Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 5:1 1 यूहन्ना 5:2 1 यूहन्ना 5:3 1 यूहन्ना 5:4 1 यूहन्ना 5:5 1 यूहन्ना 5:6 1 यूहन्ना 5:7 1 यूहन्ना 5:8 1 यूहन्ना 5:9 1 यूहन्ना 5:10 1 यूहन्ना 5:11 1 यूहन्ना 5:12 1 यूहन्ना 5:13 1 यूहन्ना 5:14 1 यूहन्ना 5:15 1 यूहन्ना 5:16 1 यूहन्ना 5:17 1 यूहन्ना 5:18 1 यूहन्ना 5:19 1 यूहन्ना 5:20 1 यूहन्ना 5:21



1 यूहन्ना 5:11 का तात्पर्य: जीवन की गवाही और परमेश्वर का वरदान
आयत का आरम्भ इन शब्दों से होता है: यह वही गवाही है जिसे प्रेरित यूहन्ना ने सूचित किया है— परमेश्वर ने हमें अनंत जीवन दिया है और यह जीवन उसके पुत्र में है। यह एक सहज-सी याद दिलाती है कि विश्वास का मूल कसौटी वही है जिसे परमेश्वर ने अपने द्वारा दिया गया जीवन माना है।
ईश्वर की पहचान और विश्वास का उद्घाटन
यह वाक्य दिखलाता है कि जीवन कब मिलता है और किसमें पाया जाता है: जीवन अनंत है और वह केवल यीशु मसीह में है। परमेश्वर ने अपने पवित्र पुत्र के माध्यम से chúngा दिया है, न कि मनुष्यों के प्रयासों से। यहाँ गवाही यह है कि ईश्वर स्वयं हमारे साथ चलना चाहता है, और यीशु में जीवन का सत्य स्थिरता पाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों के अर्थ
संबंधित बाइबल संदर्भ
1) योहान 1:2-3 – ईश्वर के जीवन का प्रत्यक्ष अनुभव और हमारे बीच रहने की पुष्टि।
2) यूहन्ना 20:31 – यीशु में विश्वास करने से जीवन का वास्तविक विश्वस बनता है।
3) प्रेरितomer 3:14-15 – विश्वास द्वारा भगवान के साथ स्थिरता और जीवन की आशा।
मोटे निष्कर्ष और आज की अनुप्रयोग
आज के संदर्भ में यह शास्त्र बताता है कि जीवन का स्रोत किसी दायित्व या कर्म में नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा में है। यदि आप यीशु को अपने जीवन में ग्रहण कर लेते हैं, तो अनंत जीवन आपके साथ जुड़ जाएगा। यह ज्ञान से नहीं, बल्कि विश्वास से प्राप्त होता है—यानी ईश्वर की गवाही पर भरोसा करें और अपने दिल को यीशु में बाँध दें।
हिंदी में पूर्वव्यावहारिक संदर्भ
जब हम जीवन के इस उपहार को पकड़े रहते हैं, तो हमारे दैनिक चरण भी सुरक्षित और आशोरपूर्ण बनते हैं। दीन-हीनता, ईमानदारी से दुआ, और पड़ोसियों के साथ प्रेम व्यवहार—ये सब उस जीवन के फल हैं जो यीशु में है।
एतिहासिक टिप्पणीकों के उद्ग्रथन (संक्षेप)
यह पंक्ति समरूपता से यह दर्शाती है कि परमेश्वर ने जीवन को अपने पुत्र के माध्यम से प्रदत्त किया है, जैसा कि प्रमुख यहूदी-नवीन टिप्पणीकारों का सार है। यह विश्वास को एक ठोस ठिकाने देता है कि जीवन के स्रोत और सुरक्षा एक ही जगह है—येशु मसीह में।