Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 5:1 2 कुरिन्थियों 5:2 2 कुरिन्थियों 5:3 2 कुरिन्थियों 5:4 2 कुरिन्थियों 5:5 2 कुरिन्थियों 5:6 2 कुरिन्थियों 5:7 2 कुरिन्थियों 5:8 2 कुरिन्थियों 5:9 2 कुरिन्थियों 5:10 2 कुरिन्थियों 5:11 2 कुरिन्थियों 5:12 2 कुरिन्थियों 5:13 2 कुरिन्थियों 5:14 2 कुरिन्थियों 5:15 2 कुरिन्थियों 5:16 2 कुरिन्थियों 5:17 2 कुरिन्थियों 5:18 2 कुरिन्थियों 5:19 2 कुरिन्थियों 5:20 2 कुरिन्थियों 5:21



पुनर्रचित संदर्भ — 2 कुरिन्थियों 5:13 का तत्काल संदर्भ
यह वचन पौलुस की दूसरी कुरिन्थियों के उस भाग में है जहाँ वह अपनी प्रेरकता, सेवकीय जीवन और सुसमाचार के कारणों का बचाव कर रहा है। पूरा अध्याय आत्मा से प्रेरित आशा, नये सृष्टि का सिद्धांत और मसीह के लिए जीवन-वितरण की बात करता है। 5:13 सरल वाक्य दिखता है, पर यह पौलुस के संकल्प—परमेश्वर हेतु निःस्वार्थ जीवन और समुदाय के प्रति जवाबदेही—दोनों को उजागर करता है।
पवित्रशास्त्र यह क्या दिखाता है?
यह पद बताता है कि मसीही सेवा की प्रेरणा आंतरिक और दोगुनी होती है: परमेश्वर के प्रति समर्पण और मनुष्यों के प्रति प्रेमभरी कार्यालयिकता। "यदि हम बेसुध हैं, तो परमेश्वर के लिये" कहकर पौलुस का आशय यह है कि, चाहे वे दुनिया की समझ से विचलित या ईर्ष्यालु समझे जाएँ, उनकी प्राथमिकता परमेश्वर की इच्छा है। "और यदि चैतन्य हैं, तो तुम्हारे लिये हैं" में वह अपनी सजगता और समुदाय की भलाई की भावनात्मक, दायित्वपूर्ण अभिव्यक्ति दिखाते हैं। इसमें सेवा का लक्ष्य न केवल धर्मनिष्ठि है, पर लोगों की नवीनीकरण और भलाई भी है।
मुख्य शब्द और रूपक की स्पष्टता
"बेसुध" (out of one's mind) का अर्थ यहाँ नकारात्मक नहीं मात्र है; यह तीव्र आत्मिक उत्साह या संसार की सामान्य बुद्धि से अलग होने के एक भाव का संकेत देता है—ऐसा सम्मोहन जो परमेश्वर के लिए समर्पण से आता है। "चैतन्य" का अर्थ सजग, समझदार और दिलो-दिमाग से जुड़ा हुआ होना है। दोनों स्थितियाँ सेवक की निष्ठा को दर्शाती हैं: भावनात्मक उन्माद और ठोस समझ—दोनों ही परमेश्वर और लोगों के प्रति सेवकत्व में प्रयुक्त होते हैं।
संबंधित शास्त्र और उनका संक्षिप्त सम्बन्ध
मौलिक टिप्पणाएँ — पारंपरिक टिप्पणीकारों से
मैथ्यू हेनरी की शैली से प्रेरित सार में यह कहा जा सकता है कि पौलुस की भक्ति दुष्ट व प्रशंसनीय दोनों स्थितियों में परमेश्वर के प्रति दृढ़ है; अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की व्याख्याओं में भी सेवकत्व की निस्वार्थ प्रकृति और समुदाय के प्रति उत्तरदायित्व पर बल मिलता है। यदि कोई प्रत्यक्ष उद्धरण आवश्यक हो तो अल्बर्ट बार्न्स का छोटा कथन उपयोगी है: "पौलुस की प्रवृत्ति स्पष्ट है — वह लक्ष्य के लिये रहता है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।" (छोटा उद्धरण)
आधुनिक उपयोग और व्यक्तिगत आवेदन
आज के संदर्भ में यह पद हमें याद दिलाता है कि ईमानदार अनुयायी का जीवन कभी-कभी असहज या गलतफहमी का विषय बन सकता है; फिर भी परमेश्वर के प्रति निष्ठा और लोगों के प्रति संवेदना दोनों आवश्य्क हैं। सेवा करने वालों को चाहिए कि वे न केवल आत्मिक उत्साह रखें, बल्कि समझदारी और सहानुभूति के साथ दूसरों के लिये कार्य करें। निर्णय लेते समय यह प्रश्न पूछें: क्या मैं परमेश्वर के लिये समर्पित हूँ? और क्या मेरी सक्रियता लोगों की भलाई के लिये है?
निष्कर्षतः 2 कुरिन्थियों 5:13 हमें संतुलित जीवन का पाठ पढ़ाता है—आत्मिक सचेतनता के साथ परमेश्वर के प्रति निष्ठा और मनुष्यों के प्रति दयालु, समझदार प्रतिबद्धता।