1 यूहन्ना 5:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

संसार पर जय पानेवाला कौन है? केवल वह जिसका विश्वास है, कि यीशु, परमेश्‍वर का पुत्र है।

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1 यूहन्ना 5:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 यूहन्ना 5:5 पर प्रकाश

यह पवित्र पाठ पहले से जानते हैं कि संसार पर जय पाने वाला कौन है? वह है जिसने विश्वास किया कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है। इस एक वाक्य के पीछे भरोसे की समरूपी ताकत और ईमान की स्पष्ट पहचान छुपी है: विश्वास जो उद्धार के स्रोत यीशु पर स्थिर है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ का संकेत

यह उद्धृत वाक्य बताता है कि परमेश्वर के साथ विजय का रास्ता विश्वास के भीतर है—विश्वास जिसमें यीशु मसीह को परमेश्वर के पुत्र के रूप में स्वीकार किया गया है। यह दवा है कि जो कोई ईश्वर में विश्वास नहीं करता, वह संसार की सूक्तियों के दबाव में गिर सकता है; पर जो यीशु पर ठसक कर विश्वास रखे, वह संसार के शीतल अवसरों के बावजूद भी जीत में रहता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता

  • विश्वास: निष्कपट, आश्रित भरोसा नहीं, बल्कि पुख्ता मान्यता कि यीशु परमेश्वर के पुत्र हैं और वही उद्धार के मार्ग हैं।
  • संसार पर जय: यहाँ “संसार” से अभिप्राय वह मानसिक स्थिति, दबाव, भय और पाप का कानून है जिसे विश्वास के बिना जीना आसान प्रतीत होता है।
  • परमेश्वर का पुत्र: यीशु की पवित्र身份 की पुष्टि, जिसे मानने से ही जीवन की वास्तविक विजय संभव है।

संदर्भित और संबंधित पाठ

• यीशु मसीह के deity और पुत्रत्व पर मान्यता के लिए अन्य अभिलेख—यूहन्ना 1:12; 5:18; रोम 8:37-39—इनमें विश्वास से देह की विजय की पुष्टियाँ मिलती हैं।

• विश्वसनीय विजय के लिए व्यवहारिक संकेत—1 यूहन्ना 4:4 और 5:4-5 में यह समझाया गया है कि विश्वास और निवर्तन एक दूसरे से जुड़कर हमें जीत देता है।

2–3 तात्कालिक क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा विवेचन

• यूहन्ना 1:12-13—जो यीशु को अपना लिया, वही परम पिता के परिवार का सदस्य बनता है; यह आत्म-विश्वास का प्रमाण है।

• रोम 10:9—यदि तुम हार मानकर नहीं, बल्कि अपनी mouth से यीशु को प्रभु मानते हो, उद्धार तुम्हारे पास आता है; यह उसी विश्वास की पुष्टि है जो 1 यूहन्ना 5:5 में है।

• 1 यूहन्ना 4:4— जो था वह तुममें है, जो संसार में है, उससे बड़ा है; यहाँ भी विजय का आधार विश्वास में है।

आज के लिए आवेदन

  • अपना विश्वास यीशु पर स्थापित करें: उनके पुत्रत्व को स्वीकारना और पालन-पोषण के लिए उनका मार्ग पकड़ना।
  • दैनिक जीवन में भय और चिंता से ऊपर उठने के लिए ईश्वर के वचन पर टिके रहें, क्योंकि विजय विश्वास से आती है, न कि परिस्थितियों से।
  • समुदाय के भीतर सच्चे समर्थन को ढूंढें—विश्वास की साझा पहल से संघर्षों में धैर्य और दृढ़ता मिलती है।

एडवाइस्ड उद्धरण (मार्थेनी, ऐल्बर्ट बार्न्स, एडम क्लार्क से संक्षिप्त संकेत)

यह पंक्ति सीधे उनके उद्धरणों से जुड़ती है क्योंकि तीनों टिप्पणीकर्ता इस बात को बार-बार दोहराते हैं कि मसीह के ऊपर विश्वास ही वास्तविक सफलता, मोक्ष और अलोकिक विजय का मार्ग है। (उद्धरण के संक्षिप्त संकेत नीचे दिए गए हैं; पूर्ण पाठ यहाँ नहीं दिया गया है।)

मुख्य निष्कर्ष: 1 यूहन्ना 5:5 बताता है कि जो यीशु को परमेश्वर का पुत्र मानकर विश्वास करता है, वही संसार पर जय पाता है—यह विश्वास ईश्वर के साथ वास्तविक संबंध और जीवन में जीत का आधार है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 यूहन्ना 5:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्‍वर का पुत्र है परमेश्‍वर उसमें बना रहता है, और वह परमेश्‍वर में।

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1 यूहन्ना 5:1 (HINIRV) »
जिसका यह विश्वास है कि यीशु ही मसीह है, वह परमेश्‍वर से उत्‍पन्‍न हुआ है* और जो कोई उत्‍पन्‍न करनेवाले से प्रेम रखता है, वह उससे भी प्रेम रखता है, जो उससे उत्‍पन्‍न हुआ है।

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