Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 17:1 1 राजाओं 17:2 1 राजाओं 17:3 1 राजाओं 17:4 1 राजाओं 17:5 1 राजाओं 17:6 1 राजाओं 17:7 1 राजाओं 17:8 1 राजाओं 17:9 1 राजाओं 17:10 1 राजाओं 17:11 1 राजाओं 17:12 1 राजाओं 17:13 1 राजाओं 17:14 1 राजाओं 17:15 1 राजाओं 17:16 1 राजाओं 17:17 1 राजाओं 17:18 1 राजाओं 17:19 1 राजाओं 17:20 1 राजाओं 17:21 1 राजाओं 17:22 1 राजाओं 17:23 1 राजाओं 17:24



अर्थ का सीधा सार
1 कुल 17:17 में वहाँ वर्णित स्त्री के घर में रहने वाले पुत्र की बीमारी का वर्णन है; वह रोग इतना बढ़ गया कि उसका सांस लेना कठिन हो गया। यह कथन स्वास्थ्य-चिंता के साथ उसके परिवार के भय, भरोसे और ईश्वर के साथ की जाँच की एक सूक्ष्म प्रतीकात्मक झलक देता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस पाठ में एलेह के समय की व्यवस्था भीतर की एक गरिमा है जहाँ चरित्रों के निजी संकट भी ईश्वर के नियंत्रण के अंतर्गत आते हैं। यह घटना घर-स्वामिनी के पुत्र की बीमारी की है, एक ऐसी स्थिति जो परिवार के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को भी प्रभावित कर सकती है। हालाँकि विस्तृत सूचियाँ पाठ के भीतर नहीं दी जातीं, परन्तु यह संकेत देता है कि नबी-सेवा के बीच निजी पीड़ा का स्थान कितना महत्त्वपूर्ण होता है और परमेश्वर की कृपा कैसे व्यक्त होती है।
व्याख्यात्मक विचार
छोटा थीमैटिक रेखांकन
अन्य सम्बद्ध संदर्भ
• दूसरे स्थानों में पुराने नियम में रोग और विश्वास के सम्बन्धों के बोध मिलते हैं, जैसे संकट के समय में विश्वासियों के कैसे प्रार्थना और सहायता प्राप्त होती है।
• लोरी-स्तुति के भीतर परिवार के सदस्य की पीड़ा बहुत बार परमेश्वर के साथ नजदीकी और उनकी कृपा के अनुभव का मार्ग बनती है।
• पारिवारिक स्वास्थ्य की चिंता के संदर्भ में नैतिक सबक — विश्वास, प्रार्थना और समुदाय की भागीदारी एक साथ काम करती है।
कटु-परम-उपदेश
कथन बताता है कि व्यक्तिगत पीड़ा में भी परमेश्वर की योजना अदृश्य नहीं रहती; विश्वास की प्रतिक्रिया—प्रार्थना, आशा, और सहानुभूति—परिवार और समुदाय को परखते हैं। इस पाठ से यह सीख मिलती है कि बीमारी के समय भी प्रभु के विश्वासयोग्य लोगों को एक दूसरे का सहारा बनना चाहिए।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षिप्त व्याख्या)
• संदर्भ-1: रोग और दया—भरोसा रखने पर प्रभु की कृपा कैसे प्रकट होती है। (सम्बद्ध संदर्भों मेंDiseases and compassion themes)
• संदर्भ-2: परिवारिक सहायता—समुदाय की भागीदारी से पीड़ा कम कैसे होती है।
• संदर्भ-3: परीक्षण में विश्वास—कठिन समय में विश्वास की दृढ़ता कैसे विकसित होती है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
प्रस्तुत पाठ से हमें यह सिखने को मिलता है कि बीमारी के समय भी आशा मत छोड़ें; परिवार मिलकर प्रार्थना करें, समुदाय से सहायता लें और परमेश्वर की कृपा पर निर्भर रहें।
टिप्पणी: नीचे दी गई पंक्तियाँ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के लोकप्रिय उद्धरणों के छोटे भाग उद्धृत हैं, यदि उपलब्ध हों, परन्तु यहाँ पूर्ण पाठ उद्धृत नहीं किया गया है।