Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 कुरिन्थियों 5:1 2 कुरिन्थियों 5:2 2 कुरिन्थियों 5:3 2 कुरिन्थियों 5:4 2 कुरिन्थियों 5:5 2 कुरिन्थियों 5:6 2 कुरिन्थियों 5:7 2 कुरिन्थियों 5:8 2 कुरिन्थियों 5:9 2 कुरिन्थियों 5:10 2 कुरिन्थियों 5:11 2 कुरिन्थियों 5:12 2 कुरिन्थियों 5:13 2 कुरिन्थियों 5:14 2 कुरिन्थियों 5:15 2 कुरिन्थियों 5:16 2 कुरिन्थियों 5:17 2 कुरिन्थियों 5:18 2 कुरिन्थियों 5:19 2 कुरिन्थियों 5:20 2 कुरिन्थियों 5:21



सीधे अर्थ का संक्षेप
2 कुरिन्थियों 5:2 में प्रेरित पतरस कहलाते हैं कि हम इस दुनियावी वस्तुओं के लिए कराहते नहीं, बल्कि अपने स्वर्गीय घर को पहन लेने की आकांक्षा रखते हैं; हमारा दिल संसार के ठहराव से ऊपर एक अदृश्य जीवन के लिए तरसता है, ताकि परमेश्वर का आशीर्वादपूर्ण अभिशासन बनाए रखा जा सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद, पौलुस के लेख के भीतर उन आंतरिक परिवर्तन और स्वर्गीय आशाओं का विवरण है जो ख्रीस्तीय जीवन की वास्तविकता बनती हैं। 5:1–5 तक का खंड साक्ष्य देता है कि यह शरीर मरने योग्य है, पर ईश्वर ने ऐसे घर की प्रतिज्ञा दी है जो न तो पृथ्वी पर है न पत्थर से बना; यह स्वर्गीय घर है। इस पंक्ति में लेखक आत्मिक जीवन के लिए तीव्र इच्छा को “कराहना” के रूप में वर्णित करता है—दृश्यता के साथ दर्द-भरे प्रतीक के रूप में—ताकि हम विश्वासी शरण में रहें।
व्याख्यात्मक observation
थीमेटिक नियम
क्रॉस-रेफरेंस और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
- रोम 8:18: इस जग के दुष्कर अनुभवों के बावजूद महिमा की अपेक्षा अधिक महान है; यह घर-परिवर्तन की भावना से जुड़ता है।
- रोम 8:23: हमें भी बेटेपन की आदर्श प्रतिलिपि मिलती है—स्वर्गीय अंगीकार का पूर्ण प्रमाण।
- फिलिप्पि 3:20-21: हमारे नागरिक स्वर्ग से हैं, और प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमारी निम्नतम देह को उनकी प्रतिमा पर बदला जाएगा।
नैतिक-व्यावहारिक takeaway
हम वर्तमान जीवन में जो अस्थिर पड़ाव देखते हैं, उनके बीच भी हम एक अटल आशा के साथ जीयें: परमेश्वर ने हमारे लिए एक स्वर्गीय घर तैयार किया है। इस आशा के कारण हम संसार की दुःख-सहनशीलताओं में भी धैर्य vengeance नहीं खोते और विश्वासी जीवन के लिए उत्साह बनाए रखते हैं।
महत्वपूर्ण उद्धरण (महत्वपूर्ण टीका)
यह अध्याय एक सामान्य ऐतिहासिक टिप्पणी के रूप में प्रेरित पतरस के भाव को स्पष्ट करता है—हमारा शरीर क्षयशील है, पर हमारी आशा अडिग है।
नवीन निष्कर्ष
इस पद से प्रेरित मोड़ यह है कि हम अपने जीवन के मूल्यांकन में पृथ्वी-केन्द्रित सुख से ऊपर उठकर, ईश्वर के स्वर्गीय घर की प्रतीक्षा करें। यह हमारी आस्थात्मक दृष्टि को स्थिर बनाता है और यह समझ देता है कि दुःख के बीच भी परमेश्वर का लक्ष्य महान है।
प्रयोजन-उद्धरण
जहाँ तक समयवाचक उद्धरणों का उल्लेख है, नीचे उपलब्ध शब्दावली में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पूर्व-प्रकाशित टिप्पणियों के सीधे उद्धरण अपेक्षित हैं; परंतु यहाँ हमने उन्हीं विचारों को समाहित किया है ताकि पाठक एक संयुक्त, प्रवाही धार समझ सके।