Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 राजाओं 12:1 2 राजाओं 12:2 2 राजाओं 12:3 2 राजाओं 12:4 2 राजाओं 12:5 2 राजाओं 12:6 2 राजाओं 12:7 2 राजाओं 12:8 2 राजाओं 12:9 2 राजाओं 12:10 2 राजाओं 12:11 2 राजाओं 12:12 2 राजाओं 12:13 2 राजाओं 12:14 2 राजाओं 12:15 2 राजाओं 12:16 2 राजाओं 12:17 2 राजाओं 12:18 2 राजाओं 12:19 2 राजाओं 12:20 2 राजाओं 12:21



इस पद का सीधे अर्थ
2 राजाओं 12:13 कहता है कि जो धन यहोवा के मंदिर में आया था, उससे स्वर्ण या चाँदी के किसी भी प्रकार के पात्र नहीं बने, बल्कि वह धन चढ़ावे या अन्य संस्थागत आवश्यकताओं के लिए अलग रखा गया था। इसका मतलब है कि पवित्र मंदिर की चढ़ाने वाली निधि को पवित्र और नियंत्रित रखा गया ताकि देवता के मंदिर के उपकरणों के लिए प्रयोग न हो सके, और इसके उपयोग में स्पष्ट सीमाएं हों।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
याकूब के राजा अधिकांश समय धार्मिक सुधार के दौर में थे। यहां उल्लेख है कि मंदिर के दाखिले हुए धन का दुरुपयोग रोकने के लिए यह व्यवस्था की गई थी कि वह निधि "भगवान के भवन" से जुड़ी धारणाओं तक सीमित रहे। यह दर्शाता है कि सामुदायिक कल्याण के लिए आए दान भी किसी प्रकार के व्यावसायिक लाभ या व्यक्तिगत संपदाओं के निर्माण में नहीं चढ़ा।
व्याख्यात्मक बिंदु
मौलिक टिप्पणियाँ (संक्षेप)
हिनिर्व अनुवाद के साथ उपलब्ध मुख्य टिप्पणीकारों के निष्कर्ष इस प्रकार हैं: यह वाक्य यह संकेत देता है कि धार्मिक उपासना में लाया गया धन भी सीमाओं के भीतर था और मंदिर की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ पात्रों का निर्माण नहीं किया गया। यह नीति धार्मिक संस्थाओं में धन के प्रयोग पर नियंत्रण लोकशक्ति द्वारा स्थापित मानक के रूप में दिखती है, ताकि पूजा-संस्थाओं के लिए धन का दुरुपयोग रोका जा सके।
Related insights from पुराने commentators
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke आदि के सार को मिलाकर संक्षेप विचार नीचे दिए जाते हैं:
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
यही विषय दूसरे ठोस संदर्भों से मेल खाता है कि दान और ढांचे के प्रबंधन स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए। उदाहरणार्थ: - राजा दाऊद के समय के दान-सम्बन्धी नियम (धन का उपयोग मंदिर-सेवा के लिए ही हो), - मंदिर की व्यवस्था और साधनों की धरोहर के जिम्मेदारी के बारे में निर्देश, - पवित्र धन के उद्देश्य और उसकी सीमा के बारे में निर्देश।
संक्षिप्त praktykal takeaways
1) जो धन ईश्वर के भवन के लिए आता है, उसका प्रयोग पवित्र-कार्य के भीतरTabs-पर हैं; निजी लाभ के लिए नहीं।
2) दान की पवित्रता बनाए रखना समुदाय के विश्वास को मजबूत करता है।
3) मंदिर-सेवा के लिए धन में स्पष्ट सीमाओं और पारदर्शिता की आवश्यकता है, ताकि दानकर्ता के मन में भरोसा बना रहे।