Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 11:1 2 राजाओं 11:2 2 राजाओं 11:3 2 राजाओं 11:4 2 राजाओं 11:5 2 राजाओं 11:6 2 राजाओं 11:7 2 राजाओं 11:8 2 राजाओं 11:9 2 राजाओं 11:10 2 राजाओं 11:11 2 राजाओं 11:12 2 राजाओं 11:13 2 राजाओं 11:14 2 राजाओं 11:15 2 राजाओं 11:16 2 राजाओं 11:17 2 राजाओं 11:18 2 राजाओं 11:19 2 राजाओं 11:20 2 राजाओं 11:21



2 राजाओं 11:18 — Meaning in brief
इस पद में यह दर्शाया गया है कि यहूदियों ने बाल के भवन, वेदियाँ और मूर्तियाँ तोड़कर और बाल के याजक मत्तान को मारकर, यहोवा के मंदिर के कार्यों को सम्मानपूर्वक फिर से स्थापित किया। भगवान के भवन की संरक्षा और पवित्रता को पुनः पहचान दिया गया, ताकि व्यवस्था के अनुसार पूजा एक केंद्रित और ईमानदार रूप में चली।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोवा के राजा यूहना (येरूबाब, राजा जो आकाश से उतरते समय यहूदियों में पुनः धार्मिक निष्ठा स्थापित करते हैं) के खोजी आंदोलन के क्रम में यह घटना घटित होती है। वह यहूदा के नगरों में शत्रुओं से भयभीत नहीं रहते हुए, राज्य के नेताओं के सहयोग से मूर्तिपूजा समाप्त कराते हैं और मंदिर की पवित्रता को फिर से स्थापित करते हैं। इसका उद्देश्य लोगों को यहोवा के प्रति समर्पित रखना और धार्मिक व्यवस्था को व्यवस्थित करना है।
interpretive observations
संकेतित थीम्स
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में) और उनकी दृष्टि
- 2 राजाओं 9:30-37: यहूदा के राजा के समय साधारण मोड़ और विरोधीों के निर्देशों के साथ निष्ठा के संघर्ष को दर्शाता है; यह दर्शाता है कि नीतिगत और धार्मिक पुनर्स्थापना का संघर्ष एक साथ चलता है।
- 2 राजाओं 12:4-7: मंदिर के बाजारीकरण और व्यवस्था-केन्द्रित पूजा के पुनर्निर्माण के लिए विनिर्देश और निधि-आहरण का महत्त्व बताता है।
- 2 पतरस 3:10-11: आधुनिक संदर्भ में पवित्रता की मांग और पवित्र कार्यों को बनाए रखने की चेतावनी देता है।
निष्कर्षात्मक व्यावहारिक takeaway
यह घटना स्मरण कराती है कि सामूहिक चेतना के लिए पूजा की मूलभूतता: एकल यहोवा के प्रति समर्पण, भंगुर प्रतीकों से ऊपर स्थिर विश्वसनीयता की स्थापना, और नेतृत्व की जिम्मेदारी। समुदाय की एकता तब मजबूत होती है जब नेतृत्व Temple के विनियमन और पवित्रता के मानकों को स्पष्ट करे, ताकि लोग सचमुच यहोवा की उपासना में लीन हों।
उद्धृत उद्धरण (जहाँ उपलब्ध)
यहां अगस्त-प्रमुख कबूल नामों के प्रत्यक्ष शब्दों का उद्धरण आवश्यक नहीं है, पर यदि योजना हो, तो मैक्थ्यू हेनरी, आर्नाल्ट बार्न्स या अडम क्लार्क के published टिप्पणियों में प्रासंगिक पंक्तियाँ सीमित रूप से उद्धृत की जा सकती हैं। नीचे उल्लेखित पाठांशों से संरेखित विचार सामान्य हैं:
संदर्भित टिप्पणीकारों के विचारों के सार में एक संयुक्त प्रवाह यह है कि धार्मिक पुनर्स्थापना को व्यवहारिक क्रम और नैतिक नेतृत्व के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि समुदाय सचमुच यहोवा के साथ एक नया संकल्प करें।