Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 11:1 1 राजाओं 11:2 1 राजाओं 11:3 1 राजाओं 11:4 1 राजाओं 11:5 1 राजाओं 11:6 1 राजाओं 11:7 1 राजाओं 11:8 1 राजाओं 11:9 1 राजाओं 11:10 1 राजाओं 11:11 1 राजाओं 11:12 1 राजाओं 11:13 1 राजाओं 11:14 1 राजाओं 11:15 1 राजाओं 11:16 1 राजाओं 11:17 1 राजाओं 11:18 1 राजाओं 11:19 1 राजाओं 11:20 1 राजाओं 11:21 1 राजाओं 11:22 1 राजाओं 11:23 1 राजाओं 11:24 1 राजाओं 11:25 1 राजाओं 11:26 1 राजाओं 11:27 1 राजाओं 11:28 1 राजाओं 11:29 1 राजाओं 11:30 1 राजाओं 11:31 1 राजाओं 11:32 1 राजाओं 11:33 1 राजाओं 11:34 1 राजाओं 11:35 1 राजाओं 11:36 1 राजाओं 11:37 1 राजाओं 11:38 1 राजाओं 11:39 1 राजाओं 11:40 1 राजाओं 11:41 1 राजाओं 11:42 1 राजाओं 11:43



1 राजाओं 11:5 पर टिप्पणी: सीदोनियों की अश्तोरत और मिल्कोम के पीछे सुलैमान का चलना
पृष्ठभूमि में, राजा सुलैमान ने परमेश्वर की सेवा से विमुख होकर अपनी भौतिक सम्पदाओं और वैदिक-प्रचलित पथों को अपनाया। इस आयत में हम देखते हैं कि वह अश्तोरत (सीदोनियों की देवी) और मिल्कोम (अम्मोनियों का देवता) के प्रति आकर्षण दिखाता है, जो न केवल मिस्र–पश्चिमी सभ्यता के साथ जुड़ाव का संकेत है बल्कि ईश्वर के नियमों के विरुद्ध भी है। यह विकास परमेश्वर के चितन से बहिर्गमन और आत्म-विश्वास की परीक्षा का भाग है।
केंद्रीय अर्थ
इस verse में सुलैमान की आस्था का एक टुकड़ा दिखाया गया है, जहाँ वह ऐश्वर्यों के देव-चिह्नों के पीछे चला, और उनकी पूजा में भागीदारी की। यह आत्म-निर्भरता और अन्य देवताओं की ओर मोड़ की पुष्टि है, जो परमेश्वर के विधान के विपरीत है। यह न केवल व्यक्तिगत पाप है, बल्कि उस राष्ट्रीय धर्म-निष्ठा के क्षरण का भी संकेत है जिसे परमेश्वर ने इस्राएल के लिए निर्धारित किया था।
मुख्य विषय
संबद्ध पाठ
- पूर्व-पत्र के अनुभव से प्रेरणा: परमेश्वर के नियमों के विरुद्ध चढ़ाव के परिणाम हमारे दैनिक जीवन में स्पष्ट होते हैं।
- नीति-वचन: संतानों के मार्गदर्शन में धार्मिकता को प्रमुख मानने की प्रेरणा देता है कि हम एक-ईश्वर के साथ रहें।
- अन्य नीतियाँ: प्रेरित व्यक्तियों के अनुभव से सीख मिलती है कि शक्ति और संपत्ति के पथ आत्म-विश्वास और भक्ति दोनों को केंद्रित रखे।
कर्म-विचार (व्यावहारिक):
हमारे लिए यह संदेश चेतावनी है कि सफलता और समृद्धि के दौरान भी हमें प्रभु के निर्देशों पर दृढ़ रहना चाहिए। यदि हम अपने सांस्कृतिक या सामाजिक दबाव के कारण ईश्वर से विमुख होते हैं, तो पथभ्रष्टि घटती है। नैतिकता और भक्ति के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यावश्यक है।
छोटा समापन सार
सुलैमान की इस गलती से स्पष्ट होता है कि बाहरी आकर्षण और सत्ता-लोकप्रियता ईश्वर के साथ अटूट सम्बद्धता को कमजोर कर सकती है। यह आयत एक चेतावनी है कि परमेश्वर के साथ एक-ईश्वर की निष्ठा ही शांति और दीर्घकालीन नेतृत्व का आधार है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
याद रखें कि दाऊद-वंश के ज्ञान-आधारित अनुशासन के संदर्भ में यह टिप्पणियाँ दिखाती हैं कि पथभ्रष्टि कैसे आत्म-विश्वास को चुनौती देती है; साथ ही, यह स्पष्ट करती हैं कि परमेश्वर के साथ निष्ठा बनाए रखना एक स्थिर राज-नीति है।
ध्यान दें: नीचे उद्धृत स्पष्ट बातें Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से आवश्यक हो तो हमने संक्षेप में संकेतित हैं, परन्तु पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण केवल आवश्यकतानुसार प्रकाशित हैं:
नोट: इस पंक्ति के लिए बॉडी ऑफ विश्लेषण में इन विद्वानों के सार्वजनिक डोमेन विचारों को समेकित किया गया है। यदि आप चाहें, तो मैं विशिष्ट उद्धरणों के संदर्भ और उनके हिंदी अनुवाद का छोटे-छोटे अंश दे सकता/सकती हूँ।