Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 11:1 1 राजाओं 11:2 1 राजाओं 11:3 1 राजाओं 11:4 1 राजाओं 11:5 1 राजाओं 11:6 1 राजाओं 11:7 1 राजाओं 11:8 1 राजाओं 11:9 1 राजाओं 11:10 1 राजाओं 11:11 1 राजाओं 11:12 1 राजाओं 11:13 1 राजाओं 11:14 1 राजाओं 11:15 1 राजाओं 11:16 1 राजाओं 11:17 1 राजाओं 11:18 1 राजाओं 11:19 1 राजाओं 11:20 1 राजाओं 11:21 1 राजाओं 11:22 1 राजाओं 11:23 1 राजाओं 11:24 1 राजाओं 11:25 1 राजाओं 11:26 1 राजाओं 11:27 1 राजाओं 11:28 1 राजाओं 11:29 1 राजाओं 11:30 1 राजाओं 11:31 1 राजाओं 11:32 1 राजाओं 11:33 1 राजाओं 11:34 1 राजाओं 11:35 1 राजाओं 11:36 1 राजाओं 11:37 1 राजाओं 11:38 1 राजाओं 11:39 1 राजाओं 11:40 1 राजाओं 11:41 1 राजाओं 11:42 1 राजाओं 11:43



1 राजाओं 11:13 का संदर्भ और अर्थ
पश्चिम में सुलैमान के शासन के क्रम में दाऊद के विरासत-परंपरा और परमेश्वर की योजना का संकेत मिलता है। इस आयत में परमेश्वर स्वयं घोषणा करते हैं कि वह सुलैमान की नस्ल के कुछ भागों को भी समाप्त नहीं करेंगे, पर दाऊद के कारण और यरूशलेम के नाम से चुने हुए स्थान के कारण, सुलैमान के राज्य के भीतर एक गोत्र छोड़ देंगे। इसका अर्थ है—यद्यपि राजा के दायरे में कटु निर्णय लिया जाएगा और राजवंश के टेढ़े-मेढ़े हिस्से को दमनात्मक रूप से कम किया जाएगा, फिर भी दाऊद की कुण्डली से एक राहत मिलती रहेगी। यह एक प्रकार की दया-योजना है जो फोरसी के रूप में परमेश्वर की प्रतिज्ञा और राज-संरचना के भीतर के न्याय को संतुलित करती है।
मुख्य तथ्य
इस वचन में परमेश्वर पुष्टि करते हैं कि राजा के पापों के बावजूद वह सत्ता से पूरी तरह नहीं हटाते, बल्कि दाऊद की वजह से एक गोत्र को बनाए रखते हैं और यरूशलेम के कारण एक विशेष भाग सुरक्षित रहता है। यह संयोजन बताता है कि परमेश्वर की योजना में दया और न्याय साथ-साथ चलते हैं।
मुख्य विषय
अन्य प्रभावशाखाएँ (Cross-references)
- 2 इतिहास 6:42 में समुद्री-यज्ञ और दाऊद की वाणी से प्रेरित पवित्रता का स्मरण।
- जिन्नस 12:24 का विचार—बीज गिरकर मरता है तो वृद्धि पाता; यहाँ भी राजवंश के एक अंश को सुरक्षित रखने की पुष्टि है।
व्याख्या-नोट: उपरोक्त संदर्भ सीधे टेक्स्ट को उद्धृत नहीं करते, पर प्रयोजन बताते हैं कि परमेश्वर की योजना में बल, दया और कबूल की भावना कैसे एक साथ चलते हैं।
व्यावहारिक विचार
हमारे जीवन में भी अक्सर हम संकल्पों और परिणामों के बीच असंतुलन पाते हैं। इस आयत में सिखने योग्य है कि परमेश्वर अपने लोगों के लिए स्थिरता बनाये रखते हैं, भले ही उनके लोग परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार पूर्ण न हों। इसलिए हमें आशा और विश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए, यह जानकर कि परमेश्वर का मार्ग किसी एक व्यक्ति के पूर्ण कबूल या फेल के आधार पर नहीं, बल्कि पूरे इतिहास की योजना के अनुसार चलता है।
संक्षिप्त समापन
1 राजाओं 11:13 में दाऊद की किस्मत के कारण एक गोत्र की सुरक्षा और यरूशलेम का चयन—ये संकेत हैं कि परमेश्वर न्याय के साथ दया भी दिखाते हैं। राजा के पतन के बावजूद, परमेश्वर की covenant एक दिशा प्रदान करती है जो राजवंश की निरंतरता को बनाए रखती है।