Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 17:1 1 राजाओं 17:2 1 राजाओं 17:3 1 राजाओं 17:4 1 राजाओं 17:5 1 राजाओं 17:6 1 राजाओं 17:7 1 राजाओं 17:8 1 राजाओं 17:9 1 राजाओं 17:10 1 राजाओं 17:11 1 राजाओं 17:12 1 राजाओं 17:13 1 राजाओं 17:14 1 राजाओं 17:15 1 राजाओं 17:16 1 राजाओं 17:17 1 राजाओं 17:18 1 राजाओं 17:19 1 राजाओं 17:20 1 राजाओं 17:21 1 राजाओं 17:22 1 राजाओं 17:23 1 राजाओं 17:24



1 राजाओं 17:14 — समय और आपूर्ति का परमेश्वर
यह पाठ घोसीया के समय घटित एक सशक्त संकेत का हिस्सा है, जहाँ एलिया, इस्राएल का भविष्य-निर्देशक, अस्थाई दासता और अकाल के बीच एक साधारण दयालु स्त्री के घर तक पहुँचे। स्रोतकथा के अनुसार यह घड़े के मैदे और कुप्पी के तेल की कमी के बीच भरोसे के अनोखे प्रमाण का उद्घाटन है। परमेश्वर का यह वचन बतलाता है कि जब तक ईश्वरीय आशीष अवतरित न हो, तब तक उसकी आपूर्ति बाधित नहीं होगी, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों।
परमेश्वर और विश्वास के इस संदेश के मुख्य बिंदु
कुंजी शब्द और छवियाँ समझना
मैदा का घड़ा और तेल की कुप्पी— ये दोनों एक साधारण घरेलू आपूर्ति के प्रतीक हैं जो अनुग्रह-प्रवाह के साथ जुड़ते हैं। अल्लाह के प्रावधान के बिना इनका शेष होना असम्भव है; परन्तु परमेश्वर के वचन के अनुसार, वे असली जीवन का संकेत बन जाते हैं कि उसका प्रेम और शक्ति अभी भी जीवित है।
सम्मिलित पाठ-प्रेरणा
यह दृश्य शीर्षक देता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के साथ कैसे काम करता है—वह अकाल के बीच भी आश्वासन देता है कि क्रमबद्ध आशीष का स्रोत बना रहेगा। यह कहानी उसी ईश्वर पर केंद्रित है जो आकाश से दिन-बदिन आशीष बरसाता है और जब तक वह चाहے तब तक नहीं घटती।
अन्य उद्धृत विचार (सारांश)
यद्यपि संपूर्ण उद्धरण सिर्फ इस उपदेश-घटना में आता है, लेखक-हस्तलेख Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke आदि जनता के सार्वजनिक-डायनामिस्म टिप्पणियों से पक्का सत्य मिलता है: ईश्वर के आज्ञाओं के पालन में उसकी निर्भरता बनती है, और उसकी कृपा के बिना जीवन-यावस्था निष्क्रिय रहती है।
संक्षेप में, यह वचन बताता है कि परमेश्वर के आदेश और आशीष के बिना कुछ भी स्थिर नहीं रहता; परन्तु उनके वचन के अनुरूप कदम उठाने पर जीवन में चमत्कार-सी आपूर्ति मिलती है।
क्रॉस-रेफरेंस
1) अन्य स्थान जहाँ ईश्वर की आशीष निरन्तर होती है — जब वह अपने लोगों के साथ होता है तो उनके दैनिक आवश्यक पूरे रहते हैं (उदाहरण के रूप में निर्गमन और 2 राजा 4:6-7) — छोटे-छोटे संकेत भी बड़े लाभ बन जाते हैं।
2) विश्वास की परीक्षा का पाठ — जब लोग कष्ट में होते हैं, तब भी परमेश्वर का आदेश मानना क्यों आवश्यक है (यीशु-पूर्व संदर्भों में ईश्वरीय आदेश का पालन जीवन को आशा देता है)।
3) कृपा का प्रवाह — ईश्वर उसके बच्चों के लिये चमत्कारी आशीष खोलता है, ताकि भरोसा बनाये रखा जा सके (यहोवा की प्रावधान पर निर्भरता का संदेश)।
आज के लिए आवेदन
- कठिन समय में भी परमेश्वर के प्रावधान पर भरोसा रखें; उसकी कृपा दैनिक आवश्यकता से अधिक बनी रहती है।
- दैनिक जीवन के छोटे-छोटे सत्य में ईश्वर की उपस्थिति पहचानें — जैसे घर की रसोई में एक छोटा-सा आशीर्वाद भी संभव है जब मन और कदम उसकी दिशा में हों।
- जीवन-यात्रा में विश्वास-परख को न डरायें; ईश्वर के आदेशों के अनुसार सरल कदम ही बड़े चमत्कार का प्रवेश द्वार बनते हैं।