Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 17:1 1 राजाओं 17:2 1 राजाओं 17:3 1 राजाओं 17:4 1 राजाओं 17:5 1 राजाओं 17:6 1 राजाओं 17:7 1 राजाओं 17:8 1 राजाओं 17:9 1 राजाओं 17:10 1 राजाओं 17:11 1 राजाओं 17:12 1 राजाओं 17:13 1 राजाओं 17:14 1 राजाओं 17:15 1 राजाओं 17:16 1 राजाओं 17:17 1 राजाओं 17:18 1 राजाओं 17:19 1 राजाओं 17:20 1 राजाओं 17:21 1 राजाओं 17:22 1 राजाओं 17:23 1 राजाओं 17:24



अर्थ का प्रत्यक्ष वक्तव्य
1 राजाओं 17:8 में यहोवा का वचन जीवित होकर एलीयाज के घर तक पहुँचता है, जो यहोवा के निर्देश के अनुसार चलता है। इस वचन से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर अपने सेवकों के लिए शब्द भेजकर उनकी आवश्यकताओं के समय में आवागमन करते हैं, भले ही परिस्थितियाँ कितनी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों।
पृष्ठभूमि और प्रसंग
इस अध्याय में एलिय्या नामक भविष्यवेत्ता एक अनपेक्षित परीक्षण से गुजरता है। पहली राजाओं के संदर्भ में यह भाग आसन्न अकाल और दैवीय आशीष की आवश्यकता के बीच की संतुलन को दर्शाता है। तीन प्रमुख घटना-घटित होती हैं: (1) एलिय्याह का राज्य के राजा और जनता के सामने कदम बढ़ाना, (2) निर्जन स्थान और एक कौवा द्वारा भोजन का प्रबंध, (3) यहोवा का संदेश—“यहोवा का यह वचन… पहुँचा”—जो भविष्य को दिशा देता है। इस वचन से यह भी सिद्ध होता है कि परमेश्वर अपने निर्णयों में समय-निर्धारण और साक्ष्य के अनुसार मार्ग दिखाते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
संक्षिप्त थीमैटिक सूची
अनुरूप क्रॉस-रेफरेंसेज
उसी प्रकार के विश्वास और डायरेक्शन के संदेश अन्य किताबों में भी मिलते हैं:
दृश्य-आवश्यकता के साथ पर्सेप्शन
यह वचन हमें यह सिखाता है कि कठिन समय में भी परमेश्वर की आवाज स्पष्ट हो सकती है और वह अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए सही समय पर हाथ बढ़ाते हैं। हमें धैर्य और आज्ञाकारी बने रहना चाहिए जब यहोवा के संदेश हमारे सामने आते हैं।
निष्कर्षात्मक अभ्यास
जो लोग कठिन परिस्थितियों में भी परमेश्वर की ओर की आवाज सुनते हैं और उसके निर्देशों पर चलते हैं, वे ईश्वर के भरोसे और आश्रय में रहते हैं। यह वचन एक सुराग देता है कि हमारा कदम नियमों और प्र acogंड पर आधारित होना चाहिए न कि सिर्फ आत्म-आशाओं पर।