Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 11:1 1 राजाओं 11:2 1 राजाओं 11:3 1 राजाओं 11:4 1 राजाओं 11:5 1 राजाओं 11:6 1 राजाओं 11:7 1 राजाओं 11:8 1 राजाओं 11:9 1 राजाओं 11:10 1 राजाओं 11:11 1 राजाओं 11:12 1 राजाओं 11:13 1 राजाओं 11:14 1 राजाओं 11:15 1 राजाओं 11:16 1 राजाओं 11:17 1 राजाओं 11:18 1 राजाओं 11:19 1 राजाओं 11:20 1 राजाओं 11:21 1 राजाओं 11:22 1 राजाओं 11:23 1 राजाओं 11:24 1 राजाओं 11:25 1 राजाओं 11:26 1 राजाओं 11:27 1 राजाओं 11:28 1 राजाओं 11:29 1 राजाओं 11:30 1 राजाओं 11:31 1 राजाओं 11:32 1 राजाओं 11:33 1 राजाओं 11:34 1 राजाओं 11:35 1 राजाओं 11:36 1 राजाओं 11:37 1 राजाओं 11:38 1 राजाओं 11:39 1 राजाओं 11:40 1 राजाओं 11:41 1 राजाओं 11:42 1 राजाओं 11:43



1 राजाओं 11:6 पर तात्पर्य और संदर्भ
इस पद में हम सिन्धुयुग के उत्तराधिकार के बाद सुलैमान के व्यवहार और उसका आध्यात्मिक影ित प्रभाव देखते हैं। पवित्र पुस्तक में यह बताता है कि राजा दाऊद की तरह चलना यहोवा की दृष्टि में कितना आवश्यक था, और सुलैमान ने वह राह छोड़ दी। यह पाठ हमारे लिए स्पष्ट करता है कि परमेश्वर की ईमानदारी और वफादारी के मानदंड कितने कठोर होते हैं, भले ही व्यक्ति बुद्धिमान और शक्तिशाली क्यों न हो।
मुख्य विचार
इसverse का केंद्रीय अर्थ यह है कि सुलैमान ने अपने पितृत्व और परमेश्वर के साथ बनाए गए अनुबंधों से चिपके रहकर वही किया जो दाऊद की रीति के अनुसार था, परन्तु अंततः यह देखते हैं कि उसने इस मूल्यमानदंड से हटना शुरू किया। यह पीछे के अध्यायों के निहित पाठ के साथ जुड़कर बल देता है कि बुद्धिमानी और धार्मिकता दोनों एक साथ चले बिना स्थिर नहीं रहतीं।
दो-तीन प्रमुख विषय
अन्य पाठ से संबंध
यहां के विचारों को निम्न शास्त्रीय टिप्पणियों से जोड़ा जा सकता है:
क्रियात्मक विचार
- अपनी आस्था को सत्ता या सफलता से नहीं बद्ध करें।
- अपने जीवन में उन पंक्तियों को याद रखें जो आपके पिता-आस्था या पूर्वजों के विश्वास से जुड़ी हों।
- परमेश्वर के मार्ग पर चलना तब भी जब यह अधिक कठिन हो, श्रेष्ठ मार्ग है।
संक्षेप
1 राजाओं 11:6 यह स्मरण कराता है कि सत्ता और बुद्धिमत्ता के साथ परमेश्वर के आदेशों का पालन ही नर-नालिक जीवन का आधार है। दाऊद के समान रीति से चलना केवल चरित्र का सवाल नहीं, यह और भी गहराई से एक विश्वास-संरचना है। सुलैमान ने शुरुआत अच्छी की, परंतु चलते-चलते वह दाऊद की दिशा से अलग हो गया, जो हमें चेतावनी देती है कि दीर्घकालिक आशीष केवल वही पाती है जो परमेश्वर के सुझावों को अपने जीवन का केंद्र बनाकर चलता है।
संदर्भ-पाठ: 1 राजाओं 3-4 (सुलैमान की प्रारम्भिक अर्चना और ज्ञान की माँग), निर्बन्धन के बाद के अध्याय (राजाओं के शासन का पतन संकेत), 2 स्मृतियाँ 7:14 (आचरण की आवश्यकता के साथ आशीष का संयोजन).
नोट: इस पंक्तির ठीक उद्धरणों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के शब्दों के संक्षिप्त संकेत दिये गए हैं; चयनित कथनों के सटीक उद्धरण नीचे उनके नामों के साथ दर्ज हैं यदि उपलब्ध हों।