Old Testament
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2 कुरिन्थियों 13:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम तो इसका प्रमाण चाहते हो, कि मसीह मुझ में बोलता है, जो तुम्हारे लिये निर्बल नहीं; परन्तु तुम में सामर्थी है।
2 कुरिन्थियों 13:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
2 कुरिन्थियों 13:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मत्ती 10:20 (HINIRV) »
क्योंकि बोलनेवाले तुम नहीं हो परन्तु तुम्हारे पिता का आत्मा तुम्हारे द्वारा बोलेगा।

2 कुरिन्थियों 10:8 (HINIRV) »
क्योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्ड दिखाऊँ, जो प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्जित न हूँगा।

लूका 21:15 (HINIRV) »
क्योंकि मैं तुम्हें ऐसा बोल और बुद्धि दूँगा, कि तुम्हारे सब विरोधी सामना या खण्डन न कर सकेंगे।
2 कुरिन्थियों 13:3 के सामने का संदर्भ और संदेश
यह पद उन घटनाओं के क्रम में आता है जहाँ पौलुस ने कुरिन्थ के ईसाइयों से अपनी विश्वसनीयता और प्रेरितत्व की पुष्टि माँगी है। गिरी हुई मानव कमजोरियों के बीच, पौलुस यह दिखाते हैं कि परमेश्वर की शक्ति अपने दूत-प्रेषकों में मानी जाती है और विश्वासियों के लिए अपना प्रमाण प्रस्तुत करती है।
प्यादा पाठ में परमेश्वर का संकेत और विश्वास की गहराई
इस वाक्य में पौलुस स्पष्ट करते हैं कि जो मसीह उनके भीतर बोलता है, वह निर्बल नहीं है बल्कि सामर्थी है। इसका अर्थ है कि प्रभु यीशु का जीवन और चयनित सेवक बनना मानवीय कमजोरियों के बावजूद परमेश्वर की पूर्ण सत्ता को प्रमाणित करता है। विश्वासी की दृष्टि में यह एक आश्वस्ति है कि परमेश्वर अपनी शक्ति को निर्बलों के माध्यम से भी प्रकट करते हैं।
शब्दों के अर्थ और रूपक
- प्रमाण: यहाँ प्रमाण एक आशीर्वाद है जो बाहरी शक या आलोचना के बजाय आंतरिक परिवर्तन और प्रेरितत्व की अनुभूति से आता है।
- निर्बल/सामर्थी: यह भाषा दिखाती है कि परमेश्वर की शक्ति और पूर्णत्व मानवीय मजबूरियों के ऊपर है; कमजोरियाँ जब परमेश्वर के काम के लिए संबोधित होती हैं, तब वे भी शक्तिशाली बन जाती हैं।
संबद्ध पवित्रगण
यह विचार अन्य जगहों से संगत है कि परमेश्वर जो कुछ भी कहता है, वह शक्ति के साथ सत्य होता है (जैसे पुराने व नए नियम में भरोसेमंद दाऊदीय और प्रेरित-कार्य की बयानी)। साथ ही, मसीह की सत्ता और प्रेरितों की अनुभवशीलता एक साथ चलते हैं—जो उनके दुरुपयोग से नहीं, बल्कि परमेश्वर के स्वामित्व से दिखता है।
संक्षिप्त क्रॉस-रेफरेंस
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि निर्बलता में भी परमेश्वर की सामर्थ्य प्रकट होती है, जिससे विश्वासियों को आत्म-विश्वास मिलता है कि प्रभु उनके साथ है।
आज के लिए उपयोगी अनुप्रयोग
- अपनी कमजोरी स्वीकार करें: परमेश्वर जब हमारी कमज़ोरियों के बीच आता है, तब वह अपनी शक्ति दिखाता है।
- विश्वास की पुष्टि: कठिन समय में भी आप देखेंगे कि प्रभु आपकी स्थिति में परिवर्तन लाने के लिए शक्तिशाली है।
- दूसरों के लिए उदाहरण बनें: आपकी संतुष्टि नहीं, बल्कि परमेश्वर की capacitating शक्ति दूसरों को प्रेरित करे।
संयुक्त निष्कर्ष
यह पाठ एक अभिवादन है कि मसीह हमारे भीतर है—और वही हमारी कमजोरी के बीच भी सामर्थी है। सही विश्वास वही है जो स्थिति-विशेष में Christ की प्रभुता को मानता है, न कि केवल बाहरी दिखावे को।
नोट: नीचे बताए गए प्रसिद्ध टिप्पणीकारों के संक्षेप उनकी सटीक श्लेष नहीं हैं, पर उनके विचारों का सार इस दृश्य में सम्यक रूप से समाहित किया गया है:
Matthew Henry: मसीह का अस्तित्व भक्तों में कार्य करता है और वह हमारी कमी की जगह शक्ति बनकर प्रवेश करता है।
Albert Barnes: प्रेरितत्व का प्रमाण उसी में है कि परमेश्वर की सामर्थी, निर्बलता के भीतर भी उजागर होती है।
Adam Clarke: निर्बलता को भी परमेश्वर की उच्चता के लिए साधन बनाकर दिखाया गया है; यह विश्वास को दृढ़ बनाता है।