Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 यूहन्ना 5:1 1 यूहन्ना 5:2 1 यूहन्ना 5:3 1 यूहन्ना 5:4 1 यूहन्ना 5:5 1 यूहन्ना 5:6 1 यूहन्ना 5:7 1 यूहन्ना 5:8 1 यूहन्ना 5:9 1 यूहन्ना 5:10 1 यूहन्ना 5:11 1 यूहन्ना 5:12 1 यूहन्ना 5:13 1 यूहन्ना 5:14 1 यूहन्ना 5:15 1 यूहन्ना 5:16 1 यूहन्ना 5:17 1 यूहन्ना 5:18 1 यूहन्ना 5:19 1 यूहन्ना 5:20 1 यूहन्ना 5:21



1 यूहन्ना 5:9 — परमेश्वर की गवाही मानी जाए
परिचयात्मक स्थिति: इस पाद के समीप 1 यूहन्ना की गवाही की सत्यता और विश्वास के प्रमाण पर जोर है। लेखक बताता है कि यदि हम मनुष्यों की गवाही मानते हैं, तो परमेश्वर की गवाही उससे बढ़कर है—यानी परमेश्वर के प्रमाण का महत्व मानव परीक्षणों से अधिक है। खास विषय यह है कि ঈश्वस्त जीव के लिए ईश्वर के प्रमाण को स्वीकारना ही ह्रदय की सच्ची आस्था है।
ईश्वर की गवाही बनाम मनुष्य की गवाही
यह वाक्य दो प्रकार की गवाही का तुलनात्मक निष्कर्ष देता है। पहले, मनुष्यों की गवाही सीमित है—हमारी समझ, अनुभव और परिस्थितियाँ भ्रांतियाँ उत्पन्न कर सकती हैं। परन्तु परमेश्वर की गवाही सर्वोच्च है, क्योंकि वह सत्य है और सत्ता-पूर्ण है। उसने अपने पुत्र के विषय में स्पष्ट और दृढ़ गवाही दी है, जिसे विश्वाससूत्र के रूप में उद्धृत किया गया है।
कुंजी शब्द और चित्र
संबद्ध छूटे हुए द्योतक और पवित्र ग्रंथ
यह पद सत्य कलह के बीच विश्वास की दिशा देता है—मनुष्यों की गवाही तो क्षणभंगुर हो सकती है, पर ईश्वर की गवाही बना देती है कि उद्धार पुत्र यीशु ही है। नीचे कुछ प्रमुख cross-references हैं जिन्हें इस संदेश को गहराई देते हैं:
आधारभूत शब्दावली का सरल स्पष्टीकरण
यहाँ पर विश्वास का मूलमंत्र है: परमेश्वर की गवाही को स्वीकारना, चाहे वह मानव अनुभव से कितनी भी असंगत क्यों न हो। अगर हम ईश्वर की घोषणा को सच मानते हैं, तो हमारा विश्वास दृढ़ होता है और हमारे जीवन में चंगाई का संदेश स्थिर रहता है।
practical application — आज के समय में
संक्षिप्त समापन
1 यूहन्ना 5:9 हमें याद दिलाता है कि मानव-गवाही पर्याप्त नहीं है; परमेश्वर की गवाही—यानी उसने पुत्र के विषय में जो प्रमाण दिया है—वह सत्य है और वही जीवन के लिए आधार है। इसे स्वीकारना हमारे विश्वास का सही परीक्षण है।
शब्द-उद्धरण (MHC, Barnes, Clarke): नीचे संक्षेप में उन विद्वानों के शब्द जो सीधे उद्धरण नहीं, पर विचारों के संदर्भ के तौर पर उपयोगी रहे, को समाहित किया गया है:
Matthew Henry: “When we take men’s testimony, we do not reach to the bottom of truth; God’s testimony in His Son is the fullest assurance.”
Albert Barnes: “God’s witness is not bare opinion, but a declaration grounded in the very nature and works of Christ.”
Adam Clarke: “God’s testimony concerning His Son stands as the supreme certificate of truth, over which human testimony must yield.”