Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 7:1 2 कुरिन्थियों 7:2 2 कुरिन्थियों 7:3 2 कुरिन्थियों 7:4 2 कुरिन्थियों 7:5 2 कुरिन्थियों 7:6 2 कुरिन्थियों 7:7 2 कुरिन्थियों 7:8 2 कुरिन्थियों 7:9 2 कुरिन्थियों 7:10 2 कुरिन्थियों 7:11 2 कुरिन्थियों 7:12 2 कुरिन्थियों 7:13 2 कुरिन्थियों 7:14 2 कुरिन्थियों 7:15 2 कुरिन्थियों 7:16



2 कुरिन्थियों 7:4 — यहाँ साहस, विश्वास और क्लेश पर खोज
यह पद एक प्रेरक दृष्टिकोण देता है कि ख्रीस्तीय जीवन में कठिन क्षण आते हैं, परंतु परम शांति और विश्वास के कारण प्रभु के साथถวาย किया गया आस्तित्व किस प्रकार साहस, संतोष और उमंग से भरा रहता है। पवित्र लेख में यह संदेश बार-बार उभरता है कि ख्रिस्ती जीवन में क्लेश निरस्त नहीं होते, बल्कि ईश्वर की कृपा से उनका सामना करने की दृढ़ता मिलती है।
पद का मूल संदर्भ
पद 2 कुरिन्थियों पत्र में पौलुस अपने पुनः-आमन्त्रण, प्रेम और आत्म-त्याग के अनुभव साझा करते हैं। उन्होंने क्रियात्मक रूप से क्रियात्मक बनकर जवाब दिया कि वे दुख और परीक्षा के बीच भी अपनी आस्था में दृढ़ हैं। यहाँ “बहुत साहस के साथ बोलना” और “अपने सारे क्लेश में आनन्द” यह दर्शाते हैं कि परमेश्वर के काम के सामने मानवीय पीड़ा भी नई गहराई और भरोसे के साथ समझी जाती है।
मुख्य संदेश
1) विश्वास की दृढ़ता: कठिन समय में भी ईश्वर के प्रति भरोसा अडिग रहता है। 2)न्द्रिय उमंग: शांति और संतोष से भरे रहने का अनुभव मिलता है, भले परिस्थितियाँ कैसी भी हों। 3) चर्चात्मक आत्म-उत्साह: पौलुस के घमण्ड (गौरव) से यह स्पष्ट होता है कि प्रेरितों के बीच साझा ईश्वर-कार्य की महत्ता है, न कि स्वयं की स्थिति की पराधीनता।
समर्थन विचार और थीमैटिक प्रकाश
- शांति में संतोष: क्लेश के बावजूद आनन्द, यह बाइबिल की उस सामान्य धारा से जुड़ता है जो कहते हैं कि ईश्वर का चरण हमारे साथ है।
- विश्वास बनाम भय: साहस के साथ बोलना इंगित करता है कि प्रेरित अपने अनुभवों को ईश्वर के पवित्र कार्य के लिए उपयोग कर रहे हैं।
कुछ उपयोगी cross-references
इन संदर्भों में दिखाई देता है कि साहस और शांति दोनों ईश्वर के साथ एकत्रित अनुभव हैं, और क्लेश अंततः ईश्वर की महिमा के लिए एक अवसर बन जाते हैं।
पूर्व-पद विचार—प्रेरितों के अनुभव
पौलुस का यह अपने आप में प्रमाण है कि दुःख के बीच भी विश्वास का दूध पिलाने वाला पाठक के दिल में शांति बनाता है। वे अपने क्लेशों के बावजूद अपने आप को संतोषी और प्रेमपूर्ण रखते हैं, ताकि चर्चायें उनके द्वारा दिखाई गई वास्तविकता में बढ़ती रहें।
देवotional reflection
जब जीवन की राह कठिन हो, तब भी आप इस बात को याद रखें कि ईश्वर आपके साथ है, और उनके निश्चय पर अडिग रहने के अवसर उनके दिए जाते हैं। अपने आंतरिक क्लेशों में भी आप शान्ति के स्रोत को ढूंढें—प्रभु से मिलने वाली आस्तिक मुस्कान को अपने दिल में जगह दें। यह verse हमें बताता है कि साहस, शांति και आनन्द तीनों एक साथ चलते हैं, ताकि हम विश्वासी होकर अपने समय-समय पर ईश्वर की महिमा प्रकट कर सकें।
याद रखने योग्य बात: यह पंक्तियाँ सार्वजनिक-उद्धृत टिप्पणीकारों के विचारों के साथ समन्वय में एक संक्षिप्त समाकलन प्रस्तुत करती हैं—परन्तु मूल संदेश स्वयं प्रेरितों की अनुभूति से निकलता है: क्लेश में भी ईश्वर की स्थिरता हमारे भीतर एक नए आत्मविश्वास को जन्म देती है।