Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 5:1 1 यूहन्ना 5:2 1 यूहन्ना 5:3 1 यूहन्ना 5:4 1 यूहन्ना 5:5 1 यूहन्ना 5:6 1 यूहन्ना 5:7 1 यूहन्ना 5:8 1 यूहन्ना 5:9 1 यूहन्ना 5:10 1 यूहन्ना 5:11 1 यूहन्ना 5:12 1 यूहन्ना 5:13 1 यूहन्ना 5:14 1 यूहन्ना 5:15 1 यूहन्ना 5:16 1 यूहन्ना 5:17 1 यूहन्ना 5:18 1 यूहन्ना 5:19 1 यूहन्ना 5:20 1 यूहन्ना 5:21



1 यूहन्ना 5:7 का परिचय और संदर्भ
प्रीमुख पाठ 1 यूहन्ना 5:7-8 एक पुरानी गवाही की बात करता है—पवित्र आत्मा, प्रसंग में केंद्रित—यानी तीन गवाहियाँ: पवित्र आत्मा, जल, और रक्त। पुराने ताम्र-भक्त जातियों में यह समवाक्य एक साथ नहीं आता था, पर NT में यह स्पष्ट रूप से उद्धृत किया गया ताकि विश्वासी यह जान सके कि सत्य की गवाही एक है और तीन सबूत मिलकर उसकी प्रामाणिकता को पुष्ट करते हैं। यहाँ 'तीन गवाह' से यूहन्ना आस्तिक विश्वास के आधार को दृढ़ करते हैं कि यह विश्वास यथार्थ है, क्योंकि ईश्वर ने अपने पुत्र में वह सत्य दिया है जो हमारे लिए उद्धार का मार्ग है।
मुख्य विचार
गवाही का केंद्र मूलतः ईश्वर की साक्ष्य-स्वरूपता है। पवित्र आत्मा, अर्थात् ईश्वर की आंतरिक क्रिया, यीशु में मिले रक्त-उपचार और जल-प्रशंसा के मिलेजुले प्रमाण के साथ एक साथ खड़े होते हैं; यह दर्शाता है कि ईश्वर पूर्णता से प्रमाणित है और हमारा विश्वास सत्य पर टिकता है।
दो मुख्य विषय
संबंधित आयतें
• समान विचार 1 यूहन्ना 4:9-12: प्रेम का पूर्णत्व और विश्वास के साथ ईश्वर की प्रकृति प्रकट होती है।
• यूहन्ना 3:33-36: ईश्वर के संदेश की मान्यता और उनके प्रति हमारी श्रद्धा का परिणाम जीवन में मिलता है।
• रोम 8:16-17: आत्मा की गवाही हमारे आध्यात्मिक पुत्रत्व को पुष्ट करती है—हम ईश्वर के बच्चों का अनुभव करते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक विचार
1) विश्वास के समय तीन गवाहों पर विचार करें—पवित्र आत्मा की प्रेरणा, यीशु के लहू का क्षमा, और पबित्र जल का संस्कार-सम्बन्ध।
2) जीवन में भय या संदेह के momenten पर यह गवाही स्मरण रखें कि परमेश्वर की पुष्टि स्थिर है; हमारा उत्तर ईश्वर पर विश्वास बनाए रखना है।
पाठ-सम्प्रेषण (Cross-references)
• 1 यूहन्ना 4:9-12: प्रेम के कार्यों और वास्तविक प्रमाण से ईश्वर की प्रकृति प्रकट होती है। समन्वय: गवाही और प्रेम दोनों मिलकर उद्धार का अनुभव कराते हैं।
• याकूब 1:5-6: विश्वास में निर्भीकता से मांगना, ईश्वर की गवाही पर निर्भर रहते हुए संदेह से ऊपर उठना।
• रोम 8:16-17: आत्मा की गवाही से हमारे पुत्रत्व का प्रमाण मिलता है—गवाही का आंतरिक अनुभव जीवन में परिवर्तन लाता है।
संक्षेप निष्कर्ष
1 यूहन्ना 5:7 में तीन गवाहों की एकता ईश्वर की सत्यता का प्रमाण है—पवित्र आत्मा, जल से अभिषेक, और रक्त के तंत्र। इससे विश्वासी को धैर्य और आशा मिलती है कि उनका विश्वास टिकाऊ और सत्यापित है।
कूट-कथन: इस पाठ के वास्तविक संकेत मानव-समझ से परे ईश्वर के दिव्य प्रमाण पर टिकते हैं; हमारी प्रतिक्रिया है—ईमान के साथ इन गवाहों के पक्ष में स्थिर रहना और उनके अनुरूप जीवन हेतु प्रेरित होना।