Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 7:1 2 कुरिन्थियों 7:2 2 कुरिन्थियों 7:3 2 कुरिन्थियों 7:4 2 कुरिन्थियों 7:5 2 कुरिन्थियों 7:6 2 कुरिन्थियों 7:7 2 कुरिन्थियों 7:8 2 कुरिन्थियों 7:9 2 कुरिन्थियों 7:10 2 कुरिन्थियों 7:11 2 कुरिन्थियों 7:12 2 कुरिन्थियों 7:13 2 कुरिन्थियों 7:14 2 कुरिन्थियों 7:15 2 कुरिन्थियों 7:16



2 कुरिन्थियों 7:14 — संदर्भित स्थितिपरक विवरण
इस पद में पौलुस अपने संबोधन के बहाने कुरिन्थ के ईसाइयों से उसकी प्रशंसा-घमण्ड के बारे में सचेत करता है। यह लज्जा, सत्य और विश्वास की पुख़्तगी की चर्चा है कि किस प्रकार परमेश्वर की कृपा से उनकी घोषणा और वचन-प्रेरित आत्म-विश्वास वास्तविक प्रेरणाओं के साथ जुड़ते हैं। कुरिन्थियनों के साथ उनके संबंधों के समय, प्रेरित पौलुस ने मार्गदर्शित किया कि कठिनाई में भी विश्वास की असल प्रतिष्ठा उभरनी चाहिए, न कि घमण्ड का प्रदर्शन.
इस पाठ से परमेश्वर की बात कैसे सामने आती है
पौलुस बताता है कि यदि उसने किसी विषय में घमण्ड दिखाया भी, तो वह लज्जित नहीं होगा, क्योंकि उसका घमण्ड सत्य है—यह घमण्ड नहीं अहंकार का प्रदर्शन, बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह और सृजन-कार्य के कारण उसका आत्म-विश्वास है। कहना यह है कि परमेश्वर की सच्चाई और उनकी वाणी का प्रचार उन कारणों पर टिके होते हैं जो एक विश्वासी के भीतर परिवर्तन पैदा करते हैं; न कि पापी मान-आडंबर।
महत्वपूर्ण शब्द और इमेज
घमण्ड: यहाँ वह आत्म-उत्साह नहीं जो शरई-अपमान को जन्म दे, बल्कि विशेष कृपा से मिली सफलता की पुष्टि को संदर्भित करता है—परमेश्वर के काम के परिणामस्वरूप उत्पन्न आत्मिक आत्म-विश्वास।
सच-सच कहना: पौलुस और उनकी टीम ने जिन बातों को कहा, वे स्पष्ट और सत्य थे; ईमानदारी के साथ उन्होंने अपने दावे प्रस्तुत किये।
संबंधित बाइबल पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
इन क्रॉस-रेफरेंसेस में सत्य, सत्यापन और परमेश्वर की कृपा से मिली आस्थाओं की पुष्टि का संतुलन समझ आता है।
आज के संदर्भ में उपयोगी अनुप्रयोग
समापन सार
2 कुरिन्थियों 7:14 में पौलुस का संदेश यह है कि सत्यापित विश्वास, ईमानदार उद्घोषणा और परमेश्वर की कृपा से प्रेरित घमण्ड आत्मविश्वास बन सकता है, जो अंततः परमेश्वर के कार्यों की स्पष्ट गवाही देता है। यह पाठ आज भी प्रेरित करता है कि हमारी वाणी और व्यवहार में सत्य, नम्रता और भगवान की महिमा ही मार्गदर्शक होनी चाहिए।
टिप्पणीकर्ता नोट: अध्यात्मिक पंक्तियों के स्पष्ट अर्थ के लिए, नीचे उल्लेखित वास्तविक पाठ-योग्यों के अनुवादित विचारों का सहारा लिया गया है; Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डॉमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त उद्धरण आवश्यक हो तो पाठ के अनुसार उद्धृत किये जा सकते हैं।