Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 13:1 2 राजाओं 13:2 2 राजाओं 13:3 2 राजाओं 13:4 2 राजाओं 13:5 2 राजाओं 13:6 2 राजाओं 13:7 2 राजाओं 13:8 2 राजाओं 13:9 2 राजाओं 13:10 2 राजाओं 13:11 2 राजाओं 13:12 2 राजाओं 13:13 2 राजाओं 13:14 2 राजाओं 13:15 2 राजाओं 13:16 2 राजाओं 13:17 2 राजाओं 13:18 2 राजाओं 13:19 2 राजाओं 13:20 2 राजाओं 13:21 2 राजाओं 13:22 2 राजाओं 13:23 2 राजाओं 13:24 2 राजाओं 13:25



मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
2 राजा 13:21 में एक अचंभित घटनाक्रम दिखाया गया है कि लोग किसी मनुष्य को मिट्टी दे रहे थे—यानी वह शव एक निष्क्रिय अवस्था में है—परन्तु जब एक समूह ने भविष्यद्वाणी के तौर पर एलीशा की कब्र के पास यह दृश्य देखा, तो मृतक कब्र में डालने के बाद भी एलीशा की हड्डियों से छूते ही जी उठ गया और अपने पाँवों के बल खड़ा हो गया। यह घटना ईश्वर की दिव्य विधान-शक्ति के अनुदान की एक असामान्य अभिव्यक्ति है, जो यह दिखाती है कि परमेश्वर का काम मर्यादा के समय या मानवीय धैर्य की सीमा पर भी हो सकता है और एलीशा के बारे में विश्वास रखने वाले समुदाय पर उसकी प्राण-शक्ति का असर रहता है।
पाठ-संदर्भ: साहित्यिक और थीमिक पृष्ठभूमि
यह घटना तड़ित चमत्कारों की परंपरा में आती है जब मृतक के साथ God-ward विश्वास के प्रतीक बनते हैं। एलीशा की मृत्यु-पूर्व सेवाओं ने यह स्पष्ट किया कि परमेश्वर अपने दूतों के साथ अपने लोगों के साथ कैसे विचरण कर रहा है, यहां तक कि उनके शव भी जीवन देने वाली शक्ति बन जाते हैं। यह कथा एक कटाक्ष है कि मृत्यु भी परमेश्वर के संदर्भ में एक अस्थायी अवस्था है जब विश्वास के बन्धन उनके पीछे रहता है।
धर्मशास्त्रीय महत्व
- ईश्वर की शक्ति का संकेत: इस घटना में शव के स्पर्श से जीवित होना यह दर्शाता है कि परमेश्वर की चमत्कारी शक्तियाँ सामान्य नियमों के बाहर चलती हैं।
- विश्वास और आस्था का प्रभाव: जो लोग एलीशा की देह-आवरण के पास थे, उनके मध्य भी देवत्व-प्राप्ति का संकेत पड़ता है, यह बताता है कि ईश्वर अपने दासों के माध्यम से अपनी योजना जारी रखता है।
पवित्र शास्त्रों के साथ सम्बद्धता
पठन-आस्थान: पूछताछ के सवाल
संक्षिप्त निष्कर्ष
2 राजाओं 13:21 हमें यह सिखाता है कि परमेश्वर की शक्ति मर्यादा के बिना भी सक्रिय रहती है और विश्वासियों के लिए जीवन-जीवन्त रहने का स्रोत बनी रहती है। चाहे स्थिति कितनी भी विपरीत क्यों न हो, परमेश्वर का उद्देश्य और कृपा बहते रहेंगे, और वह ऐसे क्षण भी बना सकता है जब मृत्यु से वापस जीवन को स्पर्श किया जाए।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) यशायाह 26:19 — मृत्यु पर विजय का आश्वासन; 2) यूहन्ना 11:25–26 — मसीह के जीवन देने के अधिकार; 3) प्रेरितों 4:12 — बचने का एकमात्र उपाय-यीशु।
नोट: इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सटीक उद्धरण उपलब्ध नहीं हैं; यदि मिलते हैं तो केवल उनके स्व-उद्धृत वाक्यों को संदर्भित रूप में संक्षेप में उद्धृत किया जाएगा।