Old Testament
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2 कुरिन्थियों 7:1 2 कुरिन्थियों 7:2 2 कुरिन्थियों 7:3 2 कुरिन्थियों 7:4 2 कुरिन्थियों 7:5 2 कुरिन्थियों 7:6 2 कुरिन्थियों 7:7 2 कुरिन्थियों 7:8 2 कुरिन्थियों 7:9 2 कुरिन्थियों 7:10 2 कुरिन्थियों 7:11 2 कुरिन्थियों 7:12 2 कुरिन्थियों 7:13 2 कुरिन्थियों 7:14 2 कुरिन्थियों 7:15 2 कुरिन्थियों 7:16



2 कुरिन्थियों 7:10 का संदर्भ और महत्व
पौलुस इस पत्र में करुणा-भरी पिक्षा से पख्त करता है कि परमेश्वर की भक्ति से उत्पन्न शोक, पछतावे की वह स्थिति है जो उद्धार की दिशा में ले जाती है। यह शोक परमेश्वर के गुणों के प्रकाश में हमारी तुच्छताओं को देखकर दिल में उत्पन्न होता है, न कि सांसारिक-जनित अपराध-भावना का नाटक। दूसरे शब्दों में, यह शोक निरर्थक आत्म-कलह नहीं है, बल्कि परिवर्तन की शुरुआत है जो हमें उद्धार की दिशा में दौड़ाती है।
मुख्य तात्पर्य
यह Verse हमें दिखाता है कि परमेश्वर-भक्ति से आने वाला शोक टिकाऊ और उद्धारकारी होता है, क्योंकि यह सचेत-स्वीकृति और परिवर्तन की ओर प्रेरित करता है। इसके विपरीत सांसारिक शोक 彩神争霸苹果0 जो नुकसान, उदासी और मृत्यु का कारण बनता है, वह आत्मिक परिवर्तन से दूर रहता है। परमेश्वर के प्रेम में किया गया पछतावा उस पाप से छुटकारे की राह खोल देता है जो पाप-पर्याय नहीं, बल्कि आत्मा को नया जीवन देता है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध संदेश (Cross-references)
- रोमियों 12:2 के अनुसार संसार के ढंग से ढाला गया विचार परिवर्तन हो कर परमेश्वर की इच्छा अनुरूप बनता है; यह बताता है कि कौन-सी शुद्ध इच्छा उद्धार-योजना में सहायक है।
- य mature? हिब्रियों 12:11 में अब भी स्पष्ट है कि अभी की शांति के लिए व्याकुलता है, परन्तु चरितार्थ होने पर शांति से फसल मिलती है—यानी शोक का उद्देश्य सुधार और उद्धार है।
- याकूब 4:9-10 कहता है कि विनम्र विनय और आँसू के साथ परमेश्वर के सामने आत्म-समर्पण करना आंतरिक परिवर्तन का मार्ग है।
व्यावहारिक प्रकाश
यदि आप खुद को अज्ञात दोषों के कारण दुखी पाते हैं, तो याद रखें कि परमेश्वर की भक्ति से उत्पन्न पछतावा आपको मुक्त कर सकता है—परिशोधन और उद्धार की राह। यह शोक आत्म-संयम, विश्वास और प्रभु यीशु मसीह के लिए निष्ठा बढ़ाता है। सांसारिक शोक से बचें जो निराशा और मृत्यु की ओर ले जाए; इसके बजाए प्रभु की ओर लौटें और उनके प्रेम में सुख-चैत्य पाएँ।
संक्षेप
इस Verse में जो शोक परमेश्वर-भक्ति से आता है वह उद्धार की दिशा में प्रेरित करता है, जबकि सांसारिक शोक केवल मृत्यु-प्रेरक बनता है। यह आध्यात्मिक प्रक्रिया हमें सचेत रूप से अपने पाप को अनुभव से स्वीकार कर, परमेश्वर के साथ उद्धार की नई जिंदगी की तरफ बढ़ने को कहता है।
मार्गदर्शक विचार के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के समान प्रमुख विचार नीचे उद्धृत नहीं किए गए हैं, पर उनके सामान्य अनुप्रयोगों के अनुसार यह commentary एक संयुक्त, निर्भर-रिपोर्ट देता है।
उद्धृत पंक्तियाँ (महत्त्वपूर्ण उद्धरण)
यह भाग मूल पाठ से संबंधित है; यदि उपलब्ध हो तो केवल उनके स्पष्ट, संक्षिप्त शब्दों को शामिल किया गया है।