Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 3:1 2 कुरिन्थियों 3:2 2 कुरिन्थियों 3:3 2 कुरिन्थियों 3:4 2 कुरिन्थियों 3:5 2 कुरिन्थियों 3:6 2 कुरिन्थियों 3:7 2 कुरिन्थियों 3:8 2 कुरिन्थियों 3:9 2 कुरिन्थियों 3:10 2 कुरिन्थियों 3:11 2 कुरिन्थियों 3:12 2 कुरिन्थियों 3:13 2 कुरिन्थियों 3:14 2 कुरिन्थियों 3:15 2 कुरिन्थियों 3:16 2 कुरिन्थियों 3:17 2 कुरिन्थियों 3:18



सीधा अर्थ: हमारे आशनों के कारण साहस के साथ बोलना
2 कुरिन्थियों 3:12 कहता है: इसलिए ऐसी आशा रखकर हम साहस के साथ बोलते हैं। यहाँ “आशा” से अभिप्राय है उद्धार, नये Covenant और परमेश्वर की मंजूरी में मिली आज़ादी। जो पुरुष या समूह यह विश्वास रखते हैं, वे स्पष्ट, निर्भय और ईमानदार तरीके से बोलते हैं, भले ही विरोध हो या कष्ट।
पृष्ठभूमि का छोटा संदर्भ
प्लस-उद्धार की उज्ज्वलता नई व्यवस्था के प्रकाश में सामने आती है, न कि धीरे-धीरे पुराने नियम के ढांचे के भीतर छिपी हुई। पौलुस यहाँ यह दिखाते हैं कि पहली-तीसरी की पवित्र प्रेरितगणता से अलग, वे विश्वासियों के लिए खुले संवाद, परिवर्तन और नये जीवन की घोषणा करते हैं—न कि डर या चकित करने वाले दिखावे से।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमगत सार
संलग्न धारणा—अनुवादक-पूर्वक उद्धरण
पादों के साक्षात्कार से प्रेरणा लेते हुए के कुछ प्रसिद्ध विचार, जो इस संदेश को मजबूती देते हैं:
मैथ्यू हेन्री (Matthew Henry) के समान प्रवाह में, “हम जो अच्छा विश्वास रखते हैं, उसे प्रकट करने के लिए साहसपूर्ण बोलते हैं”—यह उद्धरण इस पाठ के उद्देश्य को संक्षेप में बताता है।
ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) भी कहते हैं कि वांछित परिणाम के लिए सत्य के साथ स्पष्ट बोलना आवश्यक है, ताकि आत्मा को जीवन मिले।
एडम क्लार्क (Adam Clarke) के अनुसार, नई व्यवस्था के प्रकाश में बोलना पुराने भय को पीछे छोड़ना है, ताकि परमेश्वर की चिरंजीवी शक्ति दिख सके।
क्रॉस-रेफरेंसेस (प्रमुख संदर्भ और छोटे स्पष्टीकरण)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारे पास जो आशीर्वाद है, उसकी आशा से हम खुले और विनम्र रूप से बोलें। गलत-फहमियाँ न बनें; पर विश्वास, नम्रता, और सत्य के साथ बात करें ताकि दूसरों को ईश्वर के काम और प्रेम की गहराई दिख सके।