1 यूहन्ना 4:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उससे हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्‍वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

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1 यूहन्ना 4:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

सीधे अर्थ का स्पष्ट सार

1 यूहन्ना 4:21 का अर्थ है: परमेश्वर से प्रेम रखते हुए हमने अपने भाइयों से भी प्रेम करना चाहिए। प्रेम का यह दोहरा आचरण- परमेश्वर के साथ और एक-दूसरे के साथ- आत्मीयता और व्यवहार में एकता का प्रमाण है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह आयत 1 यूहन्ना के भीतर दूसरों के प्रति प्रेम के सिद्धांतों को दोहराती है। लेखक ने पहले परमेश्वर के प्रेम को हमारे भीतर डालने के कारण प्रेम के व्यवहारिक परिणामों की चर्चा की है—परमेश्वर के प्रेम का वास्तविक परीक्षण हमारे भाई-बंधुओं के साथ प्रेम में दिखता है। यह ईसाई समुदाय के भीतर अस्थिरताओं, भय, और समाजिक विरोध के बीच प्रेम की ऊष्मा बनाये रखने का संदेश है।

व्याख्या के अवलोकन

  • स्रोत- प्रेम का बुनियादी स्रोत परमेश्वर है; हमारा प्रेम उसी से प्रेरित होकर है, न कि केवल आत्म-लाभ या सामाजिक दबाव से।
  • द्वितीय प्रेम-आज्ञा- प्रेम परमेश्वर के साथ और पड़ोसियों के साथ एक ही धुरी पर टिकता है।
  • भाई-बंधुओं से प्रेम का वास्तविक परीक्षण व्यवहार में है—आशावादी न होकर, प्रेमपूर्ण, सहनशील और निष्कपट तरीके से अन्य की भलाई चाहना।

मुख्य विचार

  1. परमेश्वर-प्रेम से दूसरों के लिए व्यवहार बनना।
  2. भाई-बंधुओं के प्रति प्रेम को समुदाय में अमल में लाना।
  3. प्रेम के साझा लक्ष्य में एकता और सुरक्षा की अनुभूति।

सम्बद्ध मार्गदर्शक विचार (प्रमुख टिप्पणियाँ)

यहाँ कुछ पारंपरिक प्रकाशनों के संकलन से निकलते संकेत हैं जिन्हें विवेच्य आयत के साथ जोड़ा जा सकता है:

- मथ्यू हेनरी: परमेश्वर का प्रेम हमारे भीतर आकर प्रेम के कृत्यों को जन्म देता है; प्रेम से ही सत्य का परिपाक होता है।

- अλबर्ट बार्न्स: प्रेम का यह द्वितीय आयाम समुदाय की वास्तविकता को प्रमाणित करता है; ईश्वर के साथ प्रेम और पड़ोस के प्रति प्रेम एकमेव सत्य है।

- एडम क्लार्क: भाई-बंधुओं के प्रति प्रेम व्यावहारिक कदमों में प्रकट होता है—इनमें दया, सहायता और एक दूसरे की खुशियों के लिए विनम्रता शामिल है।

क्रॉस-रेफरेंसेज़: संक्षिप्त लिंक

1) योगी 4:20-21 के साथ सहभागिता: अगर कोई कहे कि वह परमेश्वर से प्रेम करता है, जबकि अपने भाई-बहिन से प्रेम नहीं करता, वह झूठा है। यह आयत प्रेम को व्यवहार में देखेने की कसौटी देती है।

2) मीका 6:8: प्रभु की अपेक्षा से प्रेम और नैतिक जीवन—न्याय, दया, और नम्रता के साथ चलना।

3) रोम 12:9-10: सच्चा प्रेम कैसे दिखे—हर्ष-वर्धन और ईमानदार प्यार, एक दूसरे के प्रति आदर और लगाव।

विधायी निष्कर्ष और व्यवहारिक निष्काषण

जो परमेश्वर से प्रेम करता है, वह अपने भाई-बहनों के साथ प्रेम को प्राथमिकता देता है। यह प्रेम केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि दैनिक निर्णयों में उतरता है—आपस में मदद, संवाद की सरलता, और समूह के कल्याण के लिए त्याग। समुदाय में यह प्रेम एकता बनाये रखता है और विवादों को हल करने की दिशा देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 4:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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बदला न लेना, और न अपने जाति भाइयों से बैर रखना, परन्तु एक दूसरे से अपने समान प्रेम रखना; मैं यहोवा हूँ। (मत्ती 5:43, मत्ती 19:19, मत्ती 22:39, मर. 12:31-33, लूका 10:27, रोम. 12:19, रोम. 13:9, गला. 5:14, याकूब. 2:8)

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उसने उससे कहा, “तू परमेश्‍वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख*।

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क्योंकि जो समाचार तुम ने आरम्भ से सुना, वह यह है, कि हम एक दूसरे से प्रेम रखें।

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