2 राजाओं 13:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और उसने वह किया, जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था अर्थात् नबात के पुत्र यारोबाम जिस ने इस्राएल से पाप कराया था, उसके पापों के अनुसार वह करता रहा, और उनको छोड़ न दिया।

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2 राजाओं 13:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 राजाओं 13:2 — संदर्भन और अर्थ

आयात: यह पद यहूदा के राजा योशाफात के पुत्र योशआ AND अन्य घटनाओं के साथ संगत है, जब इस्राएल के राजा ने नबात के पुत्र यारोबाम के पाप के अनुसरण में अपना पाप बढ़ाया। पाठ का यह अंश दिखाता है कि राजा ने पाप को बरकरार रखा जैसा पाप पहले यारोबाम ने इजरायल में डाला था, और उसे छोड़ नहीं दिया। यह एक चेतावनी है कि सत्ता के होने पर भी विश्वासघात, पतन और पाप की प्रवृत्ति कैसे लटकती रहती है, यदि सुधार या परिवर्तन जागृत न हो।

केंद्रीय अर्थ

पद यह बताता है कि राजा ने पहले यारोबाम के पाप के ढांचे को बनाए रखा, अर्थात् याद दिलाने वाली बुराइयों और अपराजय प्रथाओं को बहाल किया। यह स्पष्ट करता है कि पाप का पैटर्न एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में कैसे संचरित हो सकता है जब सुधार के लिए समाज की नीयत नहीं बदलती।

मुख्य विषय

  • पाप की पैतृत्व-उत्पत्ति: यारोबाम के पापों की परंपरा राजा तक फैलती है और उनके प्रभाव अब भी दिखते हैं।
  • स्व-ध्वंस की प्रवृत्ति: सत्ता में रहते हुए भी नैतिक और धार्मिक उन्नति की कमी—जो राष्ट्र के लिए विनाशकारक हो सकती है।
  • धार्मिक-अधिकार और दायित्व: देश में दायित्व के ठोस नैतिक मानदंडों की कमी से फिर से पाप पुख्ता होता है।

कहीं नज़दीकी पाठ from पार्श्व संदर्भ

– पद 2 राजा 12–14 के आसपास भी हम पाते हैं कि राजा और राष्ट्र किस प्रकार यथास्थिति या सुधार की कमी के कारण प्रभावहीन हो जाते हैं।

सम्बद्ध अनुभाग (Cross-references) और छोटा स्पष्टीकरण

  • यीरम्याह 8:3 – पाप के प्रभाव से राजा के समय भी मृत्यु और विभाजन की सम्भावना पर ध्यान; पाप से मुक्ति के लिए आह्वान।
  • 2 राजा 14:24–27 – यारोबाम के पाप की निरंतरता और देव के निराकरण की दिशा में राष्ट्र की गिरावट का संकेत।
  • 2 समू 24:24 – पाप के विरुद्ध सुधार और परमेश्वर की दया के बीच विवेकपूर्ण निर्णय का महत्व।

उच्चारण में, उपर्युक्त संदर्भ एक सामान्य धारा दिखाते हैं कि नेतृत्व के पाप से समाज पर प्रभाव पड़ता है और परमेश्वर की गरिमा के अनुरूप सच्‍चे सुधार की आवश्यकता रहती है।

व्यावहारिक विचार

अपने समाज या परिवार में यदि हम पुराने पाप के ढांचे को फिर से जिंदा होते देखते हैं, तो यह एक जोखि का संकेत है कि सचेत होकर सुधार की चेष्टा करनी चाहिए। नेतृत्व में सत्य, नैतिकता और ईश्वर-आस्था के मानदंडों को फिर से स्थापित करना समुदाय में सुरक्षा और आशीर्वाद लाने का उपाय है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

इसVerse के द्वारा दिखाया गया है कि पाप के पैटर्न को त्यागे बिना सत्ता का मार्ग गड़बड़ा सकता है। यह एक चेतावनी है कि परमेश्वर के सामने कर्तव्य और नैतिक मजबूती के बिना राजतंत्र भी नुकसान उठाता है; सुधार की दिशा में आंतरिक परिवर्तन ही राष्ट्र की स्थिरता की कुंजी है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (इतिहास-आधारित टिप्पणीकारों से)

यदि उपलब्ध हो, नीचे के हिस्से मेंMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संक्षिप्त, सीधे उद्धरण दर्ज किए जाते हैं: “…”, आदि। कृपया ध्यान दें कि यहाँ उपलब्ध सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियाँ इस व्याख्या के साथ समेकित की गई हैं, ताकि पाठक को मूल अर्थ स्पष्ट रहे।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 राजाओं 13:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब यारोबाम सोचने लगा, “अब राज्य दाऊद के घराने का हो जाएगा।

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और उन पापों के कारण जो यारोबाम ने किए और इस्राएल से कराए थे, यहोवा इस्राएल को त्याग देगा।”

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और उसने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा था, अर्थात् नबात का पुत्र यारोबाम जिस ने इस्राएल से पाप कराया था, उसके पापों के अनुसार वह करता रहा, और उनसे अलग न हुआ।

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