Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी2 कुरिन्थियों 13:5 बाइबल पद की व्याख्या
2 कुरिन्थियों 13:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अपने आप को परखो, कि विश्वास में हो कि नहीं; अपने आप को जाँचो*, क्या तुम अपने विषय में यह नहीं जानते, कि यीशु मसीह तुम में है? नहीं तो तुम निकम्मे निकले हो।
2 कुरिन्थियों 13:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 कुरिन्थियों 13:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 कुरिन्थियों 11:28 (HINIRV) »
इसलिए मनुष्य अपने आप को जाँच ले और इसी रीति से इस रोटी में से खाए, और इस कटोरे में से पीए।

1 कुरिन्थियों 9:27 (HINIRV) »
परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूँ; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूँ।

2 कुरिन्थियों 13:5 — स्वयं-अभ्यास और सत्यापन
पापाुस इस पत्र के पाठ के बीच बार-बार आत्म-परख की मांग उठाते हैं—खासकर जब उनका उद्देश्य यह है कि क्रिस्तीय विश्वास वास्तविक है या नहीं। संदर्भ में, कुरिन्थ के नवजात और भ्रमितiap समूह के बीच भ्रम और आत्म-धर्म-धारणाओं को छाँटने के लिए पवित्र आत्मा और प्रभु यीशु मसीह के साथ जीवन के परीक्षण को रेखांकित किया गया है। वह कहते हैं कि चर्च में आने वाले लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके भीतर सच में यीशु मसीह का निवास है या नहीं; अन्यथा उनका धार्मिक प्रदर्शन अस्थिर और निकम्मा हो सकता है. इस सन्देश का मूल उद्देश्य आत्म-निगरानी को जीवन का क्रम बनाना है, प्रेरित जीवन-चर्या का परीक्षण करना है.
मुख्य विचार
कुंजी विषय
1) आध्यात्मिक जीवन की जाँच: अपने मन, विश्वास और अनुभव को क्रिस्त-जीवन के अनुरूप सच-मंच पर रखना।
2) क्रिस्त-आवास की कसौटी: यीशु मसीह सचेतन रूप से आपके भीतर रहते हैं, तब ही कर्म-कल्पना और परिणाम मिलते हैं।
3) प्रेरणा बनाम ध्वनि-धर्म: बाहरी धर्म-व्यवहार से अधिक आंतरिक परिवर्तन की तपस्या आवश्यक है।
अनुशंसा-पाठ/अन्य सन्दर्भ
• गवाह बनाम आत्म-तसल्त: 1 कुरिन्थियों 2:15; 2 कुरिन्थियों 3:18—निरंतर परिवर्तन का परिणाम मानव-बल से नहीं, पर मसीह के अभिमुख रहने से होता है।
• विश्वास की जाँच: 2 कुरिन्थियों 5:7—हम विश्वास से चलते हैं, न कि देखने से।
वास्तविक अनुप्रयोग
• व्यक्तिगत परीक्षण के लिए कदम: अपने जीवन के क्षेत्र—पाठ, प्रार्थना, नैतिक निर्णय और सम्बन्ध—को क्रिस्त-केंद्रित निर्धारित मानदंडों से मिलान करें।
• समुदाय के साथ विवेचन: अपने विश्वास-यात्रा को विश्वस्त साथी या अंध-विश्वास के बजाय उजागर करें, ताकि आत्म-छोड़ और पवित्रता में वृद्धि हो।
संक्षिप्त समापन
यह वचन हमें अद्वितीय रूप से गाइड करता है: जो विश्वास में वृद्धि चाहता है, वह स्वयं की जाँच करे और देखे कि क्या यीशु मसीह वास्तव में उसके भीतर निवास करते हैं। अगर नहीं, तो स्व-धोरण सुधार आवश्यक है ताकि हमारा जीवन क्रिस्त-जीवन के अनुरूप बदले और परिणामस्वरूप प्रभु की महिमा दिखे।
Cross-references with brief notes
• याकूब 2:26 — कर्म बिना विश्वास का शरीर नहीं होता; क्रिस्ट के भीतर रहने से चरित्र बनता है।
• रोमियों 12:2 — नये मानक के अनुसार नयी सोच और व्यवहार का परिवर्तन जीवन-परिवर्तन का आवश्यक हिस्सा है।
• गला 5:22-23 — पवित्र आत्मा के प्रभाव से फल-प्रकाशन स्पष्ट होते हैं; यह दर्शाता है कि भीतर की सत्ता कैसी दिखती है।
कहानी/चिन्तन: यह वाक्य हमें याद दिलाता है कि ईश्वर के प्रति हमारी निष्ठा केवल शब्दों से नहीं, बल्कि आचरण, प्रेम और परिवर्तन से जानी जाती है।
ऋद्धिमान उद्धरण (यदि उपलब्ध): कुछ पुराने टिप्पणीकारों के शब्दों में भाव यह रहा है कि “विश्वास में रखकर जाँचना आवश्यक है; क्योंकि बाहरी रूप-रंग के स्थान पर अंतरमन का परिवर्तन ही प्रवेश-पथ है।”