Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 11:1 1 राजाओं 11:2 1 राजाओं 11:3 1 राजाओं 11:4 1 राजाओं 11:5 1 राजाओं 11:6 1 राजाओं 11:7 1 राजाओं 11:8 1 राजाओं 11:9 1 राजाओं 11:10 1 राजाओं 11:11 1 राजाओं 11:12 1 राजाओं 11:13 1 राजाओं 11:14 1 राजाओं 11:15 1 राजाओं 11:16 1 राजाओं 11:17 1 राजाओं 11:18 1 राजाओं 11:19 1 राजाओं 11:20 1 राजाओं 11:21 1 राजाओं 11:22 1 राजाओं 11:23 1 राजाओं 11:24 1 राजाओं 11:25 1 राजाओं 11:26 1 राजाओं 11:27 1 राजाओं 11:28 1 राजाओं 11:29 1 राजाओं 11:30 1 राजाओं 11:31 1 राजाओं 11:32 1 राजाओं 11:33 1 राजाओं 11:34 1 राजाओं 11:35 1 राजाओं 11:36 1 राजाओं 11:37 1 राजाओं 11:38 1 राजाओं 11:39 1 राजाओं 11:40 1 राजाओं 11:41 1 राजाओं 11:42 1 राजाओं 11:43

मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
1 राजाओं 11:42 में कहा गया है कि सुलैमान ने यरूशलेम में राज्य करते हुए इस्राएल पर चालीस वर्ष तक शासन किया। यह संदर्भ उसके शासन की पूरी अवधि को सारगर्भित करता है, न कि विशुद्ध दिन-गणना। यह verse हमें सुलैमान की सत्ता की स्थापितता, राजनीतिक एकता, और भगवान के उद्देश्य के साथ उनके शासन के समन्वय का संकेत देता है; एक समय जिसमें ईश्वर के आशीर्वाद से राज्य एकजुट रहा और तटस्थ रूप से धार्मिक-नैतिक दिशा बनाए रखना एक चुनौती बना रहा।
साहित्यिक प्रसंग (लिटरेरी कांटेक्स्ट)
यह पंक्ति 11 capítulo, 42 आयत के भीतर एक समापन संकेत है जो राजा सुलैमान के पूरे राजकाल की एक न्यूनीकृत, परन्तु निर्णायक, प्रस्तुति देता है। पुरानी नियम के अंतर्गत दीपावली-सी एकता और जागों के साथ राज्य की अखंडता का प्रभाव, तथा दायित्व की स्मृति—ये सब मिलकर उनके राजवर्षों को एक व्यापक संरचना देते हैं।
theological significance (धार्मिक-आध्यात्मिक महत्व)
सुलैमान का शासन, खासकर पहले के वर्षों में, प्रभु के कड़े निर्देशों के अनुरूप व्यवस्था-नियोजन और भाइयों के बीच एकता बनाए रखने का प्रयास दर्शाता है। यह verse चित्रित करता है कि कितनी लंबी कुर्सी भी नैतिक, धार्मिक, और सामाजिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति से जुड़े हुए रहती है। बाद के समय में परमेश्वर के नियमों से विमुखता के प्रभाव इस शासन पर भी पड़े, जिससे प्रश्न उठते हैं कि दीर्घकालीन सफलता किस आधार पर टिकती है—केवल ताकत से या परमेश्वर-निर्देश के पालन से।
अन्य पवित्र ग्रंथों के संदर्भ (Cross-references)
विचार-विमर्श के प्रश्न
कनिष्ठ निष्कर्ष
इस verse से स्पष्ट होता है कि सुलैमान का शासन, यरूशलेम में, इस्राएल की राजनीतिक और धार्मिक-धारणाओं के संगम के रूप में जाना जाता है। यह याद दिलाता है कि दीर्घकालीन शासन तब ही टिकता है जब वह प्रभु के मार्गों के अनुरूप रहे और समाज के हर वर्ग के लिए एक एकीकृत नैतिक ढांचा प्रस्तुत करे। साथ ही यह संकेत देता है कि बाद की विफलताओं के कारण शासन की समग्र नज़र अंदाज़ में बदली जा सकती है, परंतु प्रारम्भिक वर्षों में प्रभु-आशीर्वाद एक प्रमुख प्रेरक रहा।
उद्धरण-उद्धृत टिप्पणियाँ: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी स्रोतों के संकलन में मिलते हुए सामंजस्यपूर्ण विचारों का समेकन किया गया है। यदि किसी स्थान से उनके छोटे उद्धरण (short quotations) जाते हैं, वे आवश्यक संदर्भ के भीतर ही हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेस के संक्षिप्त व्याख्या से स्पष्ट है कि परमेश्वर की आज्ञाओं के पालन से राज्य की स्थिरता जुड़ी रहती है, और निर्दिष्ट मार्ग से भटकाव सामाजिक-आध्यात्मिक क्षति लाता है।