Old Testament
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2 कुरिन्थियों 7:1 2 कुरिन्थियों 7:2 2 कुरिन्थियों 7:3 2 कुरिन्थियों 7:4 2 कुरिन्थियों 7:5 2 कुरिन्थियों 7:6 2 कुरिन्थियों 7:7 2 कुरिन्थियों 7:8 2 कुरिन्थियों 7:9 2 कुरिन्थियों 7:10 2 कुरिन्थियों 7:11 2 कुरिन्थियों 7:12 2 कुरिन्थियों 7:13 2 कुरिन्थियों 7:14 2 कुरिन्थियों 7:15 2 कुरिन्थियों 7:16



स्पष्ट अर्थ
2 कुरिन्थियों 7:15 में कहा गया है कि जब वह प्रेम जो आपको उनके प्रति है, और उनकी आत्म-समर्पण की पवित्रता, आप उनके आज्ञाकारी भाव के स्मरण से जागते हैं, तब उनका प्रेम आप की ओर और भी बढ़ता है। सरल शब्दों में: प्रभु के साथ आत्म-विश्वास और तड़प से भरे सम्बन्ध में हमारी सुध-बुध, उनकी प्रेमपूर्ण प्रेरणा को और बढ़ाता है।
संदर्भ-परिप्रेक्ष्य
यह पद पवित्र-पत्रीय संवाद के बीच आता है, जहाँ पौलुस ने क्रेती चर्च के साथ उनके पाप-हटाने, दैवीय प्रेरणा और उदारता के अनुभवों को उद्धृत किया है। विश्लेषित संदर्भ में, उन्होंने क्रेती विश्वासियों के साथ एक सच्चे दिल से संबोधन किया कि कैसे उनका व्यवहार, उनके मन की शुद्धता और प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा, प्रेरणा बनकर देह को विवेकपूर्ण बनाते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटा विचार-सूत्र
अनुबंधित क्रॉस-रेफरेंसेज़
1) रोम 5:5 — प्रेम का पवित्र आत्मा के भीतर फैलना: स्वयं की कमी को भुलाकर प्रेम की बढ़त।
2) क्ल 3:10–11 — आत्म-समर्पण का महत्व और प्रभु के साथ सम्बन्ध की नई सृष्टि की स्मृति।
3) View: 1 जॉन 4:18 — भय बनाम प्रेम: प्रेम ही भय को दूर करता है, और विश्वासियों के बीच प्रेम की सुरक्षा बनती है।
संक्षेपित व्यावहारिक takeaway
जब हम प्रभु के निर्देशों के अनुसार जीवन जीते हैं—खासकर जब हमारा कदम विवेक और नम्रता से भरा हो—तो यीशु का प्रेम हमारे भीतर और अधिक प्रकट होता है। यह प्रेरणा न सिर्फ व्यक्तिगत पथ पर मार्गदर्शक है, बल्कि समुदाय के बीच विश्वास और सहयोग की मजबूत धुरी बनती है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain commentators से)
यदि किसी आवश्यक टेक्स्ट-उद्धरण की आवश्यकता हो, तो नीचे दिए गए तीन महत्त्वपूर्ण विचारकों के शब्दों के संक्षेप अनुमानों को संदर्भित किया गया है:
मैथ्यू हेनरी की टिप्पणी सामान्यतः यही ध्वनि देती है कि प्रेम और भय मुक्त आत्म-उद्धार, सच्चे परिवर्तन और समर्पण के परिणामस्वरूप आता है।
एलेक्ज़ेंडर बार्न्स की व्याख्या में यह संकल्पनात्मक है कि परमेश्वर का प्रेम विश्वासियों को बढ़ाता है और उनकी आज्ञाकारिता को प्रोत्साहित करता है।
एडम क्लार्क का दृष्टिकोण कहता है कि deeln, प्रभु के प्रेम की अनुभूति से भय नहीं, बल्कि विनम्रता और पवित्रता उत्पन्न होती है।
नोट: ऊपर उद्धृत टिप्पणी-उद्धरण सीधे पाठ में नहीं हैं, परन्तु इन पंक्तियों के अनुसार, उनके विचार “प्रेम का प्रवाह” और “आज्ञाकारिता-प्रेरणा” के बीच के संबंध को संवारते हैं।