Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 17:1 1 राजाओं 17:2 1 राजाओं 17:3 1 राजाओं 17:4 1 राजाओं 17:5 1 राजाओं 17:6 1 राजाओं 17:7 1 राजाओं 17:8 1 राजाओं 17:9 1 राजाओं 17:10 1 राजाओं 17:11 1 राजाओं 17:12 1 राजाओं 17:13 1 राजाओं 17:14 1 राजाओं 17:15 1 राजाओं 17:16 1 राजाओं 17:17 1 राजाओं 17:18 1 राजाओं 17:19 1 राजाओं 17:20 1 राजाओं 17:21 1 राजाओं 17:22 1 राजाओं 17:23 1 राजाओं 17:24



एलिय्याह की प्रार्थना से जीवंतता का पुनः प्राप्त होना (1 राजाओं 17:22)
मुख्य व्याख्या: यहाँ यहोवा की कृपा से दयालु परमेश्वर ने मृत बालक में जीवन का प्राण पुनः दे दिया, और यह घटना बहुधा यह संकेत है कि ईश्वर के निर्देश और नबी की intercession से मृत्यु पर भी विजय संभव है। इस वचन का उद्देश्य यह दर्शाना है कि प्रभु का शब्द और उसकी आत्मा जीवन के लिए आयातित करते हैं, भले ही परिस्थितियाँ कितनी भी निष्फल क्यों न लगें।
पाठ-संदेश का साहित्यिक संदर्भ
घटना उस समय घटती है जब एलिय्याह एक अद्भुत दया-कार्य के बीच आते हैं। पुत्र के प्राण के लौट आने से यह स्पष्ट होता है कि नबी की प्रार्थना परमेश्वर के समक्ष स्वीकार्य है और जीवित मानवीय दया-संवेदना को जन्म देती है। यह कथा कड़ी प्रतीक्षा, विश्वास और सक्रिय आशीष का मिश्रण है: नबी की निर्भीक प्रार्थना, बालक का जीवित होना, और घर-परिवार में ईश्वर के साथ नई आशा का संचार।
तीर्थ: थीम और theological significance
- जीवन की यथार्थता: मृत्यु के बाद भी ईश्वर के पास जीवन का अधिकार बना रहता है; उसकी शक्ति बंधनों को तोड़ती है।
- नबी की प्रार्थना की शक्ति: एलिय्याह की विनती और परमेश्वर की सुनवाई एक साथ यह दिखाते हैं कि पृथ्वी पर ईश्वरीय कार्य कैसे प्रकट होते हैं।
- आशा की पुनर्स्थापना: परिवार और समुदाय के भीतर विश्वास को उन्नत करने वाला यह घटना, भविष्य के भरोसे का संकेत बनती है कि परमेश्वर विनाश के बाद भी जीवन देता है।
अनुशंसा: पवित्रशास्त्र के अन्य अंशों से संबंध
आंतरिक प्रश्न और व्यावहारिक विचार
कथन-सार
एलिय्याह की विनती सुनकर और परमेश्वर के हाथों से बालक की प्राण-स्थिति लौटने से यह स्पष्ट होता है कि जीवन और मृत्यु परमेश्वर के हाथों में हैं। यह घटना ईश्वर की दयालु सत्ता, भरोसे के साथ की गई प्रार्थना, और समुदाय के भीतर जीवन-विसर्जन की आशा को पुष्ट करती है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
यशायः और योहान्ना से जुड़े प्रभावी प्रसंगों के साथ, विश्वास में प्रार्थना की भूमिका को देखा गया है; याकूब 5:16 के अनुसार रोग-चिकित्सा और जीवन के लिए प्रार्थना का महत्त्व स्पष्ट है।
निष्कर्ष
ईश्वर के इन घटनापूर्ण क्षणों में हमें यह सिखाया जाता है कि जीवन की शक्ति उसके पास है, और उचित समय पर प्रार्थना और आस्था उसे उद्घाटित करती है। इस वचन के पीछे वही निष्कलंक विश्वास है जो कठिनतम परिस्थितियों में भी जीवन की उम्मीद देता है।
नोट: इस पंक्ति के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के संक्षिप्त उद्धरण यदि उपलब्ध हों, वे नीचे के उद्धरण-स्तम्भ में केवल वही सत्यापित अंश होंगे:
“यह पाठ नबी की प्रार्थना का प्रतिफल है—जीवन का पुनरागमन ईश्वर की करूणा का चिह्न है।”