, प्रभु की चंचल शक्ति नहीं, बल्कि उसकी नम्रता और पवित्र जीवन दिखना चाहिए। इसलिए उनके लिए आनंद है कि विश्वासियों की उन्नति और परिपक्वता स्पष्ट हो।
अन्य बाइबिल पाठों से तुलनात्मक दृष्टि
इन पाठों से एकीकृत शिक्षा निकलती है: आपत्ति और दुर्बलता के बीच भी परमेश्वर की कृपा आगे बढ़ती है; इससे समूह और व्यक्तित्व दोनों मजबूत होते हैं, जब हम मसीह की पहचान और उसकी पवित्रता पर टिके रहते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंसेज के साथ संक्षिप्त संयोजन
1) रोम. 12:3–8: हर एक को उसकी दायित्व-क्षमता अनुसार दिया गया सेवाकार्य; कमजोरियाँ भी परिपक्वता का मार्ग बनती हैं।
2) 2 Thess. 1:3–4: विश्वासियों की धैर्य और चरित्र की वृद्धि का उल्लेख है, जो मुश्किल समय में सिद्ध होता है।
3) इब्र 10:35–39: दृढ़ विश्वास के साथ धैर्य और स्थिरता की प्रगटता बताता है कि क्यों सिद्धता आवश्यक है।
पूर्वलोकोक्तियों का संक्षेप निष्कर्ष
पॉल की बात साफ है: निर्बलता में भी परमेश्वर की महिमा प्रकट होती है; हमारी सफलता नहीं, बल्कि हमारी सदा-सधी प्रार्थना और आस्थावान जीवन सिद्ध बनाता है। यह संदेश आज भी विश्वासियों के लिए मार्गदर्शक है—ताकि हम स्वयं को और अपन विश्वासियों को परमेश्वर के काम के लिए तैयार रखें।
संक्षिप्त सार
जब हम कमजोर हों, तब भी प्रभु की शक्तियाँ हमारे साथ हैं; और हमारा उद्देश्य है कि हमारा जीवन और समुदाय अभी dennoch में सिद्ध होकर दिखे।
कमेंटरी स्रोतों में से एक्शन संक्षेप, ब्रितानी-युग के पवित्र-वचन व्याख्याकार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के उल्लेखित विचारों से मिलते-जुलते निष्कर्ष संगृहीत हैं।