Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इस कारण मैं तुम्हारे पीठ पीछे ये बातें लिखता हूँ, कि उपस्थित होकर मुझे उस अधिकार के अनुसार जिसे प्रभु ने बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये मुझे दिया है, कड़ाई से कुछ करना न पड़े।
2 कुरिन्थियों 13:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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2 कुरिन्थियों 13:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 कुरिन्थियों 10:8 (HINIRV) »
क्योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्ड दिखाऊँ, जो प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्जित न हूँगा।

2 कुरिन्थियों 2:3 (HINIRV) »
और मैंने यही बात तुम्हें इसलिए लिखी, कि कहीं ऐसा न हो, कि मेरे आने पर जिनसे मुझे आनन्द मिलना चाहिए, मैं उनसे उदास होऊँ; क्योंकि मुझे तुम सब पर इस बात का भरोसा है, कि जो मेरा आनन्द है, वही तुम सब का भी है।

तीतुस 1:13 (HINIRV) »
यह गवाही सच है, इसलिए उन्हें कड़ाई से चेतावनी दिया कर, कि वे विश्वास में पक्के हो जाएँ।
2 कुरिन्थियों 13:10 — संपूर्ण पाठ के संदर्भ में व्याख्या
पाइकलुस नेन की यह पंक्ति उन कठिन परिस्थितियों के बीच दी गई है जब पौलुस कुरिन्थ के सदस्यत्व और चर्च की व्यवस्था में अनुशासन के मुद्दों को संभाल रहे थे। वह उन लोगों को स्पष्ट संकेत देते हैं कि वे उनके सामने सीधे आ कर उन मामलों से निपटेंगे, परन्तु अभी तक बाहर आकर कठोर उपायों से बचना चाहते हैं ताकि समुदाय में कटुता न उत्पन्न हो। इस संदर्भ में पौलुस अपने अधिकारों को बताकर समुदाय के interoperability और सुधार की योजना सरल बनाते हैं: वह अपने परमेश्वर के दिए हुए अधिकार का सही उपयोग कर सुधार करना चाहते हैं, न कि दण्ड से काम लेने के लिए।
मुख्य विचार
इस पद का केंद्रीय अभिप्राय यह है कि मसीह-विश्वासियों के बीच स्वस्थ अनुशासन और आत्म-नियमन का अभ्यास किया जाए, ताकि चर्च की एकता और धार्मिक प्रगति बनी रहे। पौलुस यह स्पष्ट कर रहे हैं कि उनका उद्देश्य न तो व्यक्तिगत प्रभुत्व जंचाना है और न दमन करना, बल्कि अपराधों के समाधान हेतु प्रभु ने जिन्हें अधिकार दिया है, उनका सही-उचित प्रयोग करके संघ के हित में क्रिया करना है।
तीन प्रमुख विषय
Related cross-references (संक्षेप स्पष्टीकरण)
- गालातियों 6:1: भ्रस्ट कर्म के बारे में प्रेमपूर्ण पुनःस्थापना और आत्म-नियमन की भूमिका।
- हलवायो 12:11: पिता के सुधार का लाभ और इसे सहन करने की आवश्यकता।
- इब्रानियों 12:6: प्रभु के प्रेम और सुधार का मेल—जो अनुशासन से जुदा नहीं है, वह पुत्र नहीं है।
व्यवहारिक विचार
पंक्ति यह सीख देती है कि चर्च के नेताओं को भी अपने अधिकारों को प्रेमपूर्ण पथ पर चलाते हुए, शिष्य-समुदाय के कल्याण के लिए उपयोग करना चाहिए। यदि सुधार आवश्यक हो, तो उसे कठोरता से नहीं बल्कि शांति, स्पष्टता और सत्य कीimhय के साथ लागू करें। विश्वासियों को भी समझना चाहिए कि अनुशासन एक सुरक्षा-यंत्र है, जो गलतियों को रोकता है और ईश्वर के प्रचलन के अनुसार जीवन बिताने में सहायता करता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य प्रभु के दिए हुए अधिकार के उद्देश्य को याद दिलाता है: न कि दबाव डालना, बल्कि निर्माण, सुधार और सामंजस्य के लिए काम करना।Church के भीतर सही अनुशासन से प्रेम-प्रधान वातावरण बनता है, जो प्रत्येक सदस्य के विश्वास को मजबूत बनाता है।